छत्तीसगढ़ में तीन पुलिसवालों ने कथित तौर पर अपने ही पुलिस डिपार्टमेंट को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया. वो तो भला हो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का, जिसकी वजह से सैलरी स्कैम पकड़ में आ गया. पुलिस की शुरुआती जांच में लगभग डेढ़ से दो करोड़ रुपये के गबन का पता चला है. मामला बस्तर के जगदलपुर का है. सैलरी सेक्शन से जुड़े एक कर्मचारी समेत कुल तीन पुलिसवालों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस जांच कर रही है कि स्कैम में और लोग भी तो शामिल नहीं थे.
अपनी सैलरी बढ़ाकर 3 सिपाहियों ने डकारे 2 करोड़, AI ने पकड़ा पुलिसवालों का स्कैम
Chhattisgarh Salary Scam: छत्तीसगढ़ में कुछ सिपाहियों ने अपने ही डिपार्टमेंट को करोड़ों का चूना लगा दिया. आरोपी तीन पुलिसवालों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस का कहना है कि पहली बार ऑडिट में AI का यूज किया गया है.


इंडिया टुडे से जुड़े धर्मेंद्र महापात्र की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी पुलिसवाले कथित तौर पर अपनी सैलरी बढ़ाकर और दूसरे तरीकों से साजिशन धोखाधड़ी कर रहे थे. इल्जाम है कि सैलरी सेक्शन का कर्मचारी गिरीश राय सैलरी से जुड़ी सॉफ्ट कॉपी को एडिट करके सैलरी बढ़ा लेता था. पुलिस ने बताया कि गिरीश दो अन्य कर्मचारियों की भी सैलरी बढ़ाकर निकालता था.
बस्तर के पुलिस अधीक्षक (SP) शलभ सिन्हा ने बताया कि SP ऑफिस की विभिन्न ब्रांच का समय-समय पर इंटरनल या एक्स्टर्नल ऑडिट होता है. ऑडिट के दौरान ही वेतन शाखा में गड़बड़ी की सूचना मिली. SP शलभ सिन्हा ने आगे बताया,
"वेतन शाखा में सहायक गिरीश राय ने वेतन निकालते समय सॉफ्ट कॉपी को एडिट किया. अपने एक-दो साथियों का वेतन बढ़ाकर निकाल रहा था. इस संबंध में उनसे भी पूछताछ हुई और उसके बाद उसने इस मामले में अपना कबूलनामा दिया. आरोपियों ने गबन करने की बात कबूल कर ली है."
SP ने आगे बताया कि कथित सैलरी गबन के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है. गिरीश राय के अलावा पुलिस डिपार्टमेंट के ही राजुकमार कतलाम और हेमंत मैथ्यू को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया है.
SP शलभ सिन्हा ने आगे कहा,
ऑडिट में पहली बार AI"फिलहाल हम लोगों को इनके खातों से जो जानकारी मिली, उसके हिसाब से लगभग डेढ़ से दो करोड़ रुपये पिछले दो सालों में विभिन्न खातों से निकाले गए. कुछ ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें लोन देने के नाम पर उनकी सैलरी में एक्स्ट्रा पैसे डाले गए. फिर उनसे लोन वापसी के नाम पर कैश लिया गया. ऐसे लोगों की लिस्ट बनाकर उनसे पूछताछ की जा जाएगी."
पुलिस का कहना है कि पहली बार ऑडिट के लिए AI का इस्तेमाल किया गया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने कहा कि यह धोखाधड़ी इसलिए पकड़ में नहीं आई क्योंकि पुलिसवालों के रेगुलर ट्रांसफर, पोस्टिंग और संख्या में बदलाव के कारण सैलरी पर होने वाला खर्च अक्सर घटता-बढ़ता रहता है.
अधिकारी ने आगे कहा कि आरोपी ने कथित तौर पर हर महीने अपने और दो अन्य कॉन्स्टेबलों के नाम पर सैलरी की रकम थोड़ी-थोड़ी बढ़ाकर दिखाई, जिससे यह धोखाधड़ी सालों तक किसी की नजर में नहीं आई.
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AI का इस्तेमाल क्यों हुआ?जांच करने वालों ने बताया कि जब ऑडिटर्स ने लगभग 2,000 कर्मचारियों के सैलरी डेटा का एनालिसिस करने के लिए AI का इस्तेमाल किया, तब पहली बार गड़बड़ियों का पता चला. पुलिस कर्मचारियों का डेटा काफी बड़ा था, इसलिए ऑडिट के लिए AI का इस्तेमाल किया गया था.
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