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क्या बीपी की दवाइयां किडनी ख़राब कर देती हैं? सच डॉक्टर से जान लीजिए

एक बहुत बड़ी आबादी बीपी की दवाइयां लेने से बचती है. वजह है डर. डर कि अगर एक बार दवाइयां लेना शुरू कर दीं तो ज़िंदगीभर खानी पड़ेंगी. इससे किडनियां ख़राब हो जाएंगी. अब डॉक्टर ने इस बारे सारी बातें बताई हैं.

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आप बीपी की दवा खाते हैं या नहीं?

भारत में 22 करोड़ से ज़्यादा लोगों को हाई बीपी यानी हाइपरटेंशन है. बहुत सारे लोग लो बीपी से भी जूझते हैं. इसे हाइपोटेंशन कहा जाता है. कुल मिलाकर, देश में बीपी एक बड़ी समस्या है. इसके बावजूद एक बहुत बड़ी आबादी बीपी की दवाइयां लेने से बचती है. वजह है डर. डर कि अगर एक बार दवाइयां लेना शुरू कर दीं तो ज़िंदगीभर खानी पड़ेंगी. इससे किडनियां ख़राब हो जाएंगी.

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क्या वाकई बीपी की दवाओं से किडनियां ख़राब हो सकती हैं? ये हमने पूछा धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल, दिल्ली में नेफ्रोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर, डॉक्टर यासिर रिज़वी से.

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डॉ. यासिर रिज़वी, डायरेक्टर, नेफ्रोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल, दिल्ली

डॉक्टर यासिर का कहना है कि ब्लड प्रेशर की दवाइयां किडनी ख़राब नहीं करतीं. बल्कि वो किडनियों को सेफ़ रखने में मदद करती हैं. हाई बीपी का असर कई अंगों पर पड़ता है. जैसे दिल, दिमाग और किडनियां. लंबे वक्त तक हाई बीपी की वजह से किडनियों की नाज़ुक नसों को नुकसान पहुंचता है. धीरे-धीरे किडनी की खून फिल्टर करने की क्षमता घटने लगती है और किडनियां ख़राब होने लगती हैं. कुछ मामलों में मरीज़ की किडनी पूरी तरह फेल हो जाती है. इसलिए, बीपी कंट्रोल करना बहुत ज़रूरी है. इसमें काम आती हैं दवाइयां.

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ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए कई तरह की दवाइयां मौजूद हैं. इसमें से कुछ दवाइयां ऐसी हैं, जिन्हें शुरू करने के बाद क्रिएटिनिन का लेवल थोड़ा बढ़ सकता है. क्रिएटिनिन एक वेस्ट मैटेरियल यानी गंदगी है. आमतौर पर किडनी इसे फिल्टर करके यूरिन के ज़रिए शरीर से बाहर निकाल देती है. लेकिन, जब किडनी सही से काम नहीं कर पाती. तब ये किडनी में जमा होकर उसे नुकसान पहुंचाता है. ऐसे में, जब टेस्ट में क्रिएटिनिन लेवल बढ़ा हुआ निकलता है. तब लोग डर जाते हैं. लेकिन ये अक्सर घबराने वाली बात नहीं होती. ऐसा थोड़े समय के लिए ही होता है.

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बीपी की दवाइयां शुरू करते वक्त किडनी से जुड़े टेस्ट भी किए जाते हैं (फोटो: Freepik)

जब किसी मरीज़ में बीपी की दवाइयां शुरू की जाती हैं. तब डॉक्टर समय-समय पर किडनी से जुड़े टेस्ट भी करवाते हैं, ताकि किसी भी बदलाव को जल्दी पकड़ा जा सके. अगर टेस्ट रिज़ल्ट कंट्रोल में रहते हैं. तो दवाइयां जारी रखी जाती हैं.

कभी-कभी बीपी की दवा शुरू करने के बाद ब्लड प्रेशर ज़्यादा लो हो जाता है. ऐसे में चक्कर आना, घबराहट या बेहोशी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसलिए जब भी बीपी की दवा शुरू करें. तो दिन में 2-3 बार ब्लड प्रेशर ज़रूर चेक करें. अगर बीपी हर बार नॉर्मल से कम आए, तो डॉक्टर को दिखाएं. ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर दवा कम कर सकते हैं या बंद भी कर सकते हैं.

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(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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