‘महिलाओं पर भी गैंगरेप का आरोप लगाया जा सकता है.’ ये टिप्पणी दिल्ली हाई कोर्ट ने की है. इसके लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70 का हवाला दिया. एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने कहा कि BNS की धारा 70 में अपराध के लिए किसी खास लिंग (Gender) को जिम्मेदार नहीं माना गया है. यानी, ये धारा लिंग-निरपेक्ष (जेंडर न्यूट्रल) है. इसके तहत किसी महिला पर भी गैंगरेप के अपराध का आरोप लगाया जा सकता है.
महिला भी गैंगरेप की आरोपी हो सकती हैः दिल्ली हाईकोर्ट
एक मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि BNS की धारा 70 में अपराध के लिए किसी खास लिंग (Gender) को जिम्मेदार नहीं माना गया है. यानी, ये धारा लिंग-निरपेक्ष (जेंडर न्यूट्रल) है. इसके तहत किसी महिला पर भी गैंगरेप के अपराध का आरोप लगाया जा सकता है.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला पर आरोप है कि उसने अपनी नाबालिग बेटी को एक आदमी के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया. ये भी आरोप है कि दिसंबर 2023 से जुलाई 2024 के बीच जब उस आदमी ने लड़की का बार-बार यौन शोषण किया, तब महिला भी वहां मौजूद थी. इस केस में फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा,
BNS की धारा 70 में ‘एक या एक से अधिक व्यक्तियों का समूह’ शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. इसका मतलब सिर्फ पुरुषों का समूह नहीं माना जा सकता. इस शब्द को केवल पुरुषों तक सीमित रखने का कोई तर्क या आधार नहीं है. इसलिए, यहां ‘व्यक्तियों’ शब्द को जेंडर न्यूट्रल समझा जाना चाहिए.
कोर्ट ने आगे कहा कि जरूरी नहीं कि गैंगरेप का आरोपी सिर्फ उसको कहें जिसने रेप किया हो. जिनकी मंशा भी इस तरह के अपराधियों से मिलती है वो लोग भी अपराधी माने जाएंगे. इस बात पर कोर्ट ने एक उदाहरण दिया,
हो सकता है कि कोई महिला रेप करने वाले लोगों के समूह का हिस्सा न हो, लेकिन उसने पीड़ित के साथ रेप करवाने की साझा मंशा से उनकी मदद की हो.
कोर्ट ने कहा कि BNS की धारा 70 के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति ऐसे समूह का हिस्सा है या अपराध को अंजाम देने की साझा मंशा के तहत उसे संभव बनाने में मदद करता है, तो उसे भी गैंगरेप का अपराध करने वाला माना जा सकता है. कोर्ट ने कहा,
ऐसा कोई आधार नहीं है, जिसके चलते यह माना जाए कि किसी महिला पर BNS की धारा 70 के तहत गैंगरेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता.
फैसला सुनाते वक्त कोर्ट ने एक जर्मन कहावत का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा कि ‘जो व्यक्ति चोर को सीढ़ी पकड़ाता है, वह भी उतना ही दोषी है जितना चोर.’ इस कहावत के जरिए कोर्ट ने समझाया कि किसी दूसरे व्यक्ति को अपराध करने में मदद करने वाला भी उसके लिए जिम्मेदार हो सकता है.
मामला क्या था?कोर्ट जिस मामले पर सुनवाई कर रही थी, वो जुलाई 2024 का है. उस वक्त इस मामले में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act), 2012 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत केस दर्ज किया गया था. महिला भी इस मामले की आरोपियों में शामिल थी. निचली अदालत ने उसके खिलाफ BNS की धारा 70 के तहत गैंगरेप का आरोप भी तय किया था. महिला ने हाई कोर्ट में इस आरोप को चुनौती दी. दलील दी कि वह महिला है, इसलिए उस पर गैंगरेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता. उसका कहना था कि भारतीय कानून के तहत रेप का अपराध केवल पुरुष ही कर सकता है.
15 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया. कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति पर उसके लिंग की परवाह किए बिना गैंगरेप का आरोप लगाया जा सकता है. हालांकि, कोर्ट ने ये भी कहा कि BNS के तहत किसी महिला पर गैंगरेप का आरोप तभी लगाया जा सकता है, जब वो मामले में अकेली आरोपी न हो. कोर्ट ने कहा,
किसी महिला पर अकेले गैंगरेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि पहली नजर में यह IPC की धारा 375 और BNS की धारा 63 में रेप की दी गई कानूनी परिभाषा के अनुरूप नहीं होगा. इन प्रावधानों को फिलहाल जिस तरह समझा जाता है, उसके मुताबिक रेप का अपराध पुरुष द्वारा किया जा सकता है.
कोर्ट ने आगे कहा कि किसी गैंगरेप मामले में महिला को अकेला आरोपी बनाया जा सकता है या नहीं, इस सवाल पर भविष्य में किसी उपयुक्त मामले में फैसला लिया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि आने वाले समय में इस सवाल पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है. खासकर इसलिए, क्योंकि रेप की जो कानूनी परिभाषा है उसमें कुछ और ऐक्शन्स जोड़ दिए गए हैं, जिन्हें गैर-पुरुष आरोपी भी अंजाम दे सकते हैं.
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