डायबिटीज़ के इलाज में बड़ा बदलाव आने वाला है. अब मरीज़ों को रोज़-रोज़ इंसुलिन का इंजेक्शन नहीं लेना पड़ेगा. डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने 9 जुलाई 2026 को भारत में 'अविक्ली' (Awiqli) को लॉन्च कर दिया है. ये लंबे समय तक असर करने वाला बेसल इंसुलिन है. इसे रोज़ के बजाय हफ्ते में सिर्फ एक बार लेना होगा.
डायबिटीज मरीजों के रोज इंसुलिन लेने का अंत, Awiqli भारत में लॉन्च, जानें कितने शॉट लेने होंगे
वैसे ‘अविक्ली’ दवा का ब्रांड नेम है. इसका जेनेरिक नाम इंसुलिन आइकोडेक है. जिसे एडल्ट्स में टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज़ के इलाज के लिए मंज़ूरी मिली है. अगले हफ्ते से ये दवा भारतीय बाज़ार में मिलने की उम्मीद है. इसकी कीमत भी बहुत ज़्यादा नहीं रखी गई है. 70 यूनिट की एक वीकली डोज़ की कीमत 261 रुपये होगी.


वैसे ‘अविक्ली’ दवा का ब्रांड नेम है. इसका जेनेरिक नाम इंसुलिन आइकोडेक है. जिसे एडल्ट्स में टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज़ के इलाज के लिए मंज़ूरी मिली है. अगले हफ्ते से ये दवा भारतीय बाज़ार में मिलने की उम्मीद है. इसकी कीमत भी बहुत ज़्यादा नहीं रखी गई है. 70 यूनिट की एक वीकली डोज़ की कीमत 261 रुपये होगी.

नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिया के मुताबिक, अविक्ली का फ्लेक्सटच इंसुलिन पेन दो वेरिएंट में आएगा.
पहला 1 ml का पेन होगा, जिसमें कुल 700 यूनिट इंसुलिन होगी. इसकी कीमत 2,611 रुपये रखी गई है.
दूसरा 3 ml का पेन होगा, जिसमें कुल 2,100 इंसुलिन होगी. इसकी कीमत 7,833 रुपये होगी.

विक्रांत श्रोत्रिया का मानना है कि अविक्ली की वजह से लोगों के लिए इंसुलिन शुरू करना आसान हो जाएगा. नोवो नॉर्डिस्क ने भी अपने बयान में कहा कि भारत में इंसुलिन शुरू करने में औसतन 7 से 9 साल की देरी हो जाती है. इसकी बड़ी वजह है इंजेक्शन का डर, दर्द और इलाज के खर्च की चिंता. जहां नॉर्मल बेसल इंसुलिन का इंजेक्शन हर 24 घंटे में एक बार लगाना पड़ता है. पर अविक्ली को इस तरह तैयार किया गया है कि ये पूरे हफ्ते शरीर को ज़रूरी बेसल इंसुलिन देती रहती है. इससे एक साल में लगने वाले इंजेक्शन की संख्या 365 से घटकर सिर्फ़ 52 रह जाएगी.
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अविक्ली का लॉन्च होना इसलिए अहम है क्योंकि डायबिटीज़ के सबसे ज़्यादा मरीज़ भारत में ही हैं. देश में 10 करोड़ से ज़्यादा लोगों को डायबिटीज़ है. वहीं 13 करोड़ से ज़्यादा लोग प्री-डायबिटिक हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 से भी पता चला था कि करीब 18 परसेंट महिलाओं और 21 परसेंट पुरुषों का ब्लड शुगर लेवल ज़्यादा है, या वो डायबिटीज़ की दवा ले रहे हैं. हाई ब्लड शुगर के मामले, महिलाओं और पुरुषों, दोनों में ही पहले से बढ़े हैं. ऐसे में उम्मीद है कि ये नया इंसुलिन इंजेक्शन डायबिटीज़ के इलाज को पहले से आसान बना सकेगा.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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