अगर आप अगले कुछ दिनों में हवाई सफर का प्लान बना रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. भारत के एयरलाइन्स अपने बोइंग विमानों तकनीकी सुधार और सेफ्टी अपडेट कर रहे हैं. ऐसा अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफएए (FAA) के नए सुरक्षा निर्देशों के बाद किया जा रहा है.
बोइंग विमानों में ये बदलाव करने वाली हैं भारतीय एयरलाइन्स, आपकी फ्लाइट पर भी असर पड़ेगा क्या?
Boeing 787 Upgrades and Passenger Rights: अमेरिका की एयललाइन्स रेगुलेटरी संस्था FAA ने बोइंग विमानों के दरवाजे को लेकर सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. इसके बाद भारत में भी बोइंग विमानों में तकनीक अपग्रेड का काम चालू हो चुका है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सुधारों की शुरुआत एयर इंडिया से हो रही है, जिसने अपने बोइंग विमानों के बेड़े का टेक्निकल अपग्रेड शुरू भी कर दिया है. माना जा रहा है कि जल्दी ही इंडिगो समेत दूसरे भारतीय एयरलाइन्स भी ऐसा ही करेंगे.
एक तरफ तो ये सेफ्टी अपग्रेड हैं, वहीं इसके साथ ही पैसेंजर राइट्स यानी यात्रियों के अधिकारों को लेकर भी लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं. सवाल कि इन सब बदलावों का आपकी यात्रा पर क्या असर पड़ेगा. मिसाल के तौरपर क्या इन बदलावों के बाद फ्लाइट देरी से आने या अचानक कैंसिल हो जाने जैसी समस्या से निजात मिल पाएगी.
नए तकनीकी अपडेट हैं क्या?
सबसे पहले बात करते हैं उस तकनीकी अपडेट की जिसके चलते एविएशन मार्केट में चर्चाएं तेज हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ समय पहले ही अमेरिकी नियामक FAA ने बोइंग विमानों को लेकर नए सिक्योरिटी गाइड लाइन्स जारी किए थे. ये नए सुरक्षा निर्देश बोइंग 787-8, 787-9 और 787-10 मॉडल के विमानों को लेकर इश्यू हुआ था.
रिपोर्ट्स की मानें तो फ्लाइट के टेक-ऑफ होने से पहले की जाने वाली जांच के दौरान ये बात सामने आई थी कि विमान के दरवाजे के सपोर्ट ब्रैकेट में लगा 'डोर असिस्ट हैंडल' का निचला हिस्सा ढीला हो सकता है. अगर ये हैंडल अपनी जगह से अलग हो जाए, तो दरवाजा खोलते वक्त यात्रियों, क्रू मेंबर्स या मेंटेनेंस टीम को चोट लगने का जोखिम पैदा हो सकता है. इसी संभावित खतरे को टालने के लिए एफएए ने एयरलाइन कंपनियों को जरूरी मॉडिफिकेशन करने के निर्देश दिए थे.
एयर इंडिया से शुरुआत!
टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयर इंडिया के बेड़े में इस समय कुल 35 ड्रीमलाइनर एयरक्राफ्ट शामिल हैं. एयर इंडिया के सूत्रों के मुताबिक कंपनी FAA की गाइडलाइन्स से पूरी तरह वाकिफ है और चरणबद्ध तरीके से अपने विमानों में जरूरी बदलाव कर रही है. कुछ पुराने एयरक्राफ्ट्स में ये सुधार का काम पूरा भी किया जा चुका है.
एयरलाइन का ये भी कहना है कि इन बदलावों से मौजूदा फ्लाइट ऑपरेशन्स या सुरक्षा पर कोई निगेटिव इम्पैक्ट नहीं पड़ा है, बल्कि इससे यात्रियों की सुरक्षा और अधिक पुख्ता हो रही है.
सुरक्षा कितनी बेहतर होगी?
अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि क्या इन तकनीकी बदलावों से विमानों की सुरक्षा सचमुच बेहतर होती है? इस टेक्निकल और जटिल पहलू को एक आसान से सवाल-जवाब फॉर्मेट में समझ सकते हैं.
पहली बात कि क्या विमान के छोटे-छोटे हिस्सों में बदलाव से बड़ा फर्क पड़ता है? जवाब है- हां, एविएशन इंडस्ट्री में सुरक्षा के पैमाने बेहद कड़े होते हैं. एक छोटा सा ढीला हैंडल भी इमरजेंसी में या सामान्य सफर के दौरान बड़ी परेशानी बन सकता है.
दूसरा सवाल कि ऐसा करना क्यों जरूरी है? तो इसका जवाब है- बेहद जरूरी है. क्योंकि जब ग्लोबल रेगुलेटर ऐसी किसी भी खामी को पकड़ते हैं, तो एयरलाइंस को तुरंत एक्शन लेना होता है ताकि किसी भी अनहोनी की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म किया जा सके.
एयर इंडिया में और क्या बदलेगा?
सुरक्षा के मोर्चे पर इन तकनीकी सुधारों के अलावा एयर इंडिया अपने विमानों के इंटीरियर और पैसेंजर एक्सपीरियंस को भी पूरी तरह बदल रही है. कंपनी ने अपने बोइंग 787-8 विमानों को नए सिरे से तैयार करने का बड़ा प्रोजेक्ट चलाया है. इसके तहत विमान के केबिन को पूरी तरह रीकॉन्फिगर किया गया है ताकि यात्रियों को आधुनिक और शानदार अनुभव मिल सके.
पुराने दो-क्लास लेआउट की जगह अब इसे आधुनिक तीन-क्लास कॉन्फिगरेशन में बदला जा रहा है, जिसमें ब्रांड-नवीन सीटें, बेहतर इन-फ्लाईट एंटरटेनमेंट सिस्टम और वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल की जा रही हैं.
मुसाफिरों के अधिकार की बात
इन सब के बीच एक आम हवाई यात्री के रूप में आपके क्या अधिकार हैं, ये जानना हर मुसाफिर के लिए बहुत जरूरी है. नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए (DGCA) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी वजह से आपकी फ्लाइट में देरी होती है या वो रद्द कर दी जाती है, तो एयरलाइन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वो यात्रियों को उचित सुविधा दे.
अगर उड़ान में कई घंटे की देरी होती है, तो एयरलाइन को पैसेंजर्स को भोजन और पानी उपलब्ध कराना होता है. अगर फ्लाइट अगले दिन के लिए टल जाती है, तो होटल में ठहरने का इंतजाम भी एयरलाइन द्वारा ही किया जाना चाहिए. इसके अलावा यदि एयरलाइन समय रहते यात्रा में बदलाव या कैंसिलेशन की सूचना नहीं देती है, तो यात्रियों को तय नियमों के तहत मुआवजा पाने का भी पूरा अधिकार होता है.
यात्रियों की जिम्मेदारी
इसके साथ ही साथ ट्रैवल मैनेजमेंट के लिहाज से अगर शेड्यूल में किसी भी तरह का बदलाव होता है, तो यात्रियों को भी खुद को तैयार रखना चाहिए. हमेशा अपनी एयरलाइन के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल एक्टिव रखें ताकि किसी भी प्रकार के फ्लाइट डिले या शेड्यूल चेंज का अपडेट समय पर मिल सके.
एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले हमेशा फ्लाइट स्टेटस चेक करना समझदारी होती है. अगर यात्रा के दौरान कोई परेशानी होती है, तो एयरलाइन के कस्टमर केयर या एयरपोर्ट काउंटर पर अपने अधिकारों के तहत क्लेम करना आपका हक है. वैश्विक मानकों के मुताबिक भारतीय आकाश में भी अब सुरक्षा और यात्री सुविधा दोनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि हर सफर सुरक्षित और आरामदायक बन सके.
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