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तीन घंटे पहले रद्द की फ्लाइट, कोर्ट के 'हंटर' से एयरलाइन को भरने पड़े 16 लाख

2 जून 2022 को हैदराबाद से मैसूर जाने वाली फ्लाइट अचानक रद्द होने से 33 यात्रियों की यात्रा बिगड़ गई थी. होटल और कैब की नॉन-रिफंडेबल बुकिंग के कारण परिवार को 2.70 लाख का नुकसान हुआ. उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन को मुआवजा देने का आदेश दिया था. आदेश का पालन नहीं होने पर अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुए.

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अलायंस एयर ने यात्रियों को 16 लाख मुआवजा दिया (COURTSEY- Alliance Air)

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  • 'अलायंस एयर' ने हैदराबाद-मैसूर उड़ान रद्द करने के बाद 33 यात्रियों को 16 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा दिया और उपभोक्ता आयोग ने NBW वापस ले लिया।
  • 2 जून 2022 को उड़ान रद्द होने से यात्रियों को नुकसान हुआ था, जिसके बाद आयोग ने एयरलाइन को मुआवजा और कानूनी भुगतान का आदेश दिया था।
  • आदेश न मानने पर NBW जारी किए गए, अंततः भुगतान के बाद आयोग ने कार्रवाई समाप्त कर NBW वापस लिए।

हैदराबाद-मैसूर उड़ान को अचानक रद्द करने का फैसला ‘अलायंस एयर’ को भारी पड़ गया. दो साल से अधिक समय बाद आए एक फैसले की वजह से एयरलाइन अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया था. हैदराबाद कंज्यूमर कमीशन के फैसले के बाद ‘अलायंस एयर’ ने 33 यात्रियों को 16 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा दिया है. ‘राधा देवी मंधाना बनाम मेसर्स द अलायंस एविएशन लिमिटेड’ के फैसले के बाद एयरलाइन ने ये मुआवजा दिया है. 

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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-II, हैदराबाद ने इस मामले में मुआवजा देने का आदेश दिया था. आदेश के पालन से संतुष्ट होने के बाद 14 अक्टूबर को आयोग ने Execution Proceedings खत्म कर दी है. साथ ही आयोग की बेंच ने एयरलाइन अधिकारियों के खिलाफ पहले जारी किए गए NBW को भी वापस ले लिया.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद 2 जून 2022 की एक घटना से शुरू हुआ. उस दिन 33 लोगों का एक परिवार हैदराबाद के राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचा. परिवार में बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी शामिल थे. परिवार को मैसूर जाने वाली फ्लाइट पकड़नी थी. उड़ान में तीन घंटे से भी कम बचे थे. तभी एयरलाइन ने एक SMS भेजकर उन्हें उड़ान रद्द होने की सूचना दी. परिवार के पास न कोई मदद थी. न खाने-पीने की कोई व्यवस्था. 

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इसके बाद एलायंस एयर ने उन्हें एक लिखित संदेश भेजा. संदेश में उन्हें अपनी पूरी यात्रा रद्द करने की सलाह दी गई. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक उड़ान रद्द होने के कारण परिवार को लगभग 2 लाख 70 हजार का नुकसान हुआ. परिवार ने ऊटी और मुदुमलाई में होटल और कैब बुक कर ली थी. ये बुकिंग्स नॉन-रिफंडेबल थीं. परिवार ने इसके बाद आयोग में अपील की. लिहाजा 11 जुलाई 2024 को आयोग ने एक आदेश दिया. आयोग ने अलायंस एयर को सेवा में भारी कमी और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के यात्री देखभाल नियमों का पालन न करने का दोषी ठहराया.

एयरलाइन को निर्देश दिया गया कि वह 45 दिनों के भीतर नुकसान हुए 2.70 लाख रुपये, कुल मुआवजे के रूप में 9.90 लाख रुपये (30,000 रुपये प्रति यात्री) और कानूनी खर्च के लिए 20 हजार रुपये का भुगतान करे. ऐसा न करने पर तय की गई कुल राशि पर 12% वार्षिक ब्याज लगेगा. इस मामले में एयर इंडिया के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई गई थी. लेकिन उस शिकायत को खारिज कर दिया गया, क्योंकि निजीकरण के बाद वह एक अलग कॉर्पोरेट इकाई बन गई थी.

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आदेश न मानने पर जारी हुआ NBW

जब एयरलाइन ने आदेश का पालन नहीं किया तो उपभोक्ताओं ने Execution Plea दायर की. 25 अगस्त 2026 को, आयोग ने एयरलाइन की धारा 317 CrPC के तहत दायर एक अर्जी को भी खारिज कर दिया. इस अर्जी में एयरलाइन ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मांगी थी. आयोग ने पाया कि आदेश का लगातार पालन नहीं किया जा रहा था, जिसके चलते एयरलाइन के खिलाफ NBW जारी किए गए. इस आदेश के बाद, एयरलाइन ने पूरी डिक्री राशि (फैसले में तय रकम) और उस पर लगा ब्याज चुकाने के लिए एक डिमांड ड्राफ्ट जमा किया. इस तरह कुल 16 लाख रुपये से अधिक का पेमेंट एयरलाइन ने किया. 

पैसे दिए जाने के बाद इस execution matter को बंद करते हुए आयोग ने कहा कि आदेश का पूरी तरह से पालन किए जाने और पूर्ण संतुष्टि से जुड़ा एक मेमो दाखिल किया गया है. आगे कार्रवाई न करने के अनुरोध और Full Satisfaction मेमो के आधार पर इस आवेदन को समाप्त किया जाता है. साथ ही जारी किए गए NBW भी वापस लिए जाते हैं.

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