डाइटिंग करने वाले और बैलेंस्ड मील खाने वाले लोग अपने हर निवाले को लेकर सजग रहते हैं. कितना प्रोटीन. कितने कार्ब्स. और कितना शुगर. सब कुछ नपा तुला खाने का प्रयास रहता है. डाइटिंग ना करने वाली जनता भी अच्छा खाना खाने का प्रयास करती है. फिर चाहे सब्जी हो. फल हों. या अनाज. हाल के दिनों में आपकी प्लेट में रखे जाने वाले अंडों और कई अन्य चीजों को लेकर अलग-अलग दावे किए गए. उनकी सेफ्टी पर सवाल उठाए गए. ऐसे ही कुछ दावे अमूल के दही को लेकर किए गए थे. जिस पर अब कंपनी की सफाई सामने आई है. क्या दावे थे? और कंपनी ने क्या बताया, बताते हैं.
अमूल की दही में कौन सी गड़बड़ी का दावा था? जो कंपनी को सफाई देनी पड़ी
Trustified नाम के YouTube Channel पर दावा किया गया था कि Amul Masti Dahi के पाउच वाले वेरिएंट क्वालिटी टेस्ट फेल हो गए. जिसे कंपनी ने मिसइनफॉर्मेशन करार दिया है.


दरअसल, Trustified नाम के यूट्यूब चैनल पर दावा किया गया था कि अमूल मस्ती दही के पाउच वाले वेरिएंट क्वालिटी टेस्ट फेल हो गए. वीडियो में दावा किया गया कि पाउच दही में प्रति 100 ग्राम में 4.95 ग्राम प्रोटीन पाया गया. जबकि लेबल पर 4 ग्राम क्लेम किया गया था. उसी पैकेट में 3.51 ग्राम फैट पाया गया. जबकि लेबल पर 3.1 ग्राम ही क्लेम किया गया था. साथ ही ये भी दावा किया गया कि पाउच वेरिएंट कप वेरिएंट की तुलना में कम हाइजीनिक होता है.
इस वीडियो ने लोगों में काफी भ्रम और चिंता पैदा कर दी, क्योंकि अमूल जैसी विश्वसनीय ब्रांड पर ऐसे आरोप लगना आम नहीं है. इसके जवाब में अमूल ने तुरंत सोशल मीडिया पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया.
कंपनी ने वीडियो को मिसइनफॉर्मेशन करार देते हुए कहा कि अमूल मस्ती दही FSSAI के सभी नियमों और कंपनी के इंटरनल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करता है. अमूल ने स्पष्ट किया कि ये प्रोडक्ट ISO सर्टिफाइड डेयरी प्लांट्स में बनता है और बाजार में भेजने से पहले 50 से ज्यादा सख्त क्वालिटी टेस्ट से गुजरता है. कंपनी ने दोनों वेरिएंट (पाउच और कप) के बारे में बताया कि दोनों में प्रोसेसिंग और हाइजीन स्टेप्स एक ही होते हैं. पैकेजिंग में अंतर सिर्फ ग्राहकों की सुविधा के लिए है, क्वालिटी में कोई फर्क नहीं.
अमूल ने यह भी कहा कि दही एक लाइव प्रोडक्ट है, जिसमें हेल्दी बैक्टीरिया होते हैं. इसलिए इसे पैक पर लिखे निर्देशों के अनुसार ही हैंडल करना चाहिए. कंपनी को शक है कि टेस्टिंग से पहले सैंपल को सही तरीके से नहीं रखा गया या हैंडल किया गया, जिससे रिजल्ट प्रभावित हो सकता है.
अमूल ने इस तरह के वीडियो को जनता के बीच अनावश्यक डर फैलाने का जरिया बताया और कस्टमर्स से अपील की कि वो ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें. कंपनी ने जोर देकर कहा कि अमूल के सभी प्रोडक्ट्स हाई क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर बने होते हैं, और कस्टमर्स पूरे भरोसे के साथ इन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं.
वीडियो: अमूल बनाम नंदिनी कर्नाटक में दूध पर इतना हंगामा क्यों? पूरा मामला समझ लीजिए












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