मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है. इस रिपोर्ट में उनकी मौत का कारण 'एंटीमॉर्टम हैंगिंग बाय लिगेचर' बताया गया है. यानी मौत से पहले किसी फंदे या रस्सी से गला कसना.
ट्विशा शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, फंदा, शरीर पर चोटें सब साफ हो गया
Twisha Sharma post mortem: डॉक्टरों ने गला कसने के निशान के नीचे के टिशू में चोट के दो छोटे-छोटे धब्बे मिले. फेफड़ों में Tardieu's spots दिखाई दिए, जो आमतौर पर दम घुटने की स्थिति से जुड़े होते हैं. दिमाग, फेफड़ों और पेट की परत में भी खून का जमाव (congestion) पाया गया.


12 मई की देर रात को ट्विशा शर्मा का शव घर की छत पर लगी एक जिमनास्टिक बेल्ट से उतारा गया था. भोपाल के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के फोरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी डिपार्टमेंट में ट्विशा का पोस्टमार्टम किया गया था. उनके शरीर पर हल्की चोटें भी पाई गई हैं.
आधी रात (13 मई) को डॉक्टरों ने ट्विशा को मृत घोषित कर दिया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर भोपाल पुलिस इस केस को आत्महत्या का केस मानकर चल रही है. पुलिस इस मौत के पीछे का राज जानने की भी कोशिश कर रही है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर ट्विशा के परिवार की अपनी आपत्ति है. उन्होंने ट्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की है. भोपाल पुलिस ने इससे इनकार नहीं किया है.
परिवार का आरोप है कि जिस चीज से गला कसा गया, उसे पोस्टमार्टम करने वाली मेडिकल टीम को नहीं सौंपा गया था. पुलिस ने भी इस बात को माना है. 20 मई को आजतक से जुड़े रवीश पाल सिंह से बात करते हुए भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा,
"जिस बेल्ट का जिक्र कर रहे हैं, उसे FSL ने जब्त कर लिया था और सही प्रक्रिया का पालन करते हुए उसे थाने के मालखाना में जमा कर दिया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ कई चीजें भेजी जाती हैं. किसी वजह से वह बेल्ट उस समय नहीं भेजी जा सकी थी. हम अभी इस मामले में एक अलग जांच कर रहे हैं. जब हमने बाद में वह बेल्ट भेजी, वो ठीक से सील्ड थी. ऐसा नहीं है कि उसके साथ कोई छेड़छाड़ हुई. हमारे द्वारा भेजी गई बेल्ट मिलने पर डॉक्टर ने उसकी जांच की और अपनी रिपोर्ट जमा कर दी. वह रिपोर्ट मूल पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पूरी तरह मेल खाती है. इससे जांच पर कोई भी गलत असर नहीं पड़ा है."
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने ट्विशा की गर्दन के ऊपरी हिस्से के चारों ओर तिरछा बना हुआ, दोहरी लाल रंग की धारी वाला एक निशान देखा. इसके नीचे की स्किन सूखी, कठोर और 'चर्मपत्र जैसी' (parchmentized) बताई गई और गर्दन के पिछले हिस्से में निशान अधूरा पाया गया.
रिपोर्ट में दम घुटने (asphyxia) के लक्षणों का भी जिक्र है, जिनमें चेहरे पर खून का जमाव, कानों और नाखूनों का नीला पड़ना, और दाईं आंख में छोटी खून की नसों के फटने से बने धब्बे (petechial haemorrhages) शामिल हैं.
गला कसने के निशान के अलावा पोस्टमॉर्टम में शरीर के अन्य हिस्सों पर भी कई चोटें पाई गईं. इनमें गर्दन के बाईं ओर खरोंचें, बाएं हाथ की ऊपरी बांह और दाईं कलाई पर खरोंचें और दाईं अनामिका उंगली पर रगड़ के निशान और सिर के ऊपरी हिस्से के नीचे, बाईं ओर के सामने वाले हिस्से (frontoparietal region) पर 2 सेमी x 2 सेमी का एक घाव शामिल है.
इन सब तथ्यों के आधार पर पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने आजतक से बातचीत में साफ कहा,
ट्विशा ने आत्महत्या की है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एंटीमॉर्टम हैंगिंग पाया गया है. पुलिस आत्महत्या के एंगल से जांच कर रही है. अब किन हालात में उसने आत्महत्या की वो हमारी जांच का विषय है. पुलिस के ऊपर कोई दबाव नहीं है.
उन्होंने आगे कहा, "शरीर पर जो चोटें पाई गई हैं वो मामूली चोटें हैं. कई बार बड़ा अपराधी भी जल्दी पकड़ा जाता है और छोटा अपराधी देर से. लेकिन हमारी टीमें लगी हुई हैं और जल्द ही समर्थ पुलिस की गिरफ्त में होगा. सेकंड पोस्टमार्टम से हमें कोई आपत्ति नहीं है. अंत में यही कहूंगा कि यह एक आत्महत्या है."
दम घुटने के लक्षणटाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि आंतरिक जांच के दौरान डॉक्टरों ने गला कसने के निशान के नीचे के टिशू में चोट के दो छोटे-छोटे धब्बे मिले. फेफड़ों में 'टार्डियू के धब्बे' (Tardieu's spots) दिखाई दिए, जो आमतौर पर दम घुटने की स्थिति से जुड़े होते हैं. दिमाग, फेफड़ों और पेट की परत में भी खून का जमाव (congestion) पाया गया.
यूटेरस का साइज बढ़ा मिलारिपोर्ट में यूटेरस का साइज बढ़ने की बात सामने आई. उसमें लाल-भूरे रंग के मुलायम टिशू मौजूद थे. इससे यह संकेत मिलता है कि गर्भनाल के कुछ टिशू (decidual tissue) अभी भी अंदर ही रह गए थे. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ट्विशा की मौत से एक हफ्ता पहले ही उनका गर्भपात (MTP) हुआ था. ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने दावा किया था कि प्रेग्नेंसी का पता चलने पर ट्विशा ने खुद गर्भपात कराया था.
मृतक के खून, विसरा, नाखून की कतरनें और बाल जैसे सैंपल सुरक्षित रखे गए हैं. उन्हें टॉक्सिकोलॉजी और DNA एनालिसिस के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया है, ताकि नशे की बात का पता चल सके और आगे की जांच में मदद मिल सके.
वीडियो: ट्विशा शर्मा केस में इतने सारे लूपहोल्स, CCTV फुटेज ने पूरा केस उलझा दिया




















