बचपन में मम्मी कहती थीं- रोज़ दूध पिया करो. हड्डियां मज़बूत बनेंगी. लेकिन आजकल लाइफस्टाइल ऐसी है कि कम उम्र में ही लोगों की हड्डियां कमज़ोर होने लगी हैं. ज़रा-सी चोट में फ्रैक्चर हो जाता है. शरीर में, जोड़ों में दर्द रहने लगता है. इसलिए बहुत ज़रूरी है ये जानना कि हड्डियों को मज़बूत रखने के लिए क्या करना चाहिए और किन चीज़ों से बचना चाहिए.
खोखली हो जाएंगी हड्डियां, अगर ये 5 चीजें भूलकर भी कीं
आजकल लाइफस्टाइल ऐसी है कि कम उम्र में ही लोगों की हड्डियां कमज़ोर होने लगी हैं. ज़रा-सी चोट में फ्रैक्चर हो जाता है. इसलिए बहुत ज़रूरी है ये जानना कि हड्डियों को मज़बूत रखने के लिए क्या करना चाहिए और किन चीज़ों से बचना चाहिए.


चलिए फिर, डॉक्टर साहब से जानेंगे कि कौन-सी 5 चीज़ें हड्डियों को मज़बूत बनाती हैं और कौन-सी 5 चीज़ें हड्डियों के लिए धीमे ज़हर जैसी हैं. ये भी समझेंगे कि मज़बूत हड्डियों के लिए सिर्फ डाइट काफी है या सप्लीमेंट भी लेने पड़ते हैं. साथ ही, जानेंगे कमज़ोर हड्डियों के लक्षण क्या हैं और कौन-से टेस्ट कराने चाहिए.
5 चीज़ें जो हड्डियों के लिए धीमे ज़हर जैसी हैं
ये हमें बताया डॉक्टर अरविंद मेहरा ने.

5 चीज़ें जो हड्डियों के लिए ज़हर जैसी हैं. वो हैं- ज़्यादा नमक लेना, कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा पीना, ज़्यादा शराब पीना, स्मोकिंग और तंबाकू का सेवन, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड खाना.
ज़्यादा नमक खाने से शरीर पेशाब के जरिए कैल्शियम बाहर निकालने लगता है. शरीर में कैल्शियम कम होगा तो हड्डियां कमज़ोर होने लगेंगी. वहीं, कोल्ड ड्रिंक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और सोडा में फॉस्फोरिक एसिड और शुगर बहुत ज़्यादा होती है. ये शरीर में कैल्शियम का संतुलन बिगाड़ देते हैं. इससे हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो सकती है.
शराब पीने से शरीर कैल्शियम और विटामिन D को ठीक से एब्ज़ॉर्ब नहीं कर पाता. इससे हड्डियों में ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों के खोखले) होने का खतरा बढ़ जाता है. वहीं, सिगरेट और तंबाकू की वजह से हड्डियों तक खून का फ्लो कम हो जाता है. इससे हड्डियों की रिकवरी धीमी हो जाती है और फ्रैक्चर का ख़तरा बढ़ जाता है.
जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड, जैसे प्रोसेस्ड मीट और चिप्स, शरीर में सूजन बढ़ाते हैं. ये सूजन हड्डियों को नुकसान पहुंचाती है. इससे हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं.

5 चीज़ें जो हड्डियों को मज़बूत बनाती हैं
जो 5 चीज़ें हड्डियों को मज़बूत बनाती हैं. वो हैं- दूध और दही, सनलाइट यानी धूप, हरी सब्ज़ियां, प्रोटीन, एक्सरसाइज़ और वॉकिंग.
दूध में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है. कैल्शियम हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए बहुत ज़रूरी है. वहीं, सूरज की रोशनी से शरीर को विटामिन D मिलता है. विटामिन D शरीर में कैल्शियम को अच्छे से एब्ज़ॉर्ब करने में मदद करता है.
हरी सब्ज़ियां, जैसे पालक, मेथी और ब्रॉकली, पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं. इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन K अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. ये सभी पोषक तत्व हड्डियों को मज़बूत बनाए रखने में मदद करते हैं. प्रोटीन वाली चीज़ें जैसे दाल, अंडा, मीट और मछली मांसपेशियों को मज़बूत बनाने में मदद करती हैं. मज़बूत मांसपेशियां हड्डियों को भी सहारा और ताकत देती हैं.
अब बात एक्सरसाइज़ और वॉकिंग की. आप जितना एक्सरसाइज़ करेंगे, उतनी ही मांसपेशियां मज़बूत होंगी. इससे शरीर की लचक बेहतर होती है. अगर मांसपेशियां मज़बूत होंगी, तो एक्सरसाइज़ के दौरान हड्डियों पर सही दबाव पड़ेगा. इससे हड्डियों की ताकत बढ़ती है और उनके कमज़ोर होने का खतरा घटता है.
मज़बूत हड्डियों के लिए सप्लीमेंट लें या डाइट काफी है?
ये हमें बताया डॉक्टर कंदर्प विद्यार्थी ने.

जिन लोगों को डाइट से पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिल पाता, उन्हें सप्लीमेंट की ज़रूरत पड़ सकती है. जैसे बुज़ुर्ग अक्सर खाने से मिला कैल्शियम पचा नहीं पाते. कई बार उन्हें खाने से पर्याप्त कैल्शियम मिलता भी नहीं है. मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं को भी पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिल पाता. ऐसे में डॉक्टर उन्हें कैल्शियम सप्लीमेंट दे सकते हैं.
इसी तरह, प्रेग्नेंट महिलाओं को भी कैल्शियम सप्लीमेंट की ज़रूरत पड़ती है. पुरुष अगर संतुलित डाइट लें, तो आमतौर पर कैल्शियम की ज़रूरत पूरी हो जाती है. दूध, दही, पनीर और रागी कैल्शियम के अच्छे सोर्स हैं.
शरीर में कैल्शियम के सही इस्तेमाल के लिए विटामिन D भी बहुत ज़रूरी है. विटामिन D मुख्य रूप से धूप से मिलता है. सूरज की रोशनी पड़ने पर शरीर विटामिन D बनाता है. अगर पर्याप्त धूप नहीं मिल पाए, तो डॉक्टर विटामिन D सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं.

कमज़ोर हड्डियों के लक्षण, ज़रूरी टेस्ट
अक्सर कमज़ोर हड्डियों के शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते. कई लोगों को इसका पता तब चलता है, जब मामूली चोट में भी हड्डी टूट जाती है. कई बार सिर्फ फिसलने से कलाई, कमर या कूल्हे की हड्डी टूट सकती है. ऐसा खासकर बुज़ुर्ग महिलाओं के साथ ज़्यादा होता है. इसलिए समय रहते जांच कराना ज़रूरी है.
शरीर में विटामिन D की कमी पता करने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है. कमी मिलने पर उसे डाइट, धूप या सप्लीमेंट से पूरा किया जाता है. बुज़ुर्गों और मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में बोन डेंसिटोमेट्री (DEXA स्कैन) करते हैं. इससे पता चल जाता है कि हड्डियां कितनी मज़बूत या कमज़ोर हैं. इस जांच में T-स्कोर नाम का एक पैरामीटर देखा जाता है. T-स्कोर जितना कम होता है, हड्डियां उतनी ही कमज़ोर मानी जाती हैं. T-स्कोर के हिसाब से कैल्शियम के साथ-साथ कुछ दवाइयां इंजेक्शन के फॉर्म में देनी पड़ती हैं. अगर समय रहते हड्डियों की कमज़ोरी पता चल जाए, तो उन्हें और कमज़ोर होने और टूटने से बचाया जा सकता है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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