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घर पर रखी ये एक चीज़ पूरी बॉडी डिटॉक्स कर देगी, महंगे सप्लीमेंट्स की जरूरत ही नहीं

वैसे तो शरीर खुद ही अपने आपको डिटॉक्स कर लेता है, पर खाने-पीने की कुछ चीज़ें इस प्रोसेस को बेहतर और तेज़ कर देती हैं.

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जब शरीर में टॉक्सिंस कम होते हैं, तो अंग अच्छे से काम करते हैं

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  • डॉक्टर प्रभात रंजन सिन्हा ने बताया कि शरीर में मौजूद लिवर, किडनी, स्किन और फेफड़े मिलकर नेचुरली टॉक्सिन्स को बाहर निकालने की प्रक्रिया डिटॉक्सिफिकेशन करते हैं।
  • टॉक्सिन्स को शरीर से निकालने के लिए बाजार में डिटॉक्स सप्लीमेंट्स की अधिकता है, जबकि शरीर स्वाभाविक रूप से खुद को डिटॉक्स करता है और सही खान-पान से यह प्रक्रिया तेज होती है।
  • डिटॉक्सिफिकेशन से शरीर के अंग बेहतर काम करते हैं, इसलिए पर्याप्त पानी पीना, हरी सब्जियां खाना और ऑर्गेनिक भोजन अपनाकर नेचुरली डिटॉक्सिंग को बढ़ावा देना चाहिए।

मार्केट में ऐसे प्रोडक्ट्स की भरमार है, जो दावा करते हैं कि उन्हें खाने-पीने से शरीर डिटॉक्स हो जाता है. हकीकत तो ये है कि शरीर से टॉक्सिंस यानी गंदगी बाहर निकालने के लिए आपको किसी सप्लीमेंट या रेडीमेड जूस की ज़रूरत ही नहीं है. शरीर नेचुरली खुद को डिटॉक्स कर लेता है. हां, ये ज़रूर है कि कुछ चीज़ें खा-पीकर इस डिटॉक्सिफिकेशन प्रोसेस को बेहतर और तेज़ किया जा सकता है.  

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आज हम डॉक्टर से जानेंगे कि बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन क्या होता है? ये क्यों ज़रूरी है? कौन-से अंग बॉडी डिटॉक्स करते हैं? और खाने-पीने की कौन-सी चीज़ें इस प्रक्रिया में मदद कर सकती हैं? 

बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन क्या है?

ये हमें बताया डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा ने.

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डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा, डायरेक्टर एंड यूनिट हेड, इंटरनल मेडिसिन, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, द्वारका

डॉ. प्रभात बताते हैं कि डिटॉक्सिफिकेशन एक प्रक्रिया है, जिसमें शरीर से हानिकारक तत्व (टॉक्सिंस) बाहर निकाले जाते हैं. हमारे शरीर में पहले से ही कई ऐसे सिस्टम हैं, जो नेचुरली डिटॉक्सिफिकेशन करते हैं. खान-पान में बदलाव करके भी शरीर से टॉक्सिंस निकाले जा सकते हैं.

बॉडी डिटॉक्स करने के फायदे

डॉ. प्रभात के मुताबिक, डिटॉक्सिफिकेशन हमारे शरीर के लिए बहुत ज़रूरी है. जब शरीर में टॉक्सिंस कम होते हैं, तब सभी अंग बेहतर तरीके से काम करते हैं. जैसे नर्वस सिस्टम, दिल (सर्कुलेटरी सिस्टम), फेफड़े (पल्मोनरी सिस्टम), पाचन तंत्र और मसल्स. जिनके शरीर में टॉक्सिन्स कम होते हैं, उनके काम करने की क्षमता ज़्यादा अच्छी होती है. ऐसे लोग खुद को ज़्यादा हेल्दी महसूस करते हैं. उनकी नींद भी बेहतर होती है. इसलिए, हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए बहुत ज़रूरी है कि शरीर डिटॉक्स होता रहे.

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लिवर और किडनी शरीर को डिटॉक्स करते हैं 
कौन-से अंग शरीर को डिटॉक्स करते हैं?

डॉ. प्रभात बताते हैं कि हमारे शरीर के कई अंग टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करते हैं. इसमें सबसे मुख्य भूमिका लिवर की होती है. अगर हमारे खाने-पीने में कोई ऐसी चीज़ है, जो शरीर के लिए ठीक नहीं है. तब लिवर उसे मेटाबोलाइज़ करके स्टूल के ज़रिए बाहर निकालने में मदद करता है. बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन में दूसरी अहम भूमिका किडनियों की होती है. खाना पचने के बाद जो नाइट्रोजन वेस्ट (टॉक्सिंस) बनते हैं, किडनी उन्हें फिल्टर करके यूरिन के जरिए बाहर निकालती है. 

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तीसरा अहम अंग है स्किन. हमारे शरीर के कुछ टॉक्सिन्स पसीने के ज़रिए स्किन से बाहर निकलते हैं. 

इसके अलावा फेफड़े भी मदद करते हैं. सांस के ज़रिए कुछ हानिकारक गैसें और तत्व शरीर से बाहर निकलते हैं. यानी लिवर, किडनी, स्किन और फेफड़े मिलकर शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया को सही से चलाते हैं. 

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बॉडी डिटॉक्स करने के लिए पर्याप्त पानी पीना ज़रूरी है 
बॉडी डिटॉक्स करने में मदद करेंगी ये चीज़ें

कई चीज़ों के ज़रिए हम शरीर को डिटॉक्स कर सकते हैं. सबसे पहले, पर्याप्त पानी पीना बहुत ज़रूरी है. दिनभर में खूब पानी पिएं, ताकि टॉक्सिन्स आसानी से बाहर निकल सकें. अपनी डाइट में ज़्यादा से ज़्यादा वेजिटेरियन फूड शामिल करें. जहां तक हो सके, ऑर्गेनिक फूड्स खाएं. इनमें पेस्टिसाइड्स और केमिकल्स कम होते हैं. ऑर्गेनिक फूड खाने से डिटॉक्सिफिकेशन में मदद मिलती है. 

डाइट में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां जैसे- पालक, और चुकंदर वग़ैरह शामिल करें. ये शरीर को अंदर से साफ रखने में मदद करते हैं. तरल पदार्थ खूब लें, इससे ज़्यादा यूरिन बनता है जो शरीर की गंदगी बाहर निकालने में मदद करता है. इन सभी आदतों को अपनाकर शरीर को नेचुरली डिटॉक्स करने में मदद मिल सकती है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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