देश में पहला AI हेल्थकेयर सिस्टम लॉन्च हुआ है. नाम है- iLive Connect. इसके फाउंडर हैं डॉक्टर राहुल चंदोला. वो कार्डियोथोरैसिक सर्जन हैं. को-फाउंडर हैं सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर विवेक कुमार. iLive Connect दुनिया का पहला डॉक्टर-लेड, AI सपोर्टेड डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म है.
डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीज़ पर नज़र रखेंगे डॉक्टर, देश का पहला AI हेल्थकेयर सिस्टम लॉन्च
iLive Connect का सब्सक्रिप्शन लेने पर मरीज़ को दो मशीन दी जाती हैं. एक, बायोसेंसर पैच. दूसरा, रिस्टबैंड. इन दोनों को शरीर पर लगाना होता है. बायोसेंसर पैच छाती पर लगाया जाता है. वहीं रिस्टबैंड कलाई पर पहना जाता है.


iLive Connect सिस्टम कैसे काम करता है? ये आपके और हमारे कैसे काम आ सकता है? इसकी कीमत क्या है? ये सब हमने पूछा इसके फाउंडर डॉक्टर राहुल चंदोला से.

डॉक्टर राहुल बताते हैं कि जब तक मरीज़ हॉस्पिटल में होता है. तब तक नर्सेज़ और डॉक्टर उसकी देखभाल करते हैं. लेकिन मरीज़ के डिस्चार्ज होने के बाद उसकी देखभाल करना मुश्किल हो जाता है. यहां काम आता है iLive Connect. इसमें मरीज़ को दो मशीन दी जाती हैं. एक, बायोसेंसर पैच. दूसरा, रिस्टबैंड. इन दोनों को शरीर पर लगाना होता है. बायोसेंसर पैच छाती पर लगाया जाता है. बिल्कुल ECG पैच की तरह. वहीं रिस्टबैंड कलाई पर पहना जाता है. बिल्कुल किसी स्मॉर्ट वॉच की तरह.
इन डिवाइसेज़ को लगातार पहनना पड़ता है. पर इसमें कोई चिंता की बात नहीं है, क्योंकि ये वॉटरप्रूफ हैं. इन्हें नहाते समय या दूसरे काम करते वक्त आराम से पहना जा सकता है. मरीज़ को बस एक बार डिवाइस पहननी है. बाकी काम डॉक्टर्स कर देते हैं. बायोसेंस पैच और रिस्टबैंड, मरीज़ की हेल्थ से जुड़ा डेटा लगातार रिकॉर्ड करते हैं. जैसे दिल की धड़कन. सांस लेने की रफ्तार. ऑक्सीज़न लेवल. शरीर का तापमान. ब्लड प्रेशर में होने वाले बदलाव. फिज़िकल एक्टिविटी. पोश्चर. नींद की क्वालिटी और पैटर्न. थकान का लेवल. मरीज़ के गिरने का पता भी ये लगा लेते हैं.

ये सारा डेटा रियल टाइम में iLive Connect के कमांड सेंटर तक पहुंचता है. यहां हाइली-स्पेशलाइज़्ड डॉक्टर चौबीस घंटे मरीज़ को लाइव मॉनीटर करते हैं. यानी उसके हेल्थ डेटा पर नज़र रखते हैं. चाहे रात के 2 बजे हों या सुबह का 6 बज रहा हो. मरीज़ डॉक्टर से लगातार कनेक्टेड रहता है.
अगर मरीज़ को कोई दिक्कत होती है. जैसे उसका बीपी बढ़ता है. शुगर लेवल हाई या लो होता है. सांस लेने में दिक्कत होती है. ये सब कमांड सेंटर में मौजूद डॉक्टर्स को पता चल जाता है. फिर वो तुरंत मरीज़ और उसके गार्डियन से कनेक्ट करते हैं. ये गार्डियन परिवार का कोई भी सदस्य हो सकता है. मरीज़ के माता-पिता, बेटा या बेटी. डॉक्टर उन्हें ज़रूरी सलाह देते हैं. बताते हैं कि फौरन क्या करने की ज़रूरत है.
iLive Connect का एक ऐप भी है. जिस पर मरीज़ को तुरंत ई-प्रिस्क्रिप्शन भेजा जाता है और उसमें लिखी दवाइयां अगले एक घंटे के अंदर उस तक पहुंच जाती हैं. क्योंकि, इस प्लेटफॉर्म से फार्मेसी भी जुड़ी हुई है. अगर मरीज़ की तबियत ज़्यादा गंभीर हो गई है, और उसे तुरंत डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत है. तब कमांड सेंटर में मौजूद डॉक्टर्स इसका नोटिफिकेशन भेजते हैं. यही नहीं, 20 मिनट में एंबुलेंस मरीज़ के पास पहुंचकर उसे नज़दीकी अस्पताल पहुंचाती है.

डिवाइसेज़ के साथ ये सारी सर्विसेज़ आपको तब मिलेंगी. जब आप प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन लेंगे. जैसे नेटफ्लिक्स का लेते हैं. iLive Connect का 14 दिन का सब्सक्रिप्शन 17,100 रुपये का है. इसमें डिवाइसेज़ की कीमत भी शामिल हैं. एक महीने का सब्सक्रिप्शन 27 हज़ार का है. लेकिन अगले महीने से सब्सक्रिप्शन की कीमत कम हो जाती है. बार-बार नई डिवाइस लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती. वहीं, लंबे सब्सक्रिप्शन प्लान, जैसे 3 महीने, 6 महीने या 1 साल, कम कीमत पर मिल जाते हैं.
iLive Connect उनके ज़्यादा काम का है. जो बुज़ुर्ग हैं. अकेले रहते हैं. जो हाल ही में डिस्चार्ज हुए हैं. जिन्हें लंबे समय से कोई बीमारी है. जैसे डायबिटीज़, हाई बीपी, दिल की बीमारी, COPD और अस्थमा वगैरा.
iLive Connect की डिवाइसेज़ बायोसेंस पैच और रिस्टबैंड को 410 मरीज़ पर टेस्ट किया गया था. ये स्टडी 10 हफ्तों तक चली. देखा गया कि इससे बार-बार अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में करीब 76% तक की कमी आई है. iLive Connect बहुत असरदार प्लेटफॉर्म है. जो हेल्थकेयर को समझने और मॉनिटर करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है. लेकिन, हां, ये अभी आम इंसान के लिए काफ़ी महंगा है. उम्मीद है आने वाले समय में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को इसका फ़ायदा मिलेगा.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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