बॉस ने काम दिया है. शाम से पहले वो खत्म करना है. टीम लीड ने एक प्रेजेंटेशन बनाने के लिए दी है. वो सुबह तक देनी है. क्लाइंट ने प्रोजेक्ट में कुछ चंजेस बताए हैं. वो एक घंटे के अंदर करके देने हैं. मेडिकल इनश्योरेंस भरने का आख़िरी दिन है. वो भी भरना है. कल बेटी की पैरेंट-टीचर मीटिंग हैं. उसमें भी जाना है. रात में पापा को डॉक्टर के पास लेकर जाना है.
हर वक्त थकान और आलस, काम पर फ़ोकस नहीं कर पा रहे? ये है मेंटल एग्ज़ॉशन, इससे कैसे निपटें?
जैसे लगातार काम करने से शरीर थक जाता है. वैसे ही लगातार एक्टिव रहने से दिमाग भी थक जाता है. यही है मेंटल एग्ज़ॉशन. लेकिन जब दिमाग थकता है तो उस बेचारे की कोई नहीं सुनता. फिर हम कहते हैं कि दिमाग काम नहीं कर रहा. चीज़ें याद नहीं रहती. फोकस नहीं हो पा रहा. कैसे होगा? आपका दिमाग एग्ज़ॉस्टेड है. थक चुका है. आज हम इसी दिमागी थकान पर बात करेंगे.
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ये है आम ज़िंदगी. एक आम इंसान की ज़िंदगी. ऑफिस संभालना है. घर संभालना है. घरवालों को संभालना है. खर्चे संभालने हैं. अपनी सेहत संभालनी है. दुनियादारी संभालनी है. ये सिलसिला कभी खत्म नहीं होता. लेकिन इतना कुछ करते-करते, संभालते-संभालते इंसान का शरीर और दिमाग ज़रूर जवाब दे जाता है. जब शरीर थकता है, हम उसे थोड़ा-बहुत आराम दे देते हैं. लेकिन जब दिमाग थकता है तो उस बेचारे की कोई नहीं सुनता. फिर हम कहते हैं कि दिमाग काम नहीं कर रहा. चीज़ें याद नहीं रहती. फोकस नहीं हो पा रहा. कैसे होगा? आपका दिमाग एग्ज़ॉस्टेड है. थक चुका है.
आज हम इसी दिमागी थकान पर बात करेंगे. जिसे कहते हैं ‘मेंटल एग्ज़ॉशन’. एक बहुत बड़ी आबादी इससे जूझ रही है. डॉक्टर से जानेंगे कि मेंटल एग्ज़ॉशन क्या है. क्यों होता है. मेंटल एग्ज़ॉशन के क्या लक्षण हैं और इसका इलाज क्या है.
मेंटल एग्ज़ॉशन क्या होता है?
ये हमें बताया डॉक्टर विनीत बंगा ने.

आजकल हम बहुत सुनते हैं कि शरीर तो ठीक है. लेकिन दिमाग जैसे थक-सा गया है. फोकस नहीं कर पा रहे. इसी चीज को मेंटल एग्ज़ॉशन बोलते हैं. जिस तरह लगातार काम करने, एक्सरसाइज करने से शरीर थक जाता है. उसी तरह लगातार एक्टिव रहने से दिमाग भी थक जाता है. ये है मेंटल एग्ज़ॉशन.
कारण
मेंटल एग्ज़ॉशन का सबसे बड़ा कारण है हेक्टिक लाइफस्टाइल. हम बहुत सारे काम एक साथ कर रहे हैं. मल्टी-टास्किंग कर रहे हैं. स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया का इस्तेमाल बहुत ज़्यादा बढ़ गया है. पीयर प्रेशर है. काम का प्रेशर है. फैमिली का स्ट्रेस भी इसमें जुड़ जाता है. ये सब मिलकर मेंटल एग्ज़ॉशन का कारण बनते हैं.

लक्षण
-थकान रहना
-आलस रहना
-चिड़चिड़ापन होना
-गुस्सा आना
-फोकस न कर पाना
-चीज़ें याद न रह पाना
-नींद न आना
-ये सभी मेंटल एग्ज़ॉशन के लक्षण हैं
-इससे हमारे काम करने की क्षमता भी घट जाती है
इलाज
जैसे लगातार शारीरिक मेहनत करने के बाद आराम चाहिए. ठीक वैसे ही मानसिक आराम भी ज़रूरी है. जैसे लगातार गाड़ी, AC चलाने के बाद आप उसे थोड़ा आराम देते हैं. सिस्टम पर लगातार काम करने के बाद उसे आराम देते हैं. ऐसे ही शरीर को भी डाउन टाइम की ज़रूरत होती है. इस दौरान ब्रेन की मरम्मत होती है. अगर आपका लाइफस्टाइल बहुत स्ट्रेसफुल है, तो उसे थोड़ा कंट्रोल करें. सात से आठ घंटे की नींद लें. योगा, प्राणायाम, एक्सरसाइज़ करें. बीच-बीच में वेकेशन लें. छुट्टी लें, परिवार के साथ समय बिताएं. हॉबीज़ फॉलो करें. इससे आप रिलैक्स होंगे.
आजकल मेंटल फ्रेशनेस लग्ज़री नहीं, ज़रूरत है. ये मेंटल एग्ज़ॉशन से आपको बचा सकता है. ज़िंदगी की भाग-दौड़ तो चलती रहेगी. ज़रूरी है दिमाग को आराम देना, ताकि आप चीज़ों से डील कर पाएं. अगर ऐसा नहीं कर पा रहे, तो ज़रूरी है प्रोफेशनल मदद लेना.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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