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AI Impact Summit 2026 में SAHI और BODH लॉन्च, हेल्थ सेक्टर में क्या-क्या बदलेगा?

देश के हेल्थ मिनिस्टर जे.पी. नड्डा ने AI इंपैक्ट समिट के दूसरे दिन दो नेशनल इनीशिएटिव्स लॉन्च किए हैं. पहला है- SAHI यानी स्ट्रेटजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर फॉर इंडिया यानी SAHI. दूसरा है- BODH यानी बेंचमार्किंग ओपेन डेटा प्लेटफॉर्म फॉर हेल्थ एआई.

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इंडिया AI इंपैक्ट समिट में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा

दिल्ली के भारत मंडपम में AI इंपैक्ट समिट चल रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लोगों की बेहतरी के लिए कैसे इस्तेमाल किया जाए, इस पर यहां चर्चा हो रही है. AI के फायदों के साथ-साथ इसके ख़तरों पर भी बात की जा रही है.  

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इंडिया AI इंपैक्ट समिट में कुल 100 सेशन होने हैं. करीब 700 टेक कंपनियां और साढ़े 3 हज़ार से ज़्यादा स्पीकर्स शामिल हैं. यहां 600 से ज़्यादा स्टार्टअप्स पर चर्चा होगी.

देश का हेल्थकेयर सिस्टम मज़बूत करने के लिए AI का बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जाए, ये भी इस समिट का एक अहम मुद्दा है. देश के हेल्थ मिनिस्टर जे.पी. नड्डा ने समिट के दूसरे दिन यानी 17 फरवरी को दो नेशनल इनीशिएटिव्स लॉन्च किए हैं.  

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पहला है- स्ट्रेटजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थकेयर फॉर इंडिया यानी SAHI. दूसरा है- बेंचमार्किंग ओपेन डेटा प्लेटफॉर्म फॉर हेल्थ एआई यानी BODH. इनका मकसद है- हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को और मज़बूती देना.

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SAHI और BODH मिलकर देश के हेल्थकेयर सिस्टम में बड़े बदलाव कर सकते हैं

एक-एक करके बताते हैं दोनों की ज़रूरत क्यों है. पहले बात SAHI की. ये एक तरह की गाइडलाइंस हैं. इन्हें इसलिए बनाया गया है ताकि देश के हेल्थकेयर सिस्टम में AI का सेफ और सही इस्तेमाल हो सके. किसी भी AI सिस्टम को हॉस्पिटल्स में लागू करने से पहले उसे चेक किया जाएगा. देखा जाएगा कि वो सही और सुरक्षित तरीके से काम कर रहा है या नहीं. फिर लगातार उस AI सिस्टम की निगरानी भी होगी. ये सभी SAHI के दायरे में किया जाएगा. गाइडलाइंस राज्यों और संस्थाओं की भी मदद करेंगी, ताकि वो लोगों की सेहत से जुड़ी ज़रूरतों का ध्यान रखते हुए AI का सही इस्तेमाल कर पाएं.

अब बात BODH प्लेटफॉर्म की. इसे IIT Kanpur और National Health Authority ने मिलकर बनाया है. इसका मकसद है AI सिस्टम की सही तरह जांच करना. ये लोगों के हेल्थ डेटा की मदद से AI मॉडल को परखेगा. लेकिन मरीज़ों की निजी जानकारी, उनका हेल्थ डेटा, किसी के साथ भी शेयर नहीं किया जाएगा. यानी लोगों के डेटा का इस्तेमाल AI मॉडल को ज़्यादा सटीक और बेहतर बनाने के लिए होगा. पर ये डेटा गुप्त रहेगा. BODH प्लेटफॉर्म को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत एक डिजिटल पब्लिक गुड माना गया है. यानी ये देश के भले के लिए बनाई गई सार्वजनिक डिजिटल सुविधा है.

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वैसे SAHI और BODH मिलकर देश के हेल्थकेयर सिस्टम में बड़े बदलाव कर सकते हैं. लेकिन देखना ये होगा कि इन्हें कितने प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा.

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