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'हजार पति रख सकती हूं कहकर उकसाया था', कोर्ट ने हत्या के दोषी की सजा घटा दी

मध्य प्रदेश High Court ने एक हत्या के दोषी शख्स की सजा कम कर दी है. कोर्ट ने सजा कम करते हुए गैर-इरादतन हत्या का हवाला दिया. साथ ही दोषी पर 1000 का जुर्माना भी लगा दिया.

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मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने हत्या के दोषी की सजा कम की. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी शिवा की उम्रकैद की सजा घटाकर सात वर्ष कैद और एक हजार रुपये जुर्माना निर्धारित किया है।
  • शिवा ने अपनी गर्भवती पत्नी की हत्या उस वक्त की जब उसकी पत्नी ने उकसाने वाला बयान दिया था, जिसके कारण कोर्ट ने हत्या को गैर-इरादतन माना।
  • सजा कम किए जाने के बाद आरोपी पर 304 पार्ट-II के तहत मुकदमा चलेगा और यह फैसला गैर-इरादतन हत्या के सिद्धांत को स्थापित करता है जिससे अपील या पुनर्विचार के दिशा-निर्देश मिल सकते हैं।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक हत्या के दोषी की उम्रकैद की सजा कम कर दी. अपनी पत्नी की हत्या के मामले में वह दोषी करार दिया गया था. कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सजा कम करते हुए कहा कि पत्नी का बयान उकसाने वाला था. इस वजह से गुस्से में पति ने उसे मार डाला. कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर पति अपनी पत्नी को प्लान बनाकर मार डालता तो उसकी मौत की सूचना रिश्तेदारों और पुलिस को क्यों देता? कोर्ट ने कहा कि हत्या पूर्व नियोजित नहीं थी. यानी इरादतन नहीं की गई थी. जिस पत्थर से महिला की हत्या की बात कही गई, वह मौके पर ही पड़ा था. 

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लेकिन सवाल है कि पत्नी ने पति को ऐसा क्या कह दिया, जिसके ‘उकसावे’ में महिला की हत्या कर दी गई? ये जानेंगे लेकिन पहले जान लेते हैं कि ये मामला है क्या?

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, हत्या के दोषी करार दिए गए शिवा नाम के शख्स पर जुलाई 2021 में कुलबहरी नदी के किनारे अपनी प्रेग्नेंट पत्नी को पत्थर से मारकर हत्या करने का आरोप लगा था. यह मामला सबसे पहले छिंदवाड़ा के एक ट्रायल कोर्ट में गया था. कोर्ट ने शिवा को इस मामले में दोषी पाया और IPC की धारा 304 के पार्ट-I के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई. 

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इसके बाद शिवा ने राहत के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. यहां हाईकोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि महिला की हत्या ‘गैर-इरादतन’ की कैटेगरी में आती है. इसके फैक्ट्स उम्रकैद की सजा को सही नहीं ठहराते. इसके बाद कोर्ट ने शिवा की सजा को कम करते हुए उस पर लगी धारा को 304 पार्ट-II में बदल दिया. इसके साथ ही शिवा की उम्रकैद की सजा घटाकर 7 साल कर दी. इस मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच कर रही थी.

आरोपी ने ही पुलिस को सूचना दी

बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि घटना के बाद शिवा ने खुद ही अपनी पत्नी किरण के रिश्तेदारों को फोन किया और हत्या की बात कबूली. हत्या की वजह पूछा जाने पर शिवा ने कथित तौर पर बताया कि उनकी पत्नी किरण ने कहा था कि ‘मैं तुम्हारे जैसे हजार पति रख सकती हूं.’ इसी बात से शिवा गुस्से में आ गया और उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी. बाद में उसने खुद ही पुलिस को घटना के बारे में जानकारी दी.

कोर्ट ने किरण के मौत का जिम्मेदार शिवा को मानते हुए हत्या के समय की परिस्थितियों पर गहन काफी जोर दिया. मामले की सुनवाई करते हुए दोनों जजों की बेंच ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि अगर आरोपी पहले से ही हत्या करने प्लान बनाया होता, तो शायद ही वो इस बात की सूचना मृतक के रिश्तेदारों और पुलिस को देता.

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तमाम दलीलों और सबूतों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि हत्या पहले से प्लान नहीं की गई थी. जिस पत्थर से हत्या की गई, वह भी मौके पर ही पड़ा हुआ था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि सबूतों से बार-बार पत्थर से हमला करने की बात भी साबित नहीं होती है. क्योंकि, एक ही पत्थर जब्त करके फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था, जबकि महिला के शरीर पर पथरीली नदी के सतह से भी लगी चोट लग सकती हैं.

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया

बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी जिक्र किया, जिसमें आरोपी या उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल को ऐसी स्थिति माना गया है, जिसमें शख्स अपना आपा खो सकता है. इस दौरान कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 300 के अपवाद 1 का भी जिक्र किया. कोर्ट ने यह भी कहा कि जब कोई पत्नी अपने पति से कहती है कि ‘वो उसके जैसे हजारों पति रख सकती हैं’, तो यह इनडायरेक्ट पति के बेकार होने की ओर इशारा करता है. 

बेंच ने सुनवाई के दौरान माना कि ऐसे बयान का मतलब ‘किसी इंसान या पति के तौर पर उसकी कोई अहमियत नहीं है’ और इसे अचानक उकसावा माना जा सकता है. इसलिए कोर्ट ने शिवा की सजा कम करके 7 साल की जेल और 1 हजार का जुर्माना कर दिया.

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