नेस्ले. स्विटज़रलैंड की कंपनी है. आपने कभी-न-कभी इसकी कॉफ़ी पी होगी. चॉकलेट खाई होगी. नेस्ले नवज़ात बच्चों के लिए फॉर्मूला प्रोडक्ट्स भी बनाती है. ये फॉर्मूला प्रोडक्ट मां के दूध के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होते हैं. अब कंपनी ने 30 से ज़्यादा देशों से अपने कुछ फॉर्मूला प्रोडक्ट वापिस मंगा लिए हैं. जैसे Simulated Milk Adapted यानी SMA Infant Formula और कुछ फॉलो-ऑन फॉर्मूला.
नेस्ले के बेबी फॉर्मूला में ऐसा क्या मिला, जो 30 से ज़्यादा देशों से वापस मंगाने पड़े प्रोडक्ट?
6 जनवरी को नेस्ले ने एक बयान जारी किया है. इसमें बताया गया है कि प्रोडक्ट्स के कुछ खास बैच इसलिए वापस मंगाए गए हैं. क्योंकि, एक बड़े सप्लायर से मिले कुछ सामान में क्वालिटी से जुड़ी दिक्कतें थीं. कंपनी को शक है कि इन प्रोडक्ट्स में सेर्यूलाइड नाम का टॉक्सिक तत्व मौजूद हो सकता है.


6 जनवरी को कंपनी ने एक बयान जारी किया है. इसमें बताया गया है कि प्रोडक्ट्स के कुछ खास बैच इसलिए वापस मंगाए गए हैं. क्योंकि, एक बड़े सप्लायर से मिले कुछ सामान में क्वालिटी से जुड़ी दिक्कतें थीं. कंपनी को शक है कि इन प्रोडक्ट्स में सेर्यूलाइड नाम का टॉक्सिक तत्व मौजूद हो सकता है. ये टॉक्सिन एराकिडोनिक एसिड ऑयल से जुड़ा हो सकता है. इसे बेबी फ़ॉर्मूला में इसलिए मिलाया जाता है, ताकि मां के दूध में पाए जाने वाले ज़रूरी फैटी एसिड्स की भरपाई हो सके.

फिलहाल कंपनी ने उन सभी बेबी फॉर्मूला प्रोडक्ट्स की जांच शुरू कर दी है, जिनमें एराकिडोनिक एसिड ऑयल और उससे जुड़े ऑयल मिक्स मौजूद हैं. हालांकि गनीमत ये है कि अभी इन फॉर्मुला प्रोडक्ट्स को खाकर किसी बच्चे के बीमार पड़ने की ख़बर नहीं आई है.
जिन देशों से नेस्ले ने अपने प्रोडक्ट वापिस मंगाए हैं. उनमें ज़्यादातर देश यूरोप के हैं. जैसे यूके, फ्रांस और जर्मनी. इसके अलावा, लैटिन अमेरिका के तीन देश और एशिया में हॉन्गकॉन्ग वगैरह शामिल हैं.
इस लिस्ट में ‘भारत’ का नाम नहीं है. यानी अभी भारत सेफ ज़ोन में है. पर नेस्ले का कहना है कि ये कोई आखिरी लिस्ट नहीं है. जांच आगे बढ़ने के साथ इसमें बदलाव हो सकते हैं. कंपनी ने ये भी कहा है कि वो सभी ज़रूरी कदम उठा रही है.
बच्चों के फॉर्मूला प्रोडक्ट्स में मिला सेर्युलाइड आखिर है क्या? इससे बच्चों की सेहत को क्या नुकसान पहुंचता है? कौन-से लक्षणों पर पैरेंट्स को नज़र रखनी चाहिए? और, अगर आप बेबी फॉर्मूला खरीद रहे हैं, तो किन बातों का ध्यान रखें? ये सारे सवाल हमने पूछे यशोदा सुपर स्पेशियली हॉस्पिटल, कौशांबी में पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर रोहित भारद्वाज से.

डॉक्टर रोहित बताते हैं कि सेर्यूलाइड एक टॉक्सिन है. यानी एक ज़हरीला तत्व. ये बैसिलस सेरियस नाम के बैक्टीरिया द्वारा बनाया जाता है. ये बैक्टीरिया आमतौर पर ख़राब या दूषित खाने में पाया जाता है. सेर्यूलाइड मुख्य रूप से पेट और दिमाग के वॉमिटिंग सेंटर्स पर असर डालता है. यानी इसके इस्तेमाल से बच्चों का जी मिचला सकता है. उल्टी आ सकती है. पेट में दर्द होने लगता है. कुछ मामलों में, शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है. यानी पानी की कमी हो जाती है.
हालांकि भारत में पैरेंट्स को डरने की ज़रूरत नहीं है. क्योंकि, जिन देशों से प्रोडक्ट वापिस मंगाए गए हैं. उनमें भारत शामिल नहीं है. लेकिन सतर्क रहना ज़रूरी है. इसलिए अगर कोई बेबी फॉर्मूला प्रोडक्ट देने के बाद बच्चे की तबियत खराब हो. उसमें ये लक्षण दिखें. बच्चे को बेचैनी हो. वो सुस्त हो जाए. तो ऐसा फॉर्मूला देना तुरंत बंद कर दें और डॉक्टर को दिखाएं.
बेबी फॉर्मूला खरीदते वक्त ध्यान रखें कि सील सही हो. एक्सपायरी डेट हमेशा चेक करें. घर पर डिब्बा खोलने के बाद ढक्कन सही से बंद करें. और कभी-भी गीले चम्मच से फॉर्मूला न निकालें.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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