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विदेश में पढ़े फिर 960 रुपये की नौकरी की, सिंडिकेट बैंक के पूर्व चीफ का जॉइनिंग लेटर वायरल

Ajay Nanavati Syndicate Bank Ex chief: अजय नानावटी ने बताया कि जब वो विदेश से पढ़कर वापस आए तो उन्हें टाटा कंसल्टिंग की तरफ से असिस्टेंट कमर्शियल अफसर का जॉब ऑफर आया था. उन्होंने बाकी हाई पेइंग जॉब ऑफर छोड़कर इसे एक्सेप्ट कर लिया.

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सिंडिकेट बैंक के पूर्व चीफ ने बड़ी सलाह दी है. (फोटो- Linkedin)

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  • अजय नानावटी ने अपने शुरुआती करियर में हाई पेइंग ऑफर को छोड़कर टाटा कंसल्टिंग की 960 रुपये की नौकरी चुनी और यह निर्णय उन्होंने 1977 में लिया था।
  • अजय नानावटी के पास अन्य कंपनियों से अधिक सैलरी के प्रस्ताव थे, लेकिन उन्होंने शुरुआती करियर में सीखने को प्राथमिकता देने की सलाह दी, जो उनके पिता ने भी माना।
  • अजय नानावटी के अनुभव को लेकर युवाओं में चर्चा शुरू हुई, जिसमें कुछ ने सहमति जताई तो अन्य ने इसमें लगातार सीखने के महत्व को रेखांकित किया।

अपने शुरुआती करियर में काम सीखने पर ध्यान देना चाहिए या फिर ज्यादा सैलरी देने वाली कंपनी में स्विच कर जाना चाहिए? ये सवाल अक्सर आपके मन में उठता होगा. कुछ लोग झट से जवाब दे देंगे कि पैसा लो और आगे बढ़ो. तेज़ी से बदलती इस दुनिया में दौलत और शोहरत किसे नहीं चाहिए? लेकिन अब Gen X के एक प्रतिनिधि और सिंडिकेट बैंक के पूर्व चीफ अजय नानावटी ने Millenial और GEN Z को एक मैसेज दिया है. उन्होंने अपना एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि कैसे उन्होंने हाई पेइंग जॉब ऑफर के बदले 960 रुपये की सैलरी पर टाटा की नौकरी चुनी. 

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ये बात है साल 1977 की. तब अजय नानावटी को टाटा कंसल्टिंग की तरफ से असिस्टेंट कमर्शियल अफसर की नौकरी मिली. उस ज़माने के हिसाब से तनख्वाह थी 960 रुपये. वे अमेरिका से केमिकल इंजीनियरिंग पढ़कर लौटे थे. उन्होंने बताया कि उनके पास इस ऑफर के बरक्स कई और जॉब ऑफर थे. जिसमें उन्हें कई गुना ज्यादा सैलरी मिल रही थी. लेकिन उन्होंने बॉम्बे में टाटा की नौकरी चुनी. क्यों? ये उन्होंने अपने लिंक्डइन पोस्ट में विस्तार से बताया है. 

टाटा को ही क्यों चुना?

अजय नानावटी ने अपने पोस्ट में बताया कि उनके पिता एक MNC में मैनेजिंग डायरेक्टर थे. फिर भी उन्होंने ऑफर एक्सेप्ट करने की सलाह दी. उन्होंने यही सलाह जेन जी को दी है. उनका मानना है कि करियर के शुरुआती फेज में उन्हें सीखने पर ध्यान देना चाहिए, न कि कमाने पर. उन्होंने लिखा कि उनके पास दूसरे जॉब ऑफर भी थे, लेकिन वे टाटा के साथ काम करने का मौका नहीं गंवाना चाहते थे. 

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TCS का जॉब ऑफर. 

उन्होंने अपनी पहली नौकरी 07/07/1977 को शुरू की और बताया कि ये उनके जीवन का सबसे सही फैसला था. उन्होंने युवाओं से साफ़ कहा कि काबिल बनने पर ध्यान देना चाहिए, पैसे बाद में भी आ जाएंगे.

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सिंडिकेट बैंक के पूर्व चीफ अजय नानावटी के इस पोस्ट के कॉमेंट सेक्शन में दो धड़ों में लोग बंट गए. एक पक्ष ने अपने दिन याद किए और अजय नानावटी से सहमति जताई. जबकि दूसरे पक्ष ने कहा कि सीखना अनवरत जारी रहता है. इसे पैसे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

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