महाराष्ट्र के अमरावती में एक सरकारी हॉस्टल में सैकड़ों छात्राएं एक साथ बिना वजह हंसने और रोने लगी थीं. उनके इस व्यवहार ने स्कूल से जुड़े लोगों के साथ आसपास के इलाके में भी दहशत भर दी थी. अफवाहें उड़ने लगीं कि इन स्कूली छात्राओं पर 'भूत-प्रेत का साया' है. बच्चियों के माता-पिता इस सबसे इतना डर गए कि स्कूल छुड़ाकर उन्हें अपने साथ ले गए. हॉस्टल में 800 से ज्यादा छात्राएं रह रही थीं. लेकिन 600 से ज्यादा छात्राओं को हॉस्टल से जाना पड़ा.
हॉस्टल में एक साथ हंसने-रोने लगी लड़कियां, डर के मारे 600 छात्राएं घर लौटीं, जांच में क्या पता चला?
Amravati haunted hostel: बच्चियों के माता-पिता इस सबसे इतना डर गए कि स्कूल छुड़ाकर उन्हें अपने साथ ले गए. हॉस्टल में 800 से ज्यादा छात्राएं रह रही थीं. लेकिन 600 से ज्यादा छात्राओं को हॉस्टल से जाना पड़ा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कई अभिभावक अपनी बेटियों को लेकर ‘भूमका’ (पारंपरिक आदिवासी हीलर) के पास ले गए थे. उन्हें लगा कि यह सब अलौकिक शक्तियों के कारण हो रहा है. लोगों का मानना है कि महुआ (मोह) पेड़ काटने के कारण यह सब हो रहा है. क्योंकि पेड़ काटने के बाद कोई पूजा नहीं हुई. महुआ को आदिवासी पवित्र पेड़ मानते हैं. लेकिन डॉक्टर्स बच्चों के व्यवहार में बदलाव को एक मनोवैज्ञानिक स्थिति बता रहे हैं.
छात्राएं करने लगीं अजीब व्यवहार!यह मामला पहली बार 29 जुलाई को सामने आया. डोमा गांव के शासकीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक आश्रम शाला में लगभग 16 छात्राएं 'अजीब' व्यवहार करने लगीं. अन्य बच्चियों के साथ ही टीचर्स भी इससे शुरुआत में डर गए थे.
लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि बच्चों में 'डिसोसिएटिव' (व्यक्ति का पहचान, समझ और वास्तविकता से जुड़ाव टूट जाना) या 'कन्वर्जन' के लक्षण मिले हैं. वे इसे ‘मास हिस्टीरिया’ का मामला बता रहे हैं.
मास हिस्टीरिया के पीछे कोई अफवाह, डर या खतरा जैसी चीज होती है. इसके लक्षणों में सीने में दर्द, सिर दर्द, बेहोशी, हंसना-रोना या आंशिक पैरालिसिस शामिल है. इसके सिम्पटम्स अचानक शुरू और खत्म हो जाते हैं. सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि मास हिस्टीरिया की वजह पता नहीं चल पाती.
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ प्रोग्राम की प्रमुख और मनोचिकित्सक डॉ. स्वाति सोनोने ने बताया,
“यह वास्तव में मास हिस्टीरिया का मामला है. एक बार हिस्टीरिया के लक्षण दिखने पर, दूसरे लोग भी उन्हें देखकर वैसा ही व्यवहार कर सकते हैं. इसलिए माता-पिता की काउंसलिंग जरूरी है. क्योंकि मरीज जानबूझकर या अनजाने में ऐसे लक्षणों को दोहरा सकते हैं.”
मेडिकल रिपोर्ट में इस पूरी घटना को ‘सिलेक्टिव हिस्टीरिया’ जैसा बताया गया. इसमें बिना किसी वजह के रोना, हंसना और भूलने जैसी बातें शामिल थीं. रिपोर्ट में तनाव और बिना वजह डर को भी इसके संभावित कारणों में बताया गया.
सांस्कृतिक मान्यताओं के कारण फैले लक्षण?सोनोने का मानना है कि लड़कियों में इन लक्षणों के फैलने का कारण सांस्कृतिक मान्यताएं भी हो सकती हैं. जांच टीम को पता लगा है कि एक महिला ने दावा किया था कि उसने एक साया देखा है. उसके बाद से वह अजीब तरह से व्यवहार करने लगी.
यह भी माना जा रहा है कि छात्राओं में मानसिक समस्या का कारण हॉस्टल की बनावट हो सकती है. क्योंकि कमरों में हवा आने-जाने की ठीक व्यवस्था नहीं थी. वह बहुत भरे हुए थे. एडिशनल कमिश्नर ने भी हॉस्टल का दौरा किया, मगर उन्हें सुपरनेचुरल वाले दावों को पुख्ता करने वाला सबूत नहीं मिला.
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एक्सप्रेस ने 11वीं क्लास में पढ़ने वाली एक छात्रा जान्हवी से बात की. उसने बताया कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है. उसने कहा,
"लड़कियां बिना किसी साफ वजह के रो और हंस रही थीं. कुछ तो बेहोश भी हो गईं. कुछ को अस्पताल में बिस्कुट दिए गए. लेकिन उन्होंने उन्हें खाने के बजाय बस घूरा.
जान्हवी, अन्य 50 लड़कियों के साथ आकर हॉस्टल में रह रही हैं. उसका मानना है कि ऐसा करने से शायद दूसरी छात्राएं भी आ जाएं. महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (ANIS) अब बच्चियों से मिल रही है. ताकि वह स्कूल आ सके. समिति ने बताया,
"हमने माता-पिता को समझाया कि पढ़ाई जरूरी है. भूत-प्रेत या किसी के शरीर में आत्मा आने जैसी कोई चीज नहीं होती, जिससे डरने की जरूरत हो.
हेडमास्टर संजय चौधरी का कहना है कि शुरू में 150 से ज्यादा छात्र स्कूल आ रहे थे. अब यह संख्या 200 हो गई है. स्कूल परिसर में एक नया हॉस्टल भी बन रहा है.
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