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'सस्ते विदेशी लेबर छीन रहे अमेरिकियों की नौकरी', H-1B वीजा पर बोले ट्रंप के सांसद

अमेरिकी सांसद राइली मूर ने आरोप लगाया है कि कंपनियां अमेरिकी युवाओं के बजाय कम वेतन पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को H-1B वीजा के जरिए नौकरी दे रही हैं.

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अमेरिकी सांसद राइली मूर ने H1-B वीजा पर सवाल उठाए हैं. (फोटो- India Today)

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  • अमेरिका के सांसद राइली मूर ने कहा कि H-1B वीजा कार्यक्रम के तहत विदेशी कर्मचारी अमेरिकी कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्स की जगह कम वेतन पर नौकरियां ले रहे हैं।
  • अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने की नीति और कम वेतन पर काम करने की प्रवृत्ति के कारण स्थानीय युवाओं के रोजगार पर प्रभाव पड़ा है, जिससे रोजगार विवाद बढ़ा है।
  • इस बयान के बाद H-1B वीजा और चेन माइग्रेशन को लेकर बहस में वृद्धि हुई है और यह देखने को मिलेगा कि अमेरिकी नीति निर्माता इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।

‘H-1B वीजा वाले लोग अमेरिकियों की नौकरियां छीन रहे हैं. अमेरिकी कंपनियां अपने देश के ग्रेजुएट्स की बजाय उन विदेशियों को नौकरी दे रही हैं, जो कम सैलरी पर काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं.’ ये बात अमेरिका के एक सांसद राइली मूर ने कही है. एक टीवी चैनल से बात करते हुए मूर ने कहा कि H-1B वीजा पर अमेरिका आने वाले कर्मचारी अपने परिवार के सदस्यों को भी वहां लाते हैं. इससे एक ‘चेन माइग्रेशन’ शुरू हो जाती है. राइली मूर का ये बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने और इससे वहां के लोकल कर्मचारियों पर पड़ने वाले असर को लेकर बहस चल रही है.

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बता दें कि अमेरिकी H-1B वीजा का फायदा उठाने वालों में सबसे ज्यादा भारतीय होते हैं. अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में H-1B वीजा पाने वालों में करीब 70 फीसदी भारतीय नागरिक थे. भारत के कई टेक्नोलॉजी प्रफेशनल्स के लिए H-1B वीजा अमेरिका में लंबे समय तक करियर बनाने का रास्ता खोलता है.

क्या कहा राइली मूर ने?

राइली मूर का कहना है कि इस वीजा की वजह से अमेरिका के कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्स को नौकरियां नहीं मिल रही हैं. एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने H-1B वीजा और ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) प्रोग्राम्स को ‘स्कैम’ बताया और आरोप लगाया कि इनके जरिए कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं.

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मूर का दावा है कि पिछले साल (2025 में) अमेरिका में करीब 6.5 लाख छात्रों ने कंप्यूटर साइंस और इससे जुड़ी पढ़ाई पूरी की. इसी दौरान 5 लाख से ज्यादा H-1B वीजा जारी किए गए.
‘द स्कॉट जेनिंग्स शो’ में बातचीत के दौरान मूर ने आरोप लगाया कि ये विदेशी कर्मचारी कम वेतन पर काम करने को तैयार हैं. उनका श्रम सस्ता पड़ता है. ऐसे में हमारे देश के युवाओं की जगह उन्हें नौकरियां दी जा रही हैं. मूर का ये इंटरव्यू सलेम न्यूज चैनल पर प्रसारित हुआ था.

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मूर ने कहा कि कंपनियां H-1B वीजा का इस्तेमाल सस्ते कर्मचारियों को अमेरिका लाने में कर रही हैं. इससे अमेरिका के उन युवाओं को नुकसान हो रहा है, जो कॉलेज से अकाउंटिंग, कंप्यूटर साइंस और दूसरे विषयों में डिग्री लेकर निकलते हैं और नौकरी के लिए तैयार होते हैं. उन्होंने इस वीजा के जरिए चेन माइग्रेशन को लेकर भी चिंता जताई. मूर ने कहा कि H-1B वीजा पर अमेरिका आने वाले कर्मचारी अपने परिवार के सदस्यों को भी वहां लाते हैं. उन्होंने कहा कि आमतौर पर H-1B वीजा पर आने वाला व्यक्ति अपने परिवार के 10 सदस्यों को भी साथ लाता है. इस तरह इसके साथ ‘चेन माइग्रेशन’ का पूरा मामला जुड़ा हुआ है. 

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