सपा नेता आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कब्जे में लिया है. अटैच की गई संपत्तियों की कीमत 426.26 करोड़ रुपये बताई गई है. जबकि इनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपये आंका गया है.
ED ने आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतें अटैच, कीमत अरबों में
Azam Khan Jauhar University ED: आजम खान की मोहम्मद अली यूनिवर्सिटी की अटैच की गई संपत्तियों की कीमत 426.26 करोड़ रुपये बताई गई है. ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई.

ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई. ED ने बताया कि यूनिवर्सिटी का संचालन मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट करता है. ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी. वह इसके Honorary Chancellor भी हैं. ED की जांच में सामने आया है कि एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के विकास के लिए सरकारी फंड, कंस्ट्रक्शन मटेरियल को कथित तौर डायवर्ट किया गया.
ED ने कार्रवाई पर क्या लिखा?बुधवार, 28 अक्टूबर को ED ने एक्स पर लिखा,
“ED के लखनऊ जोन ने रामपुर में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है. ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है. इसमें मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, मोहम्मद आजम खान और अन्य लोग शामिल है.”
ED ने आगे लिखा कि कुर्क की गई संपत्ति की कीमत 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि इसकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग 1170 करोड़ रुपये है. साथ ही दो पन्नों की प्रेस रिलीज भी साझा की.
ED ने बताया कि ‘डिस्ट्रिक्ट वैल्युएशन ऑफिसर’ के आकलन के मुताबिक, विश्वविद्यालय के 59 भवनों की कुल कीमत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी. यूनिवर्सिटी की जमीन 114 रजिस्ट्री के जरिए खरीदी गई थी. इसकी कीमत 4.63 करोड़ रुपये बताई गई. इस तरह जमीन और ब्लिडिंग की कीमत 499.09 करोड़ आंकी गई.
आरोप है कि ट्रस्ट के खर्च और दान की जांच के बाद सिर्फ 72.63 करोड़ रुपये के खर्च का वैध स्रोत पता लगा. बाकी के 426.46 करोड़ रुपये का संतोषजनक हिसाब नहीं मिला.
पंडाल का मालिकाना हक यूनिवर्सिटी के पासED के मुताबिक, यूपी सरकार ने यूनिवर्सिटी परिसर में एक पंडाल, OBC छात्रों के हॉस्टल और एक हॉस्पिटल ब्लॉक के निर्माण के लिए 23.41 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. इसमें पंडाल का निर्माण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.
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मूल आदेश में ये शर्त थी कि इसका मालिकाना हक राज्य के संस्कृति विभाग के पास रहेगा. इसे राज्य सरकार के उपयोग के लिए फ्री में उपलब्ध कराया जाएगा. आरोप है कि बाद में पंडाल का मालिकाना हक जौहर यूनिवर्सिटी को सौंप दिया गया. सरकारी इस्तेमाल के लिए इसे उपलब्ध कराने की शर्त को हटा दिया गया. ED का आरोप है कि सरकारी फंड से बनी एक सार्वजनिक संपत्ति को इस तरह यूनिवर्सिटी की निजी संपत्ति में बदल दिया गया.
ED ने अजीम नगर थाने में दर्ज 26 FIR के बाद जांच शुरू की. इसमें किसानों की जमीन हड़पने और लगभग 34 एकड़ एनेमी प्रॉपर्टी पर गैर-कानूनी कब्जे के मामले शामिल हैं. ईडी ने कहा है कि मामले में अभी गहन जांच जारी है.
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