The Lallantop

आसमान से बरस रही 'आग', दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 94 भारत के, देखें लिस्ट

Severe Heatwave India: गर्मी का कहर पूरे भारत पर पड़ रहा है. आलम ये है कि दुनिया के सौ सबसे ज्यादा गर्म शहरों में से 94 अकेले भारत में हैं. नौतपा के चलते पारा रिकॉर्ड हाई पर जा पहुंचा है. जिसने गर्मी को कहीं ज्यादा खतरनाक, दमघोंटू और ना काबिल-ए-बर्दाश्त बना दिया है.

Advertisement
post-main-image
दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 94 भारत के! (फोटो- इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • इस साल भारत के कई हिस्सों में रिकॉर्ड ऊँचे तापमान और भीषण हीटवेव के कारण गर्मी ने इतिहास रचा, जिसमें 94 सबसे गर्म शहर भारत के हैं और तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा।
  • गर्मी के इस बढ़ते स्वरूप के पीछे लू के साथ बढ़ी हुई उमस, नौतपा, पेड़ों की कटाई, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन जैसे पर्यावरणीय कारण जिम्मेदार हैं, जो इसे अधिक खतरनाक बना रहे हैं।
  • मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में गंभीर लू बनी रहेगी, जिसके चलते जरूरी है कि शहरीकरण, हरियाली और जलवायु नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

IPL में वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) का बल्ला जिस तरह गेंदबाजों पर क़हर बरपा रहा है. ठीक उसी तरह इंडियावालों पर गर्मी का क़हर बरस रहा है. देश के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है. लेकिन ऐसा लग रहा है कि इस बार गर्मी ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ने की ठान ली है. मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो प्रॉब्लम सिर्फ बढ़ते तापमान तक सीमित नहीं रह गई है. बल्कि कहीं ज्यादा भयानक हो गई है.

Advertisement

इस साल की लू (Heatwave) के साथ बढ़ती उमस (Humidity), गर्म रातों, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, बढ़ते शहरीकरण और दुनियाभर में होने वाले जलवायु परिवर्तन (Climate Change) ने मिलकर डेडली कॉकटेल तैयार किया है. जिसने गर्मी को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा खतरनाक, दमघोंटू और ना काबिल-ए-बर्दाश्त बना दिया है.

जो रही सही कसर बाकी रह गई थी, वो नौतपा (Nautapa) ने पूरी कर दी है. जिसके चलते नौ दिनों तक सूरज की किरणें भारत के मैदानी इलाकों पर एकदम सीधी यानी वर्टिकल पड़ती हैं. सीधी धूप और तेज गर्म हवाओं (लू) के कारण वातावरण का तापमान अचानक से काफी ऊपर चला जाता है. नतीजा राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों हाई टैंपरेचर और हीट वेव की दोहरी मार. 

Advertisement

नौतपा पर आप लल्लनटॉप स्पेशल लेख “नौतपा क्या है और क्यों इन 9 दिनों में आग उगलता है सूरज? जान लीजिए बचने के उपाय और पूरी साइंस” पर क्लिक करके विस्तार से जान सकते हैं. फिलहाल आते हैं उस वजह पर जिसके चलते भारत के शहरों ने गर्मी का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.

दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 94 भारत के!

यूं तो गर्मी के दुनियाभर में आतंक मचाया हुआ है. मगर इंडियावालों से वो कुछ ज्यादा ही खफा है. पूरे विश्व के मौसम पर नजर रखने वाले पोर्टल AQI.IN के मुताबिक शुक्रवार 22 मई की शाम दुनिया के सौ सबसे गर्म शहरों में से 94 शहर अकेले भारत के थे. ये डेटा जितना चौंकाता है, उतना ही डराता भी है.

देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रहे आंकड़े इस गंभीर हालत की गवाही दे रहे हैं,

Advertisement

विदर्भ का ब्रह्मपुरी: ये इलाका भारत में सबसे गर्म क्षेत्र के तौर पर दर्ज किया गया, जहां पारा 47.2°C तक जा पहुंचा.

वर्धा: महाराष्ट्र का यह जिला भी पीछे नहीं रहा और यहां तापमान 47.0°C रिकॉर्ड किया गया.

नौगांव (मध्य प्रदेश): बुंदेलखंड के इस इलाके में तापमान 46.5°C तक पहुंच गया.

बांदा और खजुराहो: उत्तर प्रदेश के बांदा और एमपी के खजुराहो में पारा 46.4°C दर्ज हुआ.

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 28 मई तक 'गंभीर लू' (Severe Heatwave) की स्थिति बनी रहेगी. वहीं पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान, विदर्भ और तटीय आंध्र प्रदेश में रहने वालों को कम से कम बुधवार 27 मई तक गर्मी से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं हैं.

इस साल देश के 10 सबसे झुलसते शहर

गर्मी की बात चल ही निकली है तो साल 2026 में अब तक देश के जिन शहरों में सूरज सबसे ज्यादा आग उगल रहा है, उनकी लिस्ट और वहां के औसत अधिकतम तापमान पर भी एक नजर डाल लेते हैं

शहर और राज्य तापमान का दायरा (शीर्ष स्तर)
बांदा (उत्तर प्रदेश) 47°C - 49°C
फलोदी (राजस्थान) 46°C - 47°C
मुंगेशपुर और नरेला (दिल्ली) 45°C - 46°C
सिरसा (हरियाणा) 44°C - 45°C
नागपुर (महाराष्ट्र) 43°C - 44°C
झांसी (उत्तर प्रदेश) 42°C - 43°C
डाल्टनगंज (मेदिनीनगर, झारखंड) 42°C - 43°C
खजुराहो (मध्य प्रदेश) 41°C - 42°C
रोहतक (हरियाणा) 41°C - 42°C
बिलासपुर (छत्तीसगढ़) 41°C - 42°C

नोट: AI से तैयार किया हुआ ग्राफिक्स टेबल

सिर्फ दिन नहीं, रातें भी हुईं बेचैन

मौसम के ऐतिहासिक आंकड़ों को स्टडी करें तो साफ पता चलता है कि भारत की जलवायु में एक बड़ा और चिंताजनक बदलाव आ रहा है. यह गर्मी किसी एक साल का अपवाद (Exception) नहीं है, बल्कि पिछले कई सालों का असर है.

बढ़ता न्यूनतम तापमान: साल 2010 से 2024 के बीच भारत का औसत न्यूनतम तापमान (यानी रातों का तापमान) प्रति दशक करीब 0.21 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है. इसका मतलब है कि अब रातें भी उतनी ठंडी नहीं हो पा रही हैं जितनी पहले हुआ करती थीं, जिससे इंसानी शरीर को गर्मी से उबरने का समय नहीं मिल पा रहा है.

हीटवेव के दिनों में इजाफा: 1961 से 2020 के बीच के डेटा को देखें तो देश में हीटवेव आने की आवृत्ति (Frequency) प्रति दशक बढ़ी है. वहीं, हीटवेव की कुल अवधि (Duration) में प्रति दशक 0.44 दिन का इजाफा हुआ है. यानी लू के दिन अब लंबे खिंचने लगे हैं.

'कंपाउंड हॉट-ह्यूमिड डे' का खतरा: जब बहुत ज्यादा तापमान के साथ हवा में नमी (उमस) भी बढ़ जाती है, तो उसे साइंस की भाषा में 'कंपाउंड हॉट-ह्यूमिड डे' (Compound Hot-Humid Day) कहा जाता है. ऐसे दिनों में इंसान का पसीना सूख नहीं पाता, जिससे शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है और 'हीट स्ट्रोक' का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

2020 से 2024 के दौरान 'कंपाउंड हॉट-ह्यूमिड डे' की संख्या तेजी से बढ़कर 16,970 हो गई है. उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां इस जानलेवा कॉम्बिनेशन का असर सबसे ज्यादा बढ़ा है.

2015 के बाद क्यों ज्यादा 'जानलेवा' हुई गर्मी?

आंकड़ों की मानें तो पिछले एक दशक में भारत में नमी के स्तर में भारी बढ़ोतरी देखी गई है. साल 2015-19 के डेटा पर गौर करें तो,

  • भारत की औसत नमी साल 2015 तक 67.1 फीसदी थी, जो साल 2020-24 में बढ़कर 71.2 फीसदी हो गई.
  • देश की राजधानी दिल्ली में इस दौरान नमी में 8 प्रतिशत का सीधा इजाफा देखा गया है. 
  • हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे ट्रेडिशनल रूप से सूखे माने जाने वाले राज्यों में भी नमी में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई.

अब संभलने का वक्त

बढ़ते कंक्रीट के जंगल (अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट) और हरियाली की कमी ने हमारे शहरों को तंदूर बना दिया है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग और लोकल लेवर पर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले सालों में गर्मी के ये आंकड़े और भयानक रूप ले सकते हैं. 

अब जरूरत सिर्फ 'कूलर और एसी' के भरोसे रहने की नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर प्लांटेशन, सुनियोजित शहरीकरण (Sustainable Urbanization) और क्लाइमेट पॉलिसी को सख्ती से लागू करने की है. वरना हमारी आने वाली पीढ़ियों को इस झुलसाने वाली आग से बचाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन हो जाएगा.

वीडियो: सोशल लिस्ट: Heatwave In India: रात-रात भर नहीं आती बिजली, Cooler की ताड़ना, गर्मी से लोग परेशान

Advertisement