सिरदर्द हुआ. पेनकिलर खा ली. पेटदर्द हुआ. पेनकिलर खा ली. कमरदर्द हुआ. पेनकिलर खा ली. हाथ-पैर या शरीर में कहीं भी दर्द हुआ, तुरंत पेनकिलर खरीदकर खा ली.
ज़रा-सा दर्द होने पर पेनकिलर खाने लगते हैं? ये आदत किडनियां ख़राब करवा देगी
वैसे तो हर दवा का काम शरीर को फायदा पहुंचाना है, तो फिर पेनकिलर नुकसान क्यों करने लगती हैं, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि पेनकिलर्स खाने से किडनी पर बुरा असर क्यों पड़ता है. इनसे किडनी को कितना नुकसान पहुंचता है. और किन लोगों को बिना डॉक्टर से पूछे पेनकिलर्स छूनी भी नहीं चाहिए.

अगर आप भी हर दर्द पर ऐसा करते हैं, तो आप अपनी किडनियों को बड़ी आफत में डाल रहे हैं. पेनकिलर कुछ वक्त के लिए आपका दर्द भले दूर कर दें. पर ये अंदर ही अंदर किडनी को नुकसान पहुंचाती रहती हैं. वैसे तो हर दवा का काम शरीर को फायदा पहुंचाना है, तो फिर पेनकिलर नुकसान क्यों करने लगती हैं, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि पेनकिलर्स खाने से किडनी पर बुरा असर क्यों पड़ता है. इनसे किडनी को कितना नुकसान पहुंचता है. और किन लोगों को बिना डॉक्टर से पूछे पेनकिलर्स छूनी भी नहीं चाहिए.
पेनकिलर्स से किडनी को नुकसान क्यों होता है?ये हमें बताया डॉक्टर अनुपम रॉय ने.

ज़्यादातर लोग बिना डॉक्टर के पर्चे के पेनकिलर्स खरीदते हैं. शरीर में कहीं दर्द हुआ और तुरंत केमिस्ट के पास जाकर दवाई ले ली. लेकिन हर पेनकिलर एक जैसा नहीं होता. कई पेनकिलर्स किडनी पर बुरा असर डालते हैं.
पेनकिलर्स किडनी में जाने वाले खून के बहाव को प्रभावित करते हैं. ये किडनी की खुद को कंट्रोल करने की क्षमता पर भी असर डालते हैं. इससे किडनी को नुकसान पहुंचता है. दरअसल, किडनी अपने अंदर खून के बहाव और दबाव को एक जैसा बनाए रखती है. मगर पेनकिलर्स उसके इस काम में बाधा डालते हैं. जिससे किडनी को ठीक से खून की सप्लाई नहीं हो पाती.
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अगर पहले ही किडनी तक ठीक से खून नहीं पहुंच रहा है. शरीर में डिहाइड्रेशन यानी पानी की बहुत ज़्यादा कमी है. ये डिहाइड्रेशन बुखार, दस्त या उल्टी की वजह से हो सकता है. ऐसी स्थिति में पेनकिलर खाने से किडनी पर दबाव बढ़ता है. इससे किडनी के काम करने की क्षमता घट जाती है. इसलिए बिना डॉक्टर से पूछे पेनकिलर्स लेना ख़तरनाक हो सकता है.
जिन मरीज़ों को डायबिटीज़, हाई बीपी या किडनी की बीमारी है. उनके लिए पेनकिलर्स बहुत ज़्यादा नुकसानदेह हो सकते हैं. अगर कोई मरीज़ लंबे समय से पेनकिलर्स ले रहा है. तब उसे क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ होने का रिस्क बढ़ जाता है. इसे एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है.

कुछ खास कॉम्बिनेशन वाली पेनकिलर्स में कैफ़ीन और दूसरी चीज़ें होती हैं. इन्हीं की वजह से क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ होता है. अगर पेनकिलर्स की हाई डोज़ काफी समय तक ली जाए. तब इनसे लॉन्ग टर्म में किडनी को नुकसान पहुंच सकता है.
एक ही पेनकिलर को लंबे समय तक लेने से भी किडनी को नुकसान होता है. इसे एक्यूट इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस (AIN) कहा जाता है. ये कुछ खास दवाओं से एलर्जी के कारण होता है.
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कई बार पेनकिलर्स की वजह से इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस हो जाता है. पेशाब में खून या प्रोटीन आ सकता है. किडनी के काम करने की क्षमता बहुत ज़्यादा घट जाती है. किडनी में क्रिएटिनिन की मात्रा भी बढ़ जाती है. यानी पेनकिर्स खाने से किडनी पर बुरा असर पड़ता है.
इसलिए कोई भी पेनकिलर डॉक्टर से पूछकर ही लें. पता करें कि कौन-सा पेनकिलर आपके लिए सेफ़ है. वो पेनकिलर लेना कितना ज़रूरी है. साथ ही, दर्द का कारण भी पता करें. जब तक दर्द की वजह नहीं पता चलेगी, आप पेनकिलर खाते रहेंगे. इससे आपको फ़ायदे से ज़्यादा नुकसान होने का ख़तरा रहेगा.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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