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महिला को 'लापरवाह' Rapido कैप्टन मिला, एक्सीडेंट के बाद इलाज में 20 लाख खर्च, कोई मदद नहीं मिली

बेंगलुरु में काम करने वाली एक इंटीरियर डिजाइनर रैपिडो बाइक टैक्सी से एक्सीडेंट में बुरी तरह से घायल हो गई. उनके इलाज में 20 लाख रुपये का खर्च आया. सानी कृष्णा नाम के इस महिला का कहना है कि रैपिडो ने उनकी कोई आर्थिक मदद नहीं की, इसलिए अब वो बाइक सर्विस कंपनी को कंज्यूमर कोर्ट में घसीटेंगी.

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सानी कृष्णा ने रैपिडो को कंज्यूमर कोर्ट में घसीटने का फैसला किया है. (तस्वीरें- आजतक/इंस्टाग्राम)

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  • बेंगलुरु में सानी कृष्णा ने ऑफिस आने के लिए Rapido बाइक टैक्सी बुक की थी, जिसमें ड्राइवर की लापरवाही से गंभीर दुर्घटना हुई, जिसमें उन्हें कई बड़ी सर्जरी करानी पड़ीं।
  • सानी के दुर्घटना के बाद Rapido कंपनी से सहायता न मिलने और केवल 1 लाख रुपये के बीमा क्लेम की पेशकश के कारण उन्होंने कंज्यूमर कोर्ट में मामला दर्ज करने का निर्णय लिया।
  • इस मामले के कारण Rapido और अन्य राइड-हेलिंग सेवा प्रदाताओं की सुरक्षा नीतियों और दुर्घटना के बाद सहायता व्यवस्था की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग बढ़ी है।

आम तौर पर कई लोग नौकरी पर जाने के लिए Rapido बाइक टैक्सी बुक करते हैं. बेंगलुरु की रहने वाली एक महिला ने भी यही किया. लेकिन उनकी यात्रा मंजिल तक नहीं पहुंच पाई. बाइक ड्राइवर की लापरवाही के चलते उनका भयानक एक्सीडेंट हो गया. उनको कई बड़ी सर्जरी करानी पड़ीं. इलाज पर 20 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो गए हैं. अब उन्होंने Rapido पर साथ न देने का आरोप लगाते हुए कंज्यूमर कोर्ट में घसीटने का फैसला किया है.

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इंस्टाग्राम पर शेयर की स्टोरी

32 साल की सानी कृष्णा ने इंस्टाग्राम पर अपनी कहानी शेयर की है. कृष्णा केरल की रहने वाली हैं. वह बेंगलुरु में इंटीरियर डिजाइनर के तौर पर काम करती हैं. यहां सानी बायरासंद्रा में रहती हैं और उनका ऑफिस डोमलूर में है. घटना के दिन उन्होंने ऑफिस जाने के लिए रोज की तरह Rapido बाइक टैक्सी बुक की थी.

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सानी के मुताबिक, बाइक मुश्किल से एक किलोमीटर गई होगी तभी ड्राइवर ने बागमाने टेक पार्क के पास एक ट्रैक्टर को ओवरटेक करने की कोशिश की. उनका आरोप है कि इसी दौरान बाइक का बैलेंस बिगड़ा और वह सड़क पर गिर गईं. इसके बाद ट्रैक्टर उनके ऊपर से गुजर गया, जिससे उनको गंभीर चोटें आईं.

हादसे के तुरंत बाद सानी को पास के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. बाद में उनको बेंगलुरु के मणिपाल हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया. वहां उनकी कई सर्जरी हुईं. आगे के इलाज के लिए उनको केरल के कोझिकोड स्थित मिथ्रास हॉस्पिटल जाना पड़ा.

सानी ने पूरी आपबीती इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए Rapido पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हादसे के बाद उनको अकेला छोड़ दिया गया. उन्होंने पोस्ट में लिखा, 

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Rapido महिलाओं की सुरक्षा का खूब प्रचार करती है. 17 जून को इसी भरोसे मैंने बाइक टैक्सी ली थी. लेकिन कुछ ही देर बाद मैं ट्रैक्टर के नीचे आ गई और कंपनी ने मेरी कोई मदद नहीं की.

Rapido के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट जाएंगी

सानी ने बताया कि उन्होंने कंपनी को लीगल नोटिस भी भेजा. लेकिन जवाब में सिर्फ ऑटोमेटेड ईमेल आए, जिसमें उनको इंश्योरेंस क्लेम का प्रोसेस बताया गया. उनका आरोप है कि कंपनी की ओर से उन्हें सिर्फ 1 लाख रुपये का बीमा क्लेम करने की बात कही गई. जबकि उनके इलाज में 20 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो चुका है.

सानी कृष्णा ने ये दावा भी किया कि सोशल मीडिया पर उनकी कहानी शेयर करने के बाद कई और लोगों ने उनसे कॉन्टैक्ट किया. इन लोगों ने उनको बताया कि दुर्घटना के बाद उनको भी कंपनी से पर्याप्त मदद नहीं मिली. उन्होंने कहा,

 Rapido की सेफ्टी गारंटी सिर्फ एक मार्केटिंग ट्रिक है. अब मैं इस मामले को कंज्यूमर कोर्ट में ले जा रही हूं. कंपनियां लोगों की जिंदगी को हल्के में नहीं ले सकतीं.

इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ लिया है. हजारों लोग सानी के सपोर्ट में आए हैं. कई यूजर्स ने बाइक टैक्सी सर्विस में सिक्योरिटी और हादसे के बाद यात्रियों को मिलने वाली सहायता पर सवाल उठाए हैं. लोगों ने इस पूरे मामले की जांच कराने और राइड-हेलिंग कंपनियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है.

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Rapido ने क्या कहा ?

सोशल मीडिया पर लोगों के विरोध के बाद Rapido की प्रतिक्रिया आई है. कंपनी ने बताया कि वह इस मामले को लेकर सानी के संपर्क में है. बाइक सर्विस कंपनी ने बताया,

हमारी कस्टमर सर्विस ने सानी से मिलकर उनको Rapido प्लेटफॉर्म पर लागू इंश्योरेंस क्लेम करने के प्रोसेस के बारे में डिटेल में बताया है. लेकिन अभी तक हमें जरूरी डॉक्यूमेंट्स या क्लेम नहीं मिले हैं. डॉक्यूमेंट मिलते ही कंपनी एक्शन लेगी.

हालांकि सानी कृष्णा ने Rapido के दावे को खारिज किया है. उनका कहना है कि Rapido की ओर से उनको मदद नहीं मिल रही है, जिसके चलते उन्हें अपना इलाज का भारी भरकम खर्चा खुद ही उठाना पड़ा.

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