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गुजरात में गंदे पानी से फैला हैजा, 20 लोग संक्रमित, जानें लक्षण और बचाव

गुजरात के जामनगर में ज़मीन के नीचे पानी की पाइपलाइन में लीकेज था. जिससे पानी दूषित हो गया. फिर दूषित पानी पीने से लोग बीमार पड़ गए.

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हैजा के सभी मरीज़ों का अस्पताल चल रहा है

गुजरात का शहर जामनगर. यहां 8 फरवरी से अब तक हैजा के लगभग 20 मामले सामने आ चुके हैं. शक है कि हैजा गंदा पानी पीने की वजह से फैला. असल में यहां ज़मीन के नीचे पानी की पाइपलाइन में लीकेज था. जिससे पानी दूषित हो गया. दूषित पानी पीने से लोग बीमार पड़ गए. पिछले दिनों कई राज्यों में लोग दूषित पानी पीकर बीमार पड़े हैं. इंदौर, गांधीनगर, बेंगलुरु, ग्रेटर नोएडा समेत कई जगहों पर लोगों को टायफॉइड और डायरिया हुआ. कुछ लोगों की मौत भी हो गई.

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जामनगर में हैजा से किसी की मौत नहीं हुई है. यहां के कलेक्टर केबी ठक्कर ने बुधवार को बताया था कि पिछले 24 घंटों में एक भी नया मामला सामने नहीं आया है. लेकिन 48 घंटे बाद मिली कल्चर रिपोर्ट से 5 अन्य मरीज़ों में हैजा कंफर्म हुआ है. मरीज़ों का इलाज चल रहा है. सभी मामले जामनगर के धरननगर इलाके के हैं.

जामनगर नगर निगम के मेडिकल ऑफिसर हरेश गोरी ने बताया कि धरननगर इलाके में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है. फिर पाइपलाइन की मरम्मत का काम चल रहा है. साथ ही, डोर-टू-डोर सर्वे और पीने के पानी का सैंपल लेने के लिए 20 टीमों को भेजा गया है. हेल्थ टीम्स अब तक 2500 से ज़्यादा घरों का सर्वे कर चुकी हैं. उन्होंने क्लोरीन की टैबलेट्स भी बांटी हैं.

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वहीं प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वो उबला हुआ या साफ पानी ही पिएं, और किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से मिलें.

सालों पहले हैजा एक महामारी थी. लेकिन जैसे-जैसे व्यवस्थाएं सुधरीं, हैजा के मामले घटने लगे. लेकिन पूरी तरह बंद नहीं हुए. ठीक कोविड की तरह.

हैजा कैसे फैलता है? इसके लक्षण क्या हैं? और इससे बचाव कैसे कर सकते हैं? ये सब हमें बताया शारदाकेयर हेल्थसिटी में इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर, डॉक्टर चिराग टंडन ने.

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डॉ. चिराग टंडन, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, शारदाकेयर हेल्थसिटी

हैजा क्यों होता है?

डॉक्टर चिराग बताते हैं कि हैजा वाइब्रो कॉलेरी नाम के बैक्टीरिया की वजह से होता है. जब ये बैक्टीरिया शरीर में पहुंचता है, तो छोटी आंत में एक टॉक्सिन यानी ज़हरीला पदार्थ बनाता है. इस टॉक्सिन की वजह से बहुत ज़्यादा पानी शरीर से बाहर निकल जाता है. इससे दस्त होते हैं और शरीर में फ्लूइड्स व सॉल्ट्स की कमी हो जाती है. वाइब्रो कॉलेरी बैक्टीरिया दूषित खाने, पानी या गंदे हाथों से खाना खाने से शरीर में पहुंच सकता है.

हैजा के लक्षण

हैजा होने पर पानी जैसे पतले दस्त होते हैं. लगातार उल्टियां आती हैं. ज़्यादातर मामलों में बहुत ज़्यादा डिहाइड्रेशन हो जाता है. यानी शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है. मरीज़ को कमज़ोरी लगती है. गंभीर हालत में मरीज़ बेहोश भी हो सकता है. जैसे ही किसी में हैजा के लक्षण दिखें. उसे तुरंत अस्पताल लेकर जाएं, ताकि सही इलाज हो सके. वरना स्थिति जानलेवा भी हो सकती है.

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हैजा होने पर IV ड्रिप चढ़ाई जाती है (फोटो: Freepik)

हैजा का इलाज 

हैजा का इलाज बहुत आसान है. मरीज़ को ORS दिया जाता है. खूब पानी और नारियल पानी पिलाया जाता है. ज़रूरत पड़ने पर ड्रिप चढ़ाई जाती है. डॉक्टर एंटीबायोटिक्स भी दे सकते हैं. लेकिन सबसे ज़रूरी है, शरीर में पानी की कमी पूरी होना.

हैजा की वैक्सीन भी मौजूद है. जिन जगहों पर हैजा के मामले ज़्यादा आते हैं. वहां लोगों को इसकी वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जाती है.

हैजा से ऐसे बचें

- उबला, साफ़ पानी पिएं.

- ताज़ा खाना खाएं.

- खाने को ढककर रखें.

- खाने से पहले हाथ धोएं.

- खुले में शौच न करें.

- आसपास सफाई रखें.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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