नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. 2 सितंबर को कोर्ट ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जारी डिटेंशन ऑर्डर रद्द कर दिया. साथ ही 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है.
नोएडा डीएम मेधा रूपम की सैलरी से ₹5 लाख काटकर एक्टिविस्ट मुआवजा मिलेगा, HC का आदेश
नोएडा में हुए मजदूरों के प्रोटेस्ट के मामले में आकृति चौधरी की गिरफ्तारी हुई थी. उन पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने मजदूरों को हिंसा के लिए भड़काने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया था. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए NSA के तहत जारी डिटेंशन ऑर्डर रद्द कर दिया.

नोएडा की डीएम को देने होंगे 5 लाख रुपये
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने मुआवजे की रकम गौतमबुद्धनगर की डीएम मेधा रूपम की सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस अतल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने की. उन्होंने आकृति के खिलाफ डिटेंशन ऑर्डर रद्द करते हुए कहा,
आकृति को राज्य की ओर से पेश की गई एक मनगढ़ंत कहानी के आधार पर हिरासत में लिया गया था. अगर किसी दूसरे मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी न हो तो उनको तत्काल रिहा किया जाए.
क्या है पूरा मामला?
13 अप्रैल, 2026 को नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन हुआ था, जिस पर हिंसा के आरोप लगे. इस मामले में लखनऊ के पत्रकार सत्यम वर्मा और नोएडा की एक्टिविस्ट आकृति चौधरी पर NSA लगाया गया. दोनों पर सोशल मीडिया के जरिए मजदूरों को भड़काने और विदेशी फंडिंग लेने जैसे आरोप लगाए गए. आकृति को 11 अप्रैल को मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था.
कोर्ट ने नोटिस पर उठाए सवाल
1 सितंबर को भी इस मामले की सुनवाई हुई थी. इस दौरान हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा था कि FIR दर्ज करने से पहले आकृति को शांति भंग करने का नोटिस दिया गया था या नहीं. कोर्ट ने मजदूरों को भड़काने वाले वीडियो और वॉट्सऐप चैट की डिटेल भी मांगी थी.
2 सितंबर की सुनवाई में यूपी सरकार ने कोर्ट को बताया कि आकृति को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस दिया गया था. इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने पूछा कि क्या इससे पहले BNSS की धारा 126 के तहत नोटिस दिया गया था. सरकार ने इससे इनकार किया. धारा 126 सार्वजनिक शांति व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी है. उन्होंने कहा कि धारा 130 के तहत एक्शन से पहले धारा 126 की प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी होती है.
कोर्ट ने पुलिस की जनरल डायरी (GD) में लिखी जानकारी के आधार पर राज्य सरकार के बयान पर सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि नोटिस तैयार होने से पहले ही आकृति को गिरफ्तार कर लिया गया. हाई कोर्ट बेंच ने आगे कहा,
यानी मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं हुई, लेकिन गिरफ्तारी हो चुकी थी. अगर नोटिस पहले दिया होता तो जीडी नंबर नहीं होता या हाथ से बना होता.
कोर्ट ने आकृति के खिलाफ मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाने के आरोप पर भी सवाल उठाए. सरकार ने बताया कि प्रदर्शन के लिए 11 अप्रैल से ही लोग जुटने लगे थे. इस पर जस्टिस श्रीधरन ने कहा,
यानी 11 अप्रैल को कोई हिंसा नहीं हुई थी. जो भी हिंसा हुई है वह आकृति की गिरफ्तारी के बाद हुई है.
1 सितंबर को सरकार ने समय मांगा, कोर्ट का इनकार
1 सितंबर की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से ऐसे वीडियो पेश करने को कहा, जिससे ये साबित हो कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को पत्थरबाजी या गाड़ियों में आग लगाने के लिए उकसाया था. सरकार ने इसके लिए और समय मांगा,
लेकिन कोर्ट ने कहा कि आकृति पहले से ही पांच महीने से जेल में बंद है. अब और समय नहीं दे सकते.
हाई कोर्ट की बेंच ने ये भी पूछा कि रिकॉर्ड में कहां लिखा है कि आकृति ने लोगों को पथराव के लिए बुलाया और क्या इसका कोई वीडियो सबूत है. सरकार ने चार्जशीट और गवाहों के बयानों का हवाला दिया. इस पर जस्टिस श्रीधरन ने सवाल किया,
गवाहों ने किस आधार पर आकृति का नाम लिया और वीडियो में ऐसा क्या है, जिससे हिंसा के लिए उकसाने का आरोप साबित होता है.
आकृति चौधरी कौन हैं?
आकृति चौधरी एक स्टूडेंट एक्टिविस्ट हैं. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन पर 13 मई को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया था. इसी मामले में पत्रकार सत्यम वर्मा पर भी NSA लगाया गया था. उस वक्त नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने दावा किया था कि आरोपियों के खिलाफ मजबूत इलेक्ट्रॉनिक और वीडियो सबूत हैं.
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