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एंटीबायोटिक खा रहे हैं? सावधान! आपकी ही दवा पेट की सबसे बड़ी दुश्मन बन सकती है

एंटीबायोटिक लेने के बाद पेट गड़बड़ा गया. पेट दर्द. ऐंठन. गैस होने लगी. ज़्यादा एंटीबायोटिक खाने से ऐसा होना बहुत आम समस्या है. कब एंटीबायोटिक ही आपके पेट की दुश्मन बन जाती है, ये डॉक्टर्स से जान लीजिए.

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कहीं आप भी तो बात-बात पर दवाई नहीं खाते?

सर्दी-ज़ुकाम हुआ. बुखार आया. सिरदर्द हुआ. आपने तुरंत एंटीबायोटिक खरीदकर खा ली. डॉक्टर से कोई राय-मशविरा नहीं किया. फिर क्या हुआ? उस दवा ने असर नहीं किया. तबियत ठीक नहीं हुई. जानते हैं, दवा ने काम क्यों नहीं किया? क्योंकि आपको हुआ वायरल इन्फेक्शन. यानी किसी वायरस की वजह से आप बीमार पड़े. मसलन इन्फ्लुएंजा वायरस. लेकिन उसका इलाज आपने किया बैक्टीरिया मारने वाली दवा से. यानी एंटीबायोटिक से.

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एंटीबायोटिक लेने के बाद पेट गड़बड़ा गया. पेट दर्द. ऐंठन. गैस होने लगी. ज़्यादा एंटीबायोटिक खाने से ऐसा होना बहुत आम समस्या है. कब एंटीबायोटिक ही आपके पेट की दुश्मन बन जाती है, ये बताएंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि ज़्यादा एंटीबायोटिक्स लेने से पेट की सेहत पर क्या असर पड़ता है. एंटीबायोटिक्स लेने से पहले डॉक्टर एंटासिड लेने की सलाह क्यों देते हैं. एंटीबायोटिक्स लेते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. और, जब तक एंटीबायोटिक्स चल रही हैं, तब तक किस तरह का खाना खाना चाहिए. 

ज़्यादा एंटीबायोटिक्स लेने से पेट पर क्या असर पड़ता है?

ये हमें बताया डॉक्टर सुभाष अगल ने. 

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डॉ. सुभाष अगल, हेड, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई

हमारी आंतों में करोड़ों बैक्टीरिया रहते हैं. इन्हें गट फ्लोरा कहा जाता है. गट फ्लोरा शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करता है. ये कई ज़रूरी अंगों को सुरक्षित भी रखता है. एंटीबायोटिक्स गट फ्लोरा को खत्म कर देती हैं. इसलिए, एंटीबायोटिक्स लेने से आंतों के साथ-साथ सभी अंगों पर बुरा असर पड़ता है.

गट फ्लोरा बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया को आंतों में घुसने से रोकता है. इसी वजह से हम कई इंफेक्शन से बचे रहते हैं. जैसे गैस्ट्रोएंटेराइटिस, टायफॉइड और सेप्टिसीमिया यानी पूरे शरीर में इंफेक्शन फैलना. गट फ्लोरा इन सारी बीमारियों को रोकने में मदद करता है. लेकिन, इसके नष्ट होने से इम्यूनिटी कमज़ोर हो जाती है. इससे इंफेक्शन होने का चांस बढ़ जाता है. गट फ्लोरा हमारी नेचुरल गट इम्यूनिटी का आधार है.

एंटीबायोटिक्स लेने से पहले एंटासिड क्यों ज़रूरी?

हर दवा के कुछ न कुछ साइड इफेक्ट्स होते हैं. ऐसी कोई दवा नहीं है, जिसके साइड इफेक्ट न हों. इसी तरह एंटीबायोटिक्स के भी साइड इफेक्ट्स होते हैं. जैसे उबकाई आना. उल्टी होना. पेट दर्द होना. आंतों की अंदरूनी परत में सूजन आने से ये सारे साइड इफेक्ट्स होते हैं. 

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अगर एंटीबायोटिक के साथ एंटासिड लिया जाए, तो ये साइड इफेक्ट्स कुछ हद तक कम हो सकते हैं. लेकिन, हर एंटीबायोटिक का असर अलग होता है. इसलिए, हर एंटीबायोटिक के साथ एंटासिड लेना ज़रूरी नहीं होता. अगर डॉक्टर सलाह दें कि एंटीबायोटिक लेने से पहले एंटासिड लें, तो उसे ज़रूर लेना चाहिए.

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डॉक्टर के कहने के बाद ही एंटीबायोटिक्स लेनी चाहिए (फोटो: Freepik)

एंटीबायोटिक्स लेते हुए किन बातों का ध्यान रखें?

एंटीबायोटिक तभी लें, जब उसकी सच में ज़रूरत हो. डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक बिल्कुल न लें. कई इंफेक्शन वायरस की वजह से होते हैं. इन्हें ठीक करने में एंटीबायोटिक मददगार नहीं होती. ऐसे में अगर आप एंटीबायोटिक लेते हैं, तो वो बेकार जाती है. दवा उल्टा असर भी कर सकती है. 

एंटीबायोटिक उतने ही दिन लें, जितने दिन डॉक्टर ने बताए हों. अगर कम समय के लिए लेते हैं, तो बैक्टीरिया के रेज़िस्टेंट (जिद्दी) होने का ख़तरा रहता है. अगर ज़्यादा समय तक लेते हैं, तो साइड इफेक्ट्स बढ़ सकते हैं. इसलिए इन सारी बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है. 

एंटीबायोटिक कब तक लेनी है, ये डॉक्टर बताते हैं. अलग-अलग बीमारियों में अलग-अलग समय तक एंटीबायोटिक दी जाती हैं. जैसे टायफॉइड में 14 से 15 दिन तक एंटीबायोटिक दी जाती है. नॉर्मल इंफेक्शन में 3 से 4 दिन की एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं. इसलिए, इन सारी बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है. 

जहां तक मुमकिन हो, एंटीबायोटिक्स खाली पेट न लें, ताकि गैस्ट्राइटिस और बाकी साइड इफेक्ट्स से बचा जा सके. लेकिन, कुछ एंटीबायोटिक्स खाली पेट ज़्यादा असरदार होती हैं. इसलिए, डॉक्टर ने जैसा बताया है, वैसा ही करें. जैसे ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) की दवाइयां खाली पेट ज़्यादा असर करती हैं. ये सब कुछ दवा देते वक्त डॉक्टर आपको बताएंगे.

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जब तक दवा चल रही है, तब तक सादा खाना ही खाएं (फोटो: Freepik)

जब तक एंटीबायोटिक्स चल रही हैं, किस तरह का खाना खाएं?

जब तक एंटीबायोटिक्स चल रही हैं, तब तक सादा खाना ही खाएं. मिर्च-मसाले वाला, तला-भुना, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फ़ूड से बचें. इससे गैस्ट्राइटिस यानी पेट की अंदरूनी परत में सूजन आ सकती है. भारी खाना जैसे छोले, राजमा और रेड मीट भी न खाएं. आपको दाल-चावल, रोटी-सब्ज़ी, खिचड़ी और दलिया खाना चाहिए. भले ही कई दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के मिल जाती हैं. पर इसका मतलब ये नहीं कि ज़रा सी दिक्कत महसूस होने पर आप बिना डॉक्टर की सलाह लिए एंटीबायोटिक खा लें. हमेशा डॉक्टर से पूछकर ही दवाएं खाएं. वरना सेहत को नुकसान पहुंच सकता है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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