होटल में कमरा लेते वक्त आमतौर पर हमारा ध्यान साफ-सफाई, खाना, लोकेशन और सर्विस पर रहता है. लेकिन बाथरूम जैसी जगह की सुरक्षा पर शायद ही कोई गौर करता है. चंडीगढ़ से सामने आया एक मामला बताता है कि होटल के बाथरूम में छोटी सी लापरवाही भी होटल प्रबंधन के लिए भारी पड़ सकती है. एक 70 साल के बुजुर्ग मेहमान के होटल के बाथरूम में फिसलकर घायल होने के मामले में कंज्यूमर कमीशन ने होटल और उससे जुड़ी सर्विस कंपनी को कुल 32,899 रुपये बतौर हर्जाना चुकाने का आदेश दिया है.
होटल के बाथरूम में फिसले बुजुर्ग, कंज्यूमर कोर्ट ने 32899 रुपये का हर्जाना दिलवाया
Chandigarh Consumer Commission: चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग ने होटल के बाथरूम में फिसलकर घायल हुए 70 साल के बुजुर्ग के मामले में होटल और संबंधित सर्विस कंपनी को 32,899 रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है. आयोग ने बाथरूम की असुरक्षित स्थिति को सेवा में कमी माना है.

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ की जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि होटल अपने मेहमान के लिए बाथरूम को उचित रूप से सुरक्षित रखने में नाकाम रहा. आयोग के अध्यक्ष पवनजीत सिंह और सदस्य बृज मोहन शर्मा ने इसे सेवा में कमी माना.
बाथरूम में पानी और साबुन के झाग से फिसले
शिकायतकर्ता के मुताबिक, वो होटल ग्रुप के डाइनिंग क्लब के 2019 से प्लेटिनम सदस्य थे और उन्हें क्लब की तरफ से दिल्ली के होटल में एक रात ठहरने की सुविधा मिली थी. कमरे के बाथरूम में एयर कंडीशनिंग डक्ट से पानी लीक होने और फर्श पर साबुन के झाग के कारण उनका पैर फिसल गया. गिरने के बाद उनकी कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द हुआ और वो खुद से उठ नहीं पाए. शिकायत में कहा गया कि उन्हें बाथरूम से बाहर निकलने के लिए रेंगना पड़ा और फिर रूम सर्विस को बुलाया गया.
होटल डॉक्टर ने अस्पताल भेजा
शिकायतकर्ता के मुताबिक, होटल का एक कर्मचारी मौके पर पहुंचा और तौलियों से बाथरूम में मौजूद पानी और झाग साफ किया. इसके बाद होटल के डॉक्टर ने बुजुर्ग की जांच की, दवाइयां लिखीं और उन्हें अस्पताल जाने की सलाह दी. आगे उन्होंने जांच, डॉक्टर से सलाह, दवाइयों और फिजियोथेरेपी पर खर्च किया. उन्होंने इलाज के खर्च के तौर पर 28,899 रुपये की मांग की थी.
आयोग के सामने उन्होंने बाथरूम की तस्वीर, मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन, बिल, जांच रिपोर्ट और दूसरे दस्तावेज पेश किए. इनमें से 25,899 रुपये के मेडिकल खर्च को बिल और रसीदों से प्रमाणित माना गया. दूसरी तरफ होटल और संबंधित पक्ष मामले की सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद आयोग ने उनके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की.
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25,899 रुपये इलाज के, 7000 रुपये मानसिक परेशानी के
आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से पेश सबूतों का विरोध करने के लिए दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया. होटल स्टाफ को तुरंत घटना की जानकारी देना, होटल के डॉक्टर से इलाज मिलना और उसके बाद के मेडिकल रिकॉर्ड शिकायतकर्ता के दावे को मजबूत करते हैं.
आयोग ने होटल और संबंधित सर्विस कंपनी को 25,899 रुपये मेडिकल खर्च के तौर पर देने का आदेश दिया. इसके अलावा मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 7,000 रुपये की एकमुश्त राशि देने को कहा. यानी कुल रकम 32,899 रुपये हुई.
मामले का सीधा संदेश ये है कि होटल में मेहमान की सुरक्षा सिर्फ अच्छी सर्विस का हिस्सा नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी है. अगर परिसर की खराब स्थिति से किसी उपभोक्ता को नुकसान होता है और उसके पास घटना और इलाज के पर्याप्त दस्तावेज हैं, तो वो उपभोक्ता कानून के तहत मुआवजे का दावा कर सकता है.
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