मान लीजिए आदमियों का शरीर एक स्मार्ट सिटी है. वैसा नहीं, जैसा हमारे देश में होता है. ढंग की स्मार्ट सिटी है. इस सिटी में हर सिस्टम बिल्कुल ठीक से काम करता है. यहां किडनी एक हाई-टेक वॉटर फिल्टर प्लांट है, जो खून को साफ करती है और शरीर का कचरा पानी में मिलाकर पेशाब बनाती है. ये पेशाब एक स्टोरेज टैंक यानी ब्लैडर में जमा होता है. जब ब्लैडर भर जाता है तो यूरेथ्रा नाम की एक पाइप के ज़रिए पेशाब शरीर से बाहर निकल जाती है.
प्रोस्टेट बढ़ा तो किडनी खराब हो सकती है, ये लक्षण दिखते ही सतर्क हो जाएं
पुरुषों में प्रोस्टेट, यूरिनरी सिस्टम के सबसे निचले हिस्से में होता है. प्रोस्टेट बढ़ने पर पेशाब में खून आ सकता है. पेशाब करने में रुकावट या दिक्कत हो सकती है.


इस सिस्टम में एक छोटा-सा वॉल्व भी है, जिसे प्रोस्टेट कहते हैं. प्रोस्टेट ब्लैडर के ठीक नीचे होता है और यूरेथ्रा को चारों तरफ से घेरे रहता है. किडनी, ब्लैडर, यूरेथ्रा और प्रोस्टेट. ये चारों मिलकर स्मार्ट सिटी को ठीक से चलाने में मदद करते हैं.

मुसीबत तब शुरू होती है, जब प्रोस्टेट बड़ा और सख्त होने लगता है. ऐसा होने पर पहला असर पड़ता है यूरेथ्रा पर. फिर ब्लैडर और उसके बाद किडनी पर लेकिन प्रोस्टेट में गड़बड़ी का असर सीधे किडनी तक कैसे होता है? बढ़ा हुआ प्रोस्टेट किडनी को किस तरह नुकसान पहुंचा सकता है? यही जानेंगे आज. डॉक्टर से उन लक्षणों के बारे में भी समझेंगे, जो बताते हैं कि अब किडनी पर असर पड़ने लगा है. साथ ही पता करेंगे ज़रूरी टेस्ट्स, इलाज और बचाव के बारे में.
ये हमें बताया डॉक्टर योगेश छाबड़ा ने.

डॉक्टर योगेश के मुताबिक, पुरुषों में प्रोस्टेट, यूरिनरी सिस्टम के सबसे निचले हिस्से में होता है. प्रोस्टेट में रुकावट आने से किडनी को नुकसान पहुंचने का ख़तरा बढ़ जाता है. यानी प्रोस्टेट और किडनी का आपस में गहरा संबंध है. प्रोस्टेट बढ़ने पर पेशाब में खून आ सकता है. पेशाब करने में रुकावट या दिक्कत हो सकती है. पेशाब की रुकावट से यूरिन का दबाव किडनी तक पहुंच सकता है, जिससे किडनी पर असर पड़ सकता है.
डॉक्टर आगे बताते हैं कि शुरुआत में इसका पता केवल जांच से चलता है. समय के साथ खून में यूरिया और क्रिएटिनिन बढ़ सकता है. मरीज़ के शरीर में सूजन आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. यानी लंबे समय तक प्रोस्टेट की समस्या रहने पर किडनी को भी नुकसान पहुंच सकता है.
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कैसे समझें कि किडनी पर असर पड़ने लगा है?डॉक्टर योगेश छाबड़ा के अनुसार, किडनी की बीमारी में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं होता. ज़्यादातर मरीज़ों में किडनी से जुड़े कोई भी लक्षण नहीं दिखते. सूजन आना, पेशाब रुकना या पेशाब की मात्रा कम होना जैसे लक्षण बाद में दिखाई देते हैं. सांस फूलने जैसी समस्या भी अक्सर बीमारी के गंभीर या देर से होने वाले चरण में सामने आती है. शुरुआती और कई बार बीच के चरणों में भी मरीज़ को कोई परेशानी महसूस नहीं होती.

किडनी की जांच के लिए सबसे ज़रूरी है यूरिन रुटीन टेस्ट. यूरिन टेस्ट से पेशाब में प्रोटीन या खून की मौजूदगी का पता चल सकता है. साथ में किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) से यूरिया और क्रिएटिनिन के लेवल की जांच की जाती है. ये जांचें किडनी की शुरुआती बीमारी के संकेत दे सकती हैं. कई मरीज़ देर से डॉक्टर के पास पहुंचते हैं. तब तक यूरिया और क्रिएटिनिन की मात्रा काफी बढ़ चुकी होती है.
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समय रहते इलाज और बचाव कैसे करें?- खूब पानी पिएं
- नमक कम खाएं
- बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स न लें
- ब्लड शुगर की नियमित जांच कराएं
- ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखें
ये सारी आदतें किडनी को लंबे समय तक हेल्दी रखने में मदद करती हैं. हां, कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें. बस छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर भी किडनी की सेहत लंबे समय तक बेहतर रखी जा सकती है
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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