पहले आप ये दो तस्वीरें देखिए. दोनों बच्चों की हैं.
प्रेग्नेंसी में अगर ये गलती की तो बच्चे का सिर फूलकर बहुत बड़ा हो सकता है
आज हम हाइड्रोसेफेलस पर ही बात करेंगे. डॉक्टर से जानेंगे कि ये हाइड्रोसेफेलस कंडीशन क्यों होती है. इसके लक्षण क्या हैं. ये इतनी गंभीर क्यों है. और हाइड्रोसेफेलस का इलाज व इससे बचाव कैसे कर सकते हैं.



पहली तस्वीर में एक स्वस्थ बच्चा है. वहीं, दूसरी तस्वीर में बच्चे का सिर बहुत ज़्यादा बड़ा है. इस तरह बच्चों का सिर बढ़ना एक गंभीर कंडीशन में होता है. जिसका नाम है हाइड्रोसेफेलस. ये कोई रेयर कंडीशन नहीं है. पर है बहुत गंभीर और जानलेवा. भारत में भी इसके मामले सुनने को मिल जाते हैं. ये कंडीशन ज़्यादातर नवजात बच्चों में देखी जाती है. यानी ये जन्म से ही होती है. पर कई बार कुछ खास स्थितियों में ये बड़ी उम्र के लोगों को भी हो सकती है.
आज हम हाइड्रोसेफेलस पर ही बात करेंगे. डॉक्टर से जानेंगे कि ये हाइड्रोसेफेलस कंडीशन क्यों होती है. इसके लक्षण क्या हैं. ये इतनी गंभीर क्यों है. और हाइड्रोसेफेलस का इलाज व इससे बचाव कैसे कर सकते हैं.
हाइड्रोसेफेलस क्या होता है?
ये हमें बताया डॉक्टर श्रीकांत शर्मा ने.

हमारे दिमाग में एक तरल पदार्थ बनता है. इसे सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) कहते हैं. कुछ स्थितियों में ये तरल दिमाग से ठीक तरह बाहर नहीं निकल पाता. वहीं, कुछ मामलों में ये सामान्य से बहुत ज़्यादा बनने लगता है. इससे दिमाग के अंदर मौजूद तरल से भरी जगहें (वेंट्रिकल्स) बड़ी होने लगती हैं और दिमाग के अंदर दबाव बढ़ जाता है.
हाइड्रोसेफेलस के कारण
कुछ बच्चों में जन्म से ही दिमाग के अंदर मौजूद तरल से भरी जगहें (वेंट्रिकल्स) ठीक से विकसित नहीं होतीं, या फिर सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) के निकलने का रास्ता कहीं बंद या संकरा हो जाता है. इसकी वजह से CSF दिमाग से सही तरह बाहर नहीं निकल पाता. वहीं, बड़ों में ब्रेन ट्यूमर की वजह से हाइड्रोसेफेलस हो सकता है. दिमाग के अंदर ब्लीडिंग या ब्रेन इंफेक्शन होने पर भी वेंट्रिकल्स का आकार बढ़ सकता है. इससे CSF जमा होने लगता है और दिमाग के अंदर दबाव बढ़ जाता है.
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हाइड्रोसेफेलस के लक्षण
- हाइड्रोसेफेलस होने पर बच्चों का सिर असामान्य रूप से बड़ा होने लगता है.
- बार-बार उल्टी आती है.
- चिड़चिड़ापन रहता है.
- सुस्ती होती है.
- आंखें नीचे की ओर झुकी हुई दिखती हैं.
- वहीं बड़े बच्चों या एडल्ट्स में चिड़चिड़ापन होता है.
- व्यवहार में बदलाव आता है.
- बैलेंस बिगड़ने लगता है.
- आंखों की रोशनी कम हो जाती है.
- समय पर पहचान और इलाज से हाइड्रोसेफेलस का सफल इलाज मुमकिन है.

हाइड्रोसेफेलस कितना गंभीर है?
अगर हाइड्रोसेफेलस का समय पर इलाज हो जाए, तो दिमाग पर बढ़ा हुआ दबाव कम किया जा सकता है. इससे दिमाग के टिशूज़ को नुकसान से बचाया जा सकता है. आंखों की रोशनी और मानसिक विकास पर भी अच्छा असर पड़ता है. जल्दी ऑपरेशन करके इसका सफल इलाज संभव है. बड़े लोगों में भी सर्जरी के बाद लक्षण धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. कई मरीज़ों में आंखों की रोशनी में सुधार देखा जाता है. चलने-फिरने का संतुलन बेहतर हो सकता है. उल्टी-उबकाई और सिरदर्द जैसी परेशानियों में राहत मिलती है. इलाज के बाद मरीज़ों के व्यवहार में भी सुधार देखा गया है.
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हाइड्रोसेफेलस का इलाज और बचाव
हाइड्रोसेफेलस का मुख्य इलाज सर्जरी है जो दो तरह की होती है. पहली है शंट सर्जरी. इसमें एक पतली ट्यूब दिमाग की तरल से भरी जगह में लगाई जाती है. ये ट्यूब एक्स्ट्रा CSF को शरीर के दूसरे हिस्से, आमतौर पर पेट तक पहुंचाती है. इससे दिमाग में बढ़ा हुआ दबाव कम हो जाता है.
कुछ मरीज़ों में ETV (एंडोस्कोपिक थर्ड वेंट्रिकुलोस्टोमी) नाम की सर्जरी की जाती है. इसमें एंडोस्कोपी की मदद से CSF के निकलने के लिए दिमाग के अंदर नया रास्ता बनाया जाता है.
जहां तक बात बचाव की है, तो दिमाग के इंफेक्शन से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराएं. सिर में चोट से बचने के लिए गाड़ी चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करें. प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर की सलाह के अनुसार फोलिक एसिड और दूसरे ज़रूरी सप्लीमेंट लें. साथ ही, नियमित जांचें कराएं ताकि बच्चे में हाइड्रोसेफेलस जैसी समस्या का समय रहते पता चल सके. लापरवाही का नतीजा हाइड्रोसेफेलस भी हो सकता है.
हाइड्रोसेफेलस का नाम सुनकर घबराएं नहीं. पर अगर किसी बच्चे या बड़े में हाइड्रोसेफेलस के लक्षण दिखें तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरो सर्जन से मिलें.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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