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क्या मोबाइल टावर से निकलने वाली रेडिएशन से कैंसर हो सकता है?

मोबाइल टावर से निकलने वाले किरणें नॉन-आयनाइज़िंग होती हैं. ये किरणें DNA को नुकसान नहीं पहुंचातीं. न ही ये शरीर के सेल्स को तोड़ती हैं.

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आपके घर के पास भी कोई मोबाइल फोन टावर है?

‘घर के आसपास मोबाइल टावर नहीं होना चाहिए. इससे ख़तरनाक रेज़ निकलती हैं. इन रेज़ से कैंसर हो सकता है.'

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ये बात आपने किसी न किसी से ज़रूर सुनी होगी. अब ये बात तो सच है कि मोबाइल टावर से रेडिएशन निकलता है. पर क्या इससे कैंसर हो सकता है? ये सवाल हमने पूछा आर्टेमिस हॉस्पिटल्स में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर दीपक झा से.

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डॉ. दीपक झा, सीनियर कंसल्टेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स

डॉक्टर दीपक बताते हैं कि मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन से कैंसर नहीं होता. इससे निकलने वाली किरणें नॉन-आयनाइज़िंग होती हैं. यानी ये किरणें DNA को नुकसान नहीं पहुंचातीं. न ही ये शरीर के सेल्स को तोड़ती हैं.

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कैंसर तब होता है, जब DNA को नुकसान पहुंचता है, या उसमें किसी तरह का बदलाव आता है.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजे़शन यानी WHO की एक एजेंसी है. International Agency For Research On Cancer यानी IARC. इसका कहना है कि रेडियोफ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड्स कैंसर कर सकती हैं. लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत अभी तक उपलब्ध नहीं है. इसलिए घबराने की ज़रूरत नहीं है.  

रेडियोफ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड्स वो किरणें हैं, जो मोबाइल फोन, मोबाइल टावर, वाईफाई और रेडियो-टीवी सिग्नल से निकलती हैं. इन्हीं के ज़रिए फ़ोन कॉल्स की जाती हैं. इंटरनेट चलता है. डेटा एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर होता है. इसलिए भले IARC ने रेडियोफ्रीक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड्स को Group 2B कार्सिनोजेन माना है. लेकिन, आपको घबराना नहीं चाहिए. क्योंकि, इनसे कैंसर होने का कोई पक्का सबूत उपलब्ध नहीं है. साथ ही, भारत में मोबाइल टावर्स के लिए रेडिएशन लिमिट बहुत सख्त है.

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भारत में EMF यानी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड की सीमा इंटरनेशनल स्टैंडर्ड से कई गुना सख्त है (फोटो: Freepik)

डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशंस के मुताबिक, भारत में EMF यानी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड की सीमा इंटरनेशनल स्टैंडर्ड से कई गुना सख्त है. आपके घर, स्कूल या ऑफिस के बाहर लगा हर मोबाइल टावर इन्हीं सख्त नियमों का पालन करता है. भारत सरकार का दूरसंचार विभाग हर मोबाइल टावर की निगरानी करता है. टावर की लोकेशन, पावर आउटपुट और रेडिएशन लेवल की समय-समय पर मॉनिटरिंग होती है. हर कुछ वक्त में EMF कंप्लायंस टेस्ट किए जाते हैं. इससे पता चलता है कि उस टावर से निकलने वाली रेडिएशन सेफ लिमिट में है या नहीं. अगर रेडिएशन सेफ लिमिट के अंदर है, तब तो कोई बात नहीं. लेकिन अगर नहीं है, तो उसे लगाने वाली कंपनी पर 20 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाता है.

आप तरंग संचार पोर्टल पर देख सकते हैं कि आपके एरिया में कितने टावर हैं. किस ऑपरेटर के हैं. उनका रेडिएशन सर्टिफिकेट क्या है. EMF कंप्लायंस स्टेटस क्या है. सबकुछ आपको इस पोर्टल पर पता चल जाएगा.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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