नौतपा क्या है और क्यों इन 9 दिनों में आग उगलता है सूरज? जान लीजिए बचने के उपाय और पूरी साइंस
Severe Heatwave India: नौतपा के 9 दिनों में उत्तर भारत में रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ती है. जानिए सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में जाने का विज्ञान और इस भीषण लू से बचने के अचूक घरेलू उपाय.

गर्मियों का मौसम आते ही एक शब्द अचानक सबके मुंह पर चढ़ जाता है. वो शब्द है 'नौतपा'. लोग कहने लगते हैं कि भईया नौतपा शुरू होने वाला है, अब तो सूरज देवता आग उगलेंगे. लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर ये नौतपा बला क्या है? क्यों इन 9 दिनों में इतनी भीषण गर्मी पड़ती है कि इंसान तो क्या परिंदे भी पनाह मांगने लगते हैं?
आज हम इस पूरे गणित को एकदम आसान भाषा में समझेंगे. इसके पीछे का विज्ञान क्या है, पुराणों में क्या लिखा है और इस भयंकर तपिश से आपको खुद को कैसे बचाना है, सब कुछ यहीं जान लीजिए. इसके बाद आपको इंटरनेट पर कुछ और खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
नौतपा क्या होता है और क्यों इस दौरान बढ़ जाती है गर्मी?
नौतपा का सीधा सा मतलब है नौ तपते हुए दिन. सनातन परंपरा और ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो उस समय से अगले 9 दिनों तक धरती पर सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती है. इसी टाइम पीरियड को नौतपा कहा जाता है.
अब आते हैं इसके पीछे के असली विज्ञान पर. मई के आखिरी हफ्ते में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी काफी कम हो जाती है. सूर्य की किरणें भारत के मैदानी इलाकों पर एकदम सीधी यानी वर्टिकल पड़ती हैं. सीधी धूप और तेज गर्म हवाओं (लू) के कारण वातावरण का तापमान अचानक से काफी ऊपर चला जाता है. इस दौरान उमस और तपिश इतनी ज्यादा होती है कि रात में भी राहत नहीं मिलती.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा पड़ेगा गर्मी का असर?
भारत के कुछ राज्य ऐसे हैं जो इस दौरान भट्टी की तरह तपने लगते हैं. अगर भौगोलिक स्थिति को देखें, तो उत्तर और मध्य भारत के इलाके इसकी सबसे ज्यादा मार झेलते हैं.
राजस्थान: रेगिस्तानी इलाका होने के कारण यहां पारा 48 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है.
दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा: कंक्रीट के जंगलों और गाड़ियों के धुएं के कारण यहां हीट आइलैंड इफेक्ट बनता है, जिससे गर्मी जानलेवा हो जाती है.
उत्तर प्रदेश और बिहार: इन राज्यों में पछुआ हवाएं चलती हैं, जिन्हें हम 'लू' कहते हैं. यह हवा शरीर का पूरा पानी सोख लेती है.
मध्य प्रदेश: देश के बीच में होने के कारण यहां भी सूरज का सीधा टॉर्चर देखने को मिलता है.
नौतपा के 9 दिन पड़ती है भीषण गर्मी, पहले से करें तैयारी और यूं रखें अपना ख्याल
इस भीषण गर्मी से डरने की नहीं, बल्कि सही तैयारी करने की जरूरत है. डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स की मानें तो इन 9 दिनों में छोटी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है.
पानी से दोस्ती कर लीजिए: प्यास न भी लगे, तो भी हर आधे घंटे में पानी पीते रहें. शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो, इसके लिए नींबू पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, छाछ या नारियल पानी पीते रहें.
दोपहर में बाहर जाने से बचें: सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक सूरज की धूप सबसे खतरनाक होती है. अगर बाहर जाना बहुत जरूरी हो, तो सिर को सूती कपड़े या छाते से ढककर ही निकलें.
ढीले और हल्के कपड़े: इन दिनों में टाइट और डार्क कलर के कपड़े पहनने से बचें. सफेद या हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें, ताकि शरीर को हवा मिलती रहे.
खानपान का रखें ध्यान: भारी और तैलीय खाना पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शरीर का तापमान बढ़ता है. इसलिए तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसी चीजें ज्यादा खाएं.
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आपके मन में उठने वाले जरूरी सवाल (FAQs)
चलते-चलते उन सवालों के जवाब जान लेते हैं, जो आपके मन में नौतपा को लेकर उठ सकते हैं.
1. नौतपा कितने दिनों का होता है?
जैसा कि इसके नाम से ही साफ है, नौतपा पूरे 9 दिनों का होता है. ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य देव करीब 14 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में रहते हैं, लेकिन इसके शुरुआती 9 दिनों में सूर्य का प्रभाव सबसे तीखा होता है. इसलिए सिर्फ शुरुआती 9 दिनों को ही मुख्य रूप से नौतपा माना जाता है.
2. नौतपा में गर्मी क्यों बढ़ जाती है?
इस समय सूर्य की स्थिति पृथ्वी के ठीक ऊपर होती है और उत्तर भारत में मानसूनी हवाएं आने से ठीक पहले का समय होता है. हवा में नमी कम होती है और आसमान एकदम साफ रहता है. बादलों की गैरमौजूदगी के कारण सूरज की पूरी तपिश सीधे जमीन पर गिरती है, जिससे गर्मी अपने चरम स्तर पर पहुंच जाती है.
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