The Lallantop

भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की बिक्री 40 गुना बढ़ी, पेट से जेब तक सिर्फ नुकसान

इकनॉमिक सर्वे से पता चला है कि 2006 में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की बिक्री 0.9 अरब डॉलर थी. जो 2019 तक बढ़कर 38 अरब डॉलर हो गई. यानी करीब 40 गुना ज़्यादा. इस दौरान, महिलाओं और पुरुषों में मोटापा लगभग डबल हो गया.

Advertisement
post-main-image
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स शरीर के लिए बिल्कुल अच्छे नहीं हैं (फोटो: Freepik)

भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की ब्रिकी तेज़ी से बढ़ रही है. साल 2009 से 2023 के बीच इनकी बिक्री में 150% से भी ज़्यादा का उछाल देखा गया है. ये पता चला है इकनॉमिक सर्वे 2025-26 में. इसे 29 जनवरी 2026 को देश की फाइनैंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

इकनॉमिक सर्वे से पता चला है कि 2006 में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की बिक्री 0.9 अरब डॉलर थी. जो 2019 तक बढ़कर 38 अरब डॉलर हो गई. यानी करीब 40 गुना ज़्यादा. इस दौरान, महिलाओं और पुरुषों में मोटापा लगभग डबल हो गया. 

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2019-21 के मुताबिक, 24% भारतीय महिलाएं और 23% पुरुष ओवरवेट या ओबीज़ हैं. सबसे चिंता की बात है बच्चों में बढ़ता मोटापा. 2015-16 में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में मोटापे की दर 2% से ज़्यादा थी. ये 2019-21 में बढ़कर करीब साढ़े 3% हो गई. ऐसा अंदाज़ा है कि साल 2020 में 3 करोड़ से ज़्यादा बच्चे ओबीज़ थे. इनकी संख्या 2035 तक बढ़कर 8 करोड़ से ज़्यादा हो सकती है. यानी जैसे-जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की बिक्री बढ़ी, देश में मोटापा भी बढ़ा.

Advertisement
upfs
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को बनाते समय बहुत ज़्यादा प्रोसेस किया जाता है (फोटो: Freepik)

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स खाने-पीने की वो चीज़ें हैं. जिन्हें बनाते समय बहुत ज़्यादा प्रोसेस किया जाता है. उनमें फूड कलर, प्रिज़रवेटिव्स, स्वीटनर्स, बहुत ज़्यादा फैट और नमक वगैरा डाला जाता है. बिस्किट, नमकीन, ब्रेड, चिप्स, कैंडी, चॉकलेट, पैकेज्ड सूप, सीरियल्स, चिकन नगेट्स, हॉटडॉग, फ्राइज़, रेडी टू ईट फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स, चॉकलेट मिल्क, पैक्ड लस्सी, पिज़्ज़ा, बर्गर और नूडल्स, ये सबकुछ अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड आइटम्स हैं.

इकनॉमिक सर्वे के मुताबिक, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड हमारा डाइटरी पैटर्न बदल रहे हैं. यानी ये हमारे ट्रेडिशनल खाने, जैसे दाल-सब्ज़ी-रोटी वगैरा की जगह ले रहे हैं. इस वजह से हमारी डाइट ख़राब हो रही है, और कई गंभीर बीमारियों का ख़तरा बढ़ रहा है.

दी लैंसेट जर्नल में Ultra-Processed Foods and Human Health पर एक सीरीज़ है. इसमें दुनियाभर के रिसर्चर्स ने काम किया है. इस सीरीज़ के तहत जो स्टडीज़ हुई हैं, उनसे पता चलता है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स कई बीमारियों का रिस्क बढ़ा देते हैं. जैसे मोटापा, दिल की बीमारियां, सांस से जुड़ी बीमारियां, डायबिटीज़ और मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर्स वगैरा. 

Advertisement

यही नहीं, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स से हमारी जेब पर भी भारी पड़ रहे हैं. जब कोई व्यक्ति इन्हें बहुत ज़्यादा खाता है, तो वो बीमार पड़ता है. उसका लंबा इलाज चलता है. उसके काम करने की क्षमता भी घट जाती है. इन सबसे उसकी जेब तो ढीली होती ही है. सरकार और समाज पर भी आर्थिक दबाव पड़ता है.

पर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स हमें बीमार कैसे बना देते हैं? इनसे किन बीमारियों का ख़तरा बढ़ता है? ये हमने पूछा नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट में सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर मुकेश नांदल से.

dr mukesh nandal
डॉ. मुकेश नांदल, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम

डॉक्टर मुकेश कहते हैं कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स में फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स जैसे ज़रूरी पोषक तत्व नहीं होते. उल्टा फैट और शुगर भर-भरकर डाले जाते हैं. इनसे मोटापा बढ़ता है. मोटापे से डायबिटीज़ का रिस्क बढ़ता है.

इसके अलावा, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स में सोडियम का खूब इस्तेमाल होता है. ज़्यादा नमक की वजह से ब्लड प्रेशर हाई रहता है. हाई बीपी यानी दिल की बीमारियों का ख़तरा. ज़्यादा सोडियम की वजह से किडनियों को भी नुकसान पहुंचता है.

कई अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को हेल्दी कहकर बेचा जाता है. जैसे कि लस्सी. कहने को तो लस्सी हेल्दी है. पर अगर ये आपको पैक्ड मिल रही है. तो समझ जाइए, वो नुकसानदेह है. 180 ml पैक्ड लस्सी में करीब 25 ग्राम चीनी होती है. ये किसी भी एंगल से हेल्दी तो नहीं है.

ultra processed foods
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स खाने से मोटापा बढ़ता है (फोटो: Freepik)

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स से कैंसर का भी रिस्क बढ़ता है. दरअसल, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स में प्रिज़रवेटिव्स डाले जाते हैं. इन प्रिज़रवेटिव्स का काम है, खाने की शेल्फ लाइफ को बढ़ाना. जिससे वो प्रोडक्ट जल्दी ख़राब नहीं होता. उसे लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है. लेकिन ये प्रिज़रवेटिव्स लंबे समय तक शरीर में जमा हो सकते हैं. और, सेल्स को नुकसान पहुंचाकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का रिस्क बढ़ा सकते हैं.

कुछ फूड प्रिज़रवेटिव्स में पोटेशियम सोर्बेट नाम का केमिकल होता है. इसे खाने से कैंसर का रिस्क 12% बढ़ जाता है. वहीं, ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क 23-24% तक बढ़ जाता है. वहीं, कई फ़ूड प्रिज़र्वेटिव में पोटैशियम नाइट्रेट डाला जाता है. इसके ज़्यादा सेवन से कैंसर का ख़तरा 12 से 15% तक बढ़ जाता है. खाने के कई पैकेट्स में सोडियम नाइट्रेट लिखा होता है. इसके ज़्यादा इस्तेमाल से प्रोस्टेट कैंसर का रिस्क 32% तक बढ़ जाता है. ये बहुत चिंता की बात है. इसलिए अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स खाना बंद कर दें.

cancer
कई तरह के प्रिज़रवेटिव्स कैंसर का रिस्क बढ़ाते हैं (फोटो: Freepik)

कुछ काम पॉलिसी के लेवल पर भी होने ज़रूरी हैं. इकॉनमिक सर्वे के मुताबिक, अब तक पॉलिसीज़ का फोकस लोगों को जागरूक करने पर रहा है, ताकि वो अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स कम खाएं. लेकिन सिर्फ लोगों की आदतें बदलने से बात नहीं बनेगी. इसके लिए ऐसे नियम बनाने होंगे. जो अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स के प्रोडक्शन, उसकी बिक्री और मार्केटिंग को कंट्रोल करें. साथ ही, हेल्दी खाने को बढ़ावा दें.

इसके लिए अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स से जुड़े विज्ञापनों पर कुछ नियम लागू किए जा सकते हैं. जैसे सुबह 6 से रात 11 बजे तक सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स के विज्ञापन न आएं. साथ ही, सभी अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स में वॉर्निंग लेबल लगाए जाएं. जिस भी प्रोडक्ट में चीनी, नमक या फैट तय सीमा से ज़्यादा हो, उस पर ज़्यादा टैक्स लगाया जाए. 

ये वो सुझाव है जो इकॉनमिक सर्वे में दिए गए हैं. 

कुछ वक्त पहले, हेल्थ मिनिस्ट्री ने देशभर के सभी केंद्रीय संस्थानों को निर्देश दिया है कि वो 'ऑयल और शुगर बोर्ड' लगाएं. ये बोर्ड लोगों को साफ-साफ बताएंगे, कि उनके स्नैक्स में कितना फैट और कितनी शक्कर मिली है. उम्मीद है इन सभी नियमों से एक बदलाव देखने को मिलेगा.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: सीधे स्किन पर लगा सकते हैं परफ्यूम या डिओडोरेंट?

Advertisement