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मिर्गी और दौरा एक ही बीमारी है या अलग-अलग? ये भी जानें कि मुंह में चम्मच डालने चाहिए या नहीं

दुनियाभर में करीब 7 करोड़ लोगों को मिर्गी है. इनमें से लगभग 1 करोड़ 12 लाख लोग भारत में हैं. यानी दुनियाभर में मिर्गी के हर 6 मरीज़ों में से 1 भारत में रहता है.

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मिर्गी और दौरे को एक ही समझते हैं? (फोटो: Magnific)

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  • मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जिसमें बिना स्पष्ट वजह के बार-बार दौरे पड़ते हैं, जबकि दौरा एक अलग घटना है, एक ही समय में मरीज़ को नियन्त्रित करने वाली स्थिति।
  • दौरे का मुख्य कारण मिर्गी हो सकता है, जिसकी वजह जेनेटिक कारण, दिमाग की चोट या संक्रमण हो सकते हैं; पर सामान्य दौरे के कारण ब्लड शुगर कम होना या तेज़ बुखार भी हो सकता है।
  • मिर्गी के दौरे के दौरान मरीज़ का सुरक्षित देखभाल आवश्यक है, जैसे दौरे के समय मुँह में कोई वस्तु न डालना और 5 मिनट से अधिक दौरा होने पर डॉक्टर से संपर्क करना।

मिर्गी और दौरा. अक्सर दोनों को एक ही समझ लिया जाता है, क्योंकि मिर्गी में दौरे पड़ते हैं. लेकिन मिर्गी को इंग्लिश में एपिलेप्सी (Epilepsy) कहते हैं और दौरे को सीज़र (Seizure). यानी दोनों एक ही चीज़ नहीं हैं. 

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जब किसी व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट वजह के बार-बार दौरे पड़ते हैं, तो उसे मिर्गी हो सकती है. एनल्स ऑफ इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी नाम की एक मेडिकल जर्नल है. इसमें छपी स्टडी के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 7 करोड़ लोगों को मिर्गी है. इनमें से लगभग 1 करोड़ 12 लाख लोग भारत में हैं. यानी दुनियाभर में मिर्गी के हर 6 मरीज़ों में से 1 भारत में रहता है.

मिर्गी कोई ऐसी बीमारी नहीं है, जो बहुत कम लोगों को होती हो. फिर भी मरीज़ इसका इलाज कराने में अक्सर देर कर देते हैं. इसकी एक बड़ी वजह है मिर्गी से जुड़ी गलतफहमियां. जिनके चलते कई बार लोग इलाज कराने से भी हिचकिचाते हैं. लेकिन दौरे को नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है. 

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दौरा पड़ने पर मरीज़ के शरीर में झटके लग सकते हैं. वो बेहोश हो सकता है. उसे अपने आसपास की चीज़ों का एहसास भी नहीं रहता. सही इलाज व देखभाल न मिलने से दौरे कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है. कुछ मामलों में दौरे से जान भी जा सकती है. इसलिए मिर्गी से जुड़ी बातों की सच्चाई जानना बहुत ज़रूरी है. 

मिर्गी और दौरा एक ही बात है?

हमें बताया सी.के.बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉक्टर के.के. जिंदल ने.

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डॉ. के.के.जिंदल, डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, सी.के.बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली

मिर्गी के बारे में सबसे आम मिथक ये है कि मिर्गी और दौरा एक ही बात है. ज़्यादातर लोगों को इस बारे में सही जानकारी नहीं है. सच्चाई ये है कि हर दौरा मिर्गी नहीं होता. मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को बिना स्पष्ट वजह के बार-बार दौरे पड़ते हैं. मिर्गी होने के कई कारण हो सकते हैं. इनमें जेनेटिक कारण, दिमाग में इन्फेक्शन होना, दिमाग में चोट लगना और ब्रेन स्ट्रोक शामिल हैं. वहीं, सामान्य दौरे के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं. जैसे ब्लड शुगर कम हो जाना, तेज़ बुखार आना. सिर में चोट लगना या दिमाग में इंफेक्शन होना.

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क्या मिर्गी छूने से फैलती है?

सही जानकारी न होने से लोगों को ऐसी गलतफहमी होती है. मिर्गी छुआछूत की बीमारी नहीं है. ये मरीज़ को छूने या उसके साथ बैठकर खाना खाने से नहीं फैलती. मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो दिमाग से जुड़ी होती है.

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मिर्गी के मरीज़ सामान्य जीवन नहीं जी सकते?

अक्सर लोगों को लगता है कि मिर्गी के मरीज़ सामान्य जीवन नहीं जी सकते. जबकि ये बात पूरी तरह गलत है. मिर्गी के ज़्यादातर मरीज़ सही इलाज से सामान्य जीवन जी सकते हैं. वो शादी कर सकते हैं, पढ़ाई कर सकते हैं. अपने रोज़मर्रा के काम भी कर सकते हैं.

मिर्गी का दौरा पड़ने पर मुंह में चम्मच डालनी चाहिए?

एक मिथ है कि दौरा पड़ने पर मरीज़ के मुंह में चम्मच या कोई ठोस चीज़ डाल देनी चाहिए. जबकि दौरे के दौरान मरीज़ के मुंह में कोई भी चीज़ नहीं डालनी चाहिए. इससे मरीज़ के दांत टूट सकते हैं. अगर आप अपना हाथ डालते हैं, तो दांत से चोट भी लग सकती है.

दौरा आमतौर पर कुछ समय बाद अपने आप रुक जाता है. आपको दौरा रुकने का इंतज़ार करना चाहिए. दौरे के दौरान मरीज़ को सुरक्षित तरीके से करवट लेकर लिटाएं. उसके सिर के नीचे कोई मुलायम चीज़ रख दें और दौरा खत्म होने का इंतज़ार करें.

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मिर्गी के दौरे में मरीज़ को कुछ खिलाना-पिलाना चाहिए?

ये बिल्कुल भी सही नहीं है. मरीज़ के होश में आने का इंतज़ार करना चाहिए. इसके बाद ही उसे कुछ खाने-पीने को या दवाई देनी चाहिए.

अगर आपके आसपास किसी को मिर्गी का दौरा पड़े, तो घबराएं नहीं. शांत रहें. मरीज़ को सुरक्षित जगह पर लिटाएं. आसपास कोई नुकली या भारी चीज़ हो, तो उसे हटा दें. फिर मरीज़ को करवट करके लिटाएं. उसके सिर के नीचे कोई मुलायम चीज़ रखें. जैसे कोई नरम कपड़ा, तकिया या चादर. इसके बाद मरीज़ के कपड़े ढीले करें. जब तक दौरा पूरी तरह खत्म न हो जाए, व्यक्ति होश में न आ जाए, तब तक उसके पास बने रहें. मरीज़ को डॉक्टर के पास लेकर जाएं, अगर दौरा 5 मिनट से ज़्यादा वक्त तक रहे या एक दौरे के तुरंत बाद दूसरा दौरा आ जाए. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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