विदेशी चंदा के लिए नियम-कानून बदलने वाले बिल को लेकर लोकसभा में जमकर हंगामा देखने को मिला. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सरकार के खिलाफ एकदम तमतमाए नजर आए. सदन में उन्होंने सवाल किया कि मोदी सरकार ने अब तक कौन सा ऐसा बिल पेश किया है, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं था. जाहिर है उनका इशारा FCRA (Foreign Contribution- Regulation Act, 2010) कानून में संशोधन वाले बिल की ओर ही था. अखिलेश के इस आरोप पर जवाब देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने भी सपा मुखिया को चुनौती दी कि वो बिल में एक प्रावधान ऐसा बता दें, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो.
'अल्पसंख्यकों पर झूठी बात फैला रहे... ', FCRA बिल पर अखिलेश-किरेन रिजिजू भिड़ गए
FCRA संशोधन बिल को लेकर लोकसभा में अखिलेश यादव और किरेन रिजिजू के बीच तीखी बहस हुई. अखिलेश ने बिल को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया, तो रिजिजू ने चुनौती दी कि एक ऐसा प्रावधान बताएं जो किसी अल्पसंख्यक को निशाना बनाता हो.

बता दें कि विपक्षी सांसदों के कड़े विरोध और आपत्तियों के बीच केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को बुधवार, 12 अगस्त को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया है. हालांकि, विपक्षी दल इस बिल को पूरी तरह से वापस लेने की मांग पर अड़े हैं. इसी क्रम में बुधवार, 12 अगस्त को अखिलेश यादव और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच सदन में तीखी तकरार देखने को मिली.
अखिलेश यादव ने क्या कहा?अखिलेश यादव का आरोप है कि ये बिल देश के अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता है. इसलिए पूरा विपक्ष इस विधेयक का विरोध कर रहा है. उन्होंने सवाल किया कि इस सरकार ने अब तक ऐसा कौन सा विधेयक पेश किया है जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ न हो?
यादव ने कहा,
किरेन रिजिजू का पलटवारहम, पूरा विपक्ष सरकार के एफसीआरए विधेयक के खिलाफ हैं. मंत्री जी कह रहे हैं कि ये बिल माइनॉरिटी के खिलाफ नहीं है. माननीय जी मंत्री जी बताएं. आज तक जो बिल आए हैं. बिना माइनॉरिटी के खिलाफ कौन सा बिल लेकर के आए हो आप?
उनके ऐसा कहने पर सदन में जमकर हंगामा कटा. संसदीय कार्यकमंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस पर पलटवार किया और अखिलेश यादव को चुनौती दी कि वो बिल में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला एक भी प्रावधान बताएं. रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा,
मैं जिम्मेदारी के साथ अखिलेश जी को चुनौती देता हूं. इस FCRA बिल का जो प्रावधान लाया है, इसमें एक भी प्रावधान ऐसा है, आप दिखाइए जो किसी भी माइनॉरिटी के खिलाफ है. ये सरासर झूठी बात फैलाई जा रही है देश में. किसी माइनॉरिटी को टारगेट करने का सवाल ही नहीं है. आप चाहते हैं कि विदेश का धन बिना कानून के ऐसे ही देश में लाकर मनमर्जी से खर्च किया जाए? यह कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है. यहां संविधान की भावना के मुताबिक नियम और कानून होने चाहिए.
किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रस्तावित FCRA में ऐसा एक भी प्रावधान नहीं है, जो किसी माइनॉरिटी संस्था को टारगेट करता हो. कुछ खास समुदायों को गुमराह करने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है.
क्या है FCRA कानून?जिस प्रस्तावित बिल पर सारा विवाद है, वह विदेशी चंदे को लेकर एक पुराने कानून में संशोधन का प्रावधान करता है. इस कानून का नाम है Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 यानी FCRA. विदेशी चंदे के नियमन को लेकर ये कानून बनाया गया था. नए बिल में इसी में बदलाव करने की बात कही गई है. FCRA कानून के तहत ही तमाम NGO, चैरिटेबल ट्रस्ट, शिक्षण संस्थान, धार्मिक संस्थाएं और दूसरे संगठन विदेशों से मिलने वाले चंदे को लेते और खर्च करते हैं. मौजूदा नियमों के मुताबिक, किसी संगठन को विदेशी चंदा लेने से पहले गृह मंत्रालय से FCRA रजिस्ट्रेशन कराना होता है. इस रजिस्ट्रेशन को हर 5 साल में रिन्यू भी कराना पड़ता है.
जानकारी के मुताबिक, 15 जुलाई 2026 तक देश में 14 हजार 449 FCRA रजिस्ट्रेशन एक्टिव थे. वहीं 22 हजार 498 रजिस्ट्रेशन रद्द किए जा चुके हैं और 15 हजार 212 की अवधि खत्म हो चुकी है. 2019 से 2022 के बीच FCRA के तहत रजिस्टर्ड संगठनों को 55,741 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा मिला था.
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एफसीआरए बिल में विवादित क्या है?FCRA कानून में संशोधन का जो बिल है, उसमें एक बड़ा प्रस्ताव ‘Designated Authority’ बनाने का है. इस अथॉरिटी को केंद्र सरकार नियुक्त करेगी. अगर किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है. या संगठन खुद रजिस्ट्रेशन सरेंडर कर देता है. या समय पर रिन्यू नहीं कराता तो यह अथॉरिटी उसके विदेशी चंदे और उस पैसे से बनाई गई संपत्तियों का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकेगी. बिल के इसी प्रावधान पर सत्ता और विपक्ष में रार मची है.
दरअसल, केरल, मिजोरम और नॉर्थ-ईस्ट के कई इलाकों में ईसाई मिशनरियां और चैरिटी संस्थाएं विदेशी फंड से शिक्षा, स्वास्थ्य और वेलफेयर का काम करती हैं. उन्हें डर है कि इस बिल के पास होने के बाद लाइसेंस संबंधी किसी विवाद या देरी होने की स्थिति में उनकी संपत्तियां प्रभावित हो सकती हैं.
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