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गले में दर्द, चबाने-निगलने में तकलीफ़, टॉन्सिल्स सूजने के ये लक्षण जान लीजिए

जब टॉन्सिल्स में सूजन आ जाती है. तब इस कंडीशन को एक्यूट टॉन्सिलाइटिस कहा जाता है. टॉन्सिल्स हमारे गले के अंदर मौजूद दो लिम्फोइड टिशूज़ होते हैं. ये क्यों होता है. इसके लक्षण क्या हैं. क्या बार-बार टॉन्सिल्स में दर्द होने पर टॉन्सिल्स निकलवा देने चाहिए. साथ ही जानेंगे, इससे बचाव और इलाज.

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एक्यूट टॉन्सिलाइटिस के दौरान आमतौर पर सर्जरी की सलाह नहीं दी जाती (फोटो: Freepik)

मौसम बदल रहा है. कुछ ठंडा खा-पी लो, तो गला ख़राब हो जाता है. निगलने में दर्द होता है. टॉन्सिल्स सूज जाते हैं. अगर आपके साथ ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसे महज़ गला ख़राब होना न समझें. इसकी वजह एक्यूट टॉन्सिलाइटिस हो सकती है. लिहाज़ा, डॉक्टर से जानिए कि एक्यूट टॉन्सिलाइटिस क्या है. ये क्यों होता है. इसके लक्षण क्या हैं. क्या बार-बार टॉन्सिल्स में दर्द होने पर टॉन्सिल्स निकलवा देने चाहिए. साथ ही जानेंगे, इससे बचाव और इलाज. 

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एक्यूट टॉन्सिलाइटिस क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर अजय स्वरूप ने. 

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डॉ. अजय स्वरूप, एमेरिटस कंसल्टेंट एंड एडवाइज़र, ईएनटी, सर गंगा राम हॉस्पिटल

टॉन्सिल्स हमारे गले के अंदर मौजूद दो लिम्फोइड टिशूज़ होते हैं. जब इन टॉन्सिल्स में इंफेक्शन हो जाता है. तब इस स्थिति को एक्यूट टॉन्सिलाइटिस कहते हैं.

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एक्यूट टॉन्सिलाइटिस के कारण

एक्यूट टॉन्सिलाइटिस का मुख्य कारण इंफेक्शन है. ये इंफेक्शन प्रदूषण, कुछ खाने या बहुत ठंडा पीने की वजह से हो सकता है. फिर इससे एक्यूट टॉन्सिलाइटिस हो जाता है.

एक्यूट टॉन्सिलाइटिस के लक्षण

- गले में दर्द

- चबाने, निगलने में दिक्कत

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- तेज़ बुखार

- कंपकपाना

- खांसी

acute tonsillitis
एक्यूट टॉन्सिलाइटिस होने पर सबसे पहले एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं

एक्यूट टॉन्सिलाइटिस से बचाव और इलाज

एक्यूट टॉन्सिलाइटिस मैनेज करने के लिए सबसे पहले एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं. एंटीबायोटिक्स का कोर्स 5 से 7 दिनों का होता है. अगर खांसी है, तो खांसी को कंट्रोल किया जाता है. अगर एलर्जी के लक्षण हैं, तो उन्हें भी कंट्रोल किया जाता है.

क्या एक्यूट टॉन्सिलाइटिस होने पर टॉन्सिल्स निकलवानी चाहिए?

एक्यूट टॉन्सिलाइटिस के दौरान आमतौर पर सर्जरी की सलाह नहीं दी जाती. लेकिन अगर मरीज़ को बार-बार एक्यूट टॉन्सिलाइटिस हो रहा है. उसके टॉन्सिल्स में बार-बार इंफेक्शन हो रहे हैं, और डॉक्टर को लगे कि आगे भी बार-बार गंभीर इंफेक्शन होने की संभावना है. तब टॉन्सिल्स हटाने की सर्जरी यानी टॉन्सिलेक्टमी की सलाह दी जाती है. 

एक्यूट टॉन्सिलाइटिस ठीक होने के बाद मरीज़ को खाने-पीने का ध्यान रखने को कहा जाता है. ज़्यादा ठंडा, खट्टा और मसालेदार चीज़ें न खाएं. रोज़ गरारे करें ताकि इंफेक्शन न हो और टॉन्सिल्स को बचाया जा सके. अगर बार-बार इंफेक्शन होता है, तभी टॉन्सिल्स निकाले जाते हैं.

अगर आपको आए दिन गले में दर्द रहता है. निगलने में तकलीफ़ होती है, तो इसे सिर्फ़ मौसम का तकाज़ा समझकर इग्नोर न करें. डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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