श्रीलंका के पास भारत से लौट रहा ईरान का एक जंगी जहाज समुंदर में डूब गया. इसमें तकरीबन 87 लोगों की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि इस जहाज पर ईरानी नौसेना से जुड़े करीब 180 लोग सवार थे. बुधवार, 4 मार्च को जहाज में सवार लोगों ने Distress Call (संकट के समय की जाने वाली कॉल) की थी. इसके बाद श्रीलंका की नेवी उनकी मदद के लिए पहुंची. इस घटना के कुछ देर बाद अमेरिका ने दावा किया कि उसकी पनडुब्बी ने हमला करके ईरान के इस जहाज को डुबोया है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ ने इसका एक वीडियो भी जारी किया है.
हिंद महासागर में अमेरिका ने डुबो दिया भारत से लौट रहा ईरान का जहाज, 87 लोगों की मौत
Iranian Warship Sinks: श्रीलंका का कहना है कि यह ईरानी जहाज IRIS Dena भारत से चलकर वापस ईरान जा रहा था. श्रीलंका के उप विदेश मंत्री अरुण हेमचंद्रा ने स्थानीय टीवी को बताया कि हिंद महासागर में Iran के युद्धपोत पर अमेरिकी पनडुब्बी हमले में कम से कम 80 लोग मारे गए.


दक्षिणी श्रीलंका के गाले से करीब 40 नॉटिकल मील दूर हिंद महासागर में इंटरनेशनल बॉर्डर में यह जहाज डूबा. श्रीलंका अथॉरिटीज का कहना है कि ये ईरान नेवी का IRIS Dena जहाज था, जो भारत के पश्चिमी समुद्री किनारे से चला था. श्रीलंका नेवी ने पहले कन्फर्म किया था कि उसने बुधवार, 4 मार्च की सुबह IRIS Dena से एक डिस्ट्रेस कॉल मिलने के बाद 32 लोगों को बचाया.
इसके कुछ देर बाद ही अमेरिकी युद्ध विभाग (रक्षा विभाग) के मुख्यालय पेंटागन में एक प्रेस ब्रीफिंग हुई. इसमें यूएस वॉर सेक्रेटरी पीट हेग्सेथ ने ईरान के इस जहाज को मार गिराने का दावा किया. उन्होंने कहा,
"हिंद महासागर में एक अमेरिकन सबमरीन ने एक ईरानी वॉरशिप को डुबो दिया, जिसे लगा कि वह इंटरनेशनल पानी में सेफ है. इसके बजा, उसे एक टॉरपीडो से डुबो दिया गया. उसे खामोश मौत मिली. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार किसी दुश्मन शिप को टॉरपीडो से डुबोया गया है."
अमेरिका ने अपने दावे को मजबूती देने के लिए सबूत के तौर पर एक वीडियो भी जारी किया. इसमें एक जहाज पर अटैक होता नजर आता है.
फिलहाल, ईरान ने अमेरिका के दावे की पुष्टि नहीं की है. श्रीलंका का कहना है कि यह ईरानी जहाज भारत से चलकर वापस ईरान जा रहा था. अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका ने जहाज के डूबने के बाद 87 शव बरामद किए गए हैं.
17 फरवरी को इंडियन नेवी के ईस्टर्न नेवल कमांड ने ऑफिशियल X पोस्ट में IRIS Dena भारत के विशाखापत्तनम पोर्ट पर स्वागत किया था. तब ईरानी जहाज ने भारत में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लिया था.

जहाज पर हमले के अमेरिकी दावे से पहले श्रीलंका नेवी ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. श्रीलंकाई न्यूज पोर्टल Ada Derana की खबर के मुताबिक, इसमें श्रीलंकाई नेवी के प्रवक्ता कमांडर बुद्धिका संपत ने बताया कि ऑपरेशन का मेन फोकस जानें बचाना था. उन्होंने कहा,
"सबसे पहले और सबसे जरूरी, हमारी प्रायोरिटी उन लोगों को बचाना है जो मुश्किल में जहाज पर सवार थे. रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही हम जांच कर पाएंगे कि यह घटना कैसे हुई? हम तभी इस पर एक टेक्निकल रिपोर्ट जारी कर पाएंगे."
उन्होंने आगे बताया कि जहाज पर सवार लोगों की सही संख्या अभी कन्फर्म नहीं हुई है. प्रवक्ता ने आगे कहा,
"हमें मिली जानकारी के मुताबिक, जब हमारी टीमें मौके पर पहुंचीं तो हमने एक बड़ा तेल का धब्बा देखा, जिससे पता चला कि जहाज डूब गया था. अब तक 32 ईरानी नागरिकों को बचाया गया है और उन्हें करापितिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. उनसे जानकारी मिलने के बाद ही हम आगे की जानकारी दे पाएंगे."
उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र के इलाके में कई लाशें तैरती हुई मिली हैं और शक है कि वे जहाज क्रू के सदस्य हैं. उन्होंने कहा,
"यह हमारे बॉर्डर से आगे था, लेकिन हमारे सर्च और रेस्क्यू इलाके में था. इसलिए इंटरनेशनल जिम्मेदारियों के हिसाब से वहां जाकर मदद करना हमारा फर्ज था."
उन्होंने आगे कहा कि पानी पर तैरते हुए लोगों को बचाया गया गया है. बाद में जब उनसे पूछताछ की तो पता चला कि वे लोग एक ईरानी जहाज में सवार थे. उन्होंने यह भी कहा कि जहाज के डॉक्युमेंट्स के मुताबिक माना जाता है कि जहाज पर 180 लोग थे. हालांकि लापता लोगों की सही संख्या पता नहीं है. प्रवक्ता का कहना है कि बचाव अभियान शुरू करते समय उन्होंने जहाज को नहीं देखा, लेकिन पानी पर तेल के धब्बे और तैरते हुए लाइफ राफ्ट देखे.
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