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डॉनल्ड ट्रंप ने एक काम तो सही किया, कारों का एक इरिटेटिंग फीचर बंद कर दिया

Auto Start-Stop: रेड लाइट या ट्रैफिक में फंसे रहने की स्थिति में जब इंजन खुद से बंद हो जाता है, तो इसे ऑटो स्टॉप-स्टार्ट कहते हैं. इसे idle start-stop भी कहा जाता है. ये सिस्टम कार इंजन को खुद से बंद और चालू कर देता है. मॉडर्न कारों के सबसे बेवकूफी भरे और सबसे परेशान करने वाले इस फीचर को ट्रंप ने हमेशा के लिए ऑफ कर दिया है.

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Auto Start-Stop पर परमानेंट स्टॉप

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दुनिया भर के कार लवर्स को वैलेंटाइंस डे का तोहफा दिया है. एकदम दिल जीतने वाला काम किया है मिस्टर ट्रंप ने. ना-ना, उन्होंने टैरिफ में कोई बदलाव नहीं किया है. बल्कि उन्होंने कारों के एक गैरजरूरी, मगर महा-भौकाली फीचर को बंद करने का आदेश दिया है. अमेरिकी कारों में अब Auto Start-Stop फीचर नहीं मिलेगा. मॉडर्न कारों के सबसे बेवकूफी भरे और सबसे परेशान करने वाले फीचर को ट्रंप ने हमेशा के लिए ऑफ कर दिया है. जब अमेरिका में यह फीचर नहीं मिलेगा तो फिर उम्मीद करते हैं कि इंडिया में भी ऐसा होगा.

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क्या है Auto Start-Stop फीचर?

रेड लाइट या ट्रैफिक में फंसे रहने की स्थिति में जब इंजन खुद से बंद हो जाता है, तो इसे ऑटो स्टॉप-स्टार्ट कहते हैं. इसे idle start-stop भी कहा जाता है. ये सिस्टम कार इंजन को खुद से बंद और चालू कर देता है. इसे ऐसे समझिए, आप ट्रैफिक में फंसे हुए हैं या रेड लाइट पर आपने कार रोकी है, तो ये फीचर अपने सेंसर से खुद समझ जाएगा कि अब पेट्रोल बचाने का समय है. फिर ये खुद से इंजन को बंद कर देगा. 

जब आप एक्सीलेटर पर पैर रखकर कार को स्पीड देंगे, तो ये इंजन को दोबारा से चालू कर देगा. इसका सिंबल A Off करके आपको कार में दिख जाएगा. ये सिस्टम ऑटोमेटिक और मैनुअल ट्रांसमिशन (गियरबॉक्स) दोनों में होता है.

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Auto Start-Stop
Auto Start-Stop 

सैद्धांतिक तौर पर इस फीचर के लिए कार में नॉर्मल बैटरी की जगह AGM या EFB जैसी महंगी बैटरी होनी चाहिए. इन बैटरी को डिजाइन ही बार-बार इंजन के बंद और शुरू होने की प्रक्रिया को झेलने के लिए किया गया है. लेकिन ऐसा करने पर कार की कीमत और बढ़ जाएगी, इसलिए कई कार कंपनियां एक छोटी बैटरी अलग से भी लगाकर देती हैं, ताकि असली बैटरी पर असर न पड़े. मगर लंबे इस्तेमाल के बाद यह भी ढंग से काम नहीं करती है.

ऑटो स्टॉप-स्टार्ट फीचर को लेकर कार कंपनियों का दावा है कि ये ईंधन की बचत करता है. पर्यावरण का भी ख्याल रखता है. क्योंकि कार के इंजन बंद करते ही पॉल्यूशन भी कम होगा. इस फीचर का जिक्र भी विज्ञापन में खूब होता है. बताने कि बात नहीं मगर बता देते हैं कि इसके लिए पैसा भी खूब लिया जाता है. लेकिन फीचर वाकई में काम का होता तो फिर ट्रंप इसे बंद करने को नहीं कहते. वैसे ट्रंप तो कुछ भी बंद करने को कह देते हैं, मगर इस बार वो सही कह रहे.

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इंजन देता है 'दोगुना लगान'

इंजन बंद होने पर, ऑयल का फ्लो पूरा बिगड़ जाता है. क्योंकि इंजन को रीस्टार्ट करने में तेल को वापस प्रेशर बनाने में थोड़ा समय लगता है. वहीं, टर्बो इंजन, कूलिंग के लिए निरंतर ऑयल फ्लो पर निर्भर रहता है. ऐसे में जब ये प्रोसेस बार-बार होता है, तो समय के साथ इंजन के कुछ पुर्जों का पर असर पड़ता है. यानी इंजन की परफॉर्मेंस एक समय पर अपना ‘बेस्ट ऑफ बेस्ट’ नहीं दे पाएगी. 

बता दें कि एक नॉर्मल कार अपने पूरी जीवन में लगभग 50 हजार बार इस प्रक्रिया से गुजर सकती है. मतलब इंजन के ऑफ और ऑन होने से. लेकिन ऑटोमेटिक स्टॉप-स्टार्ट में ये आंकड़ा तकरीबन दोगुना हो जाता है.

पेट्रोल से बचे, बैटरी में फुके

इंजन बार-बार स्टार्ट होने के लिए बैटरी से पावर लेता है और जब इंजन को बार-बार रीस्टार्ट होना पड़ता है, तो वो बैटरी से ताकत मांगता है. ऐसे में जब बैटरी बार-बार बंद और चालू होती है, तो उसकी लाइफ भी कम हो जाती है. बता दें कि बैटरी रिप्लेसमेंट काफी महंगा होता है. 

दोबारा चलने में नखरे

कार चल रही है या नहीं. ये देखकर ऑटो स्टॉप-स्टार्ट अपना काम करता है. मतलब कि पेट्रोल का पैसा वसूल. लेकिन कई बार ये फंक्शन, स्मूथली स्टार्ट नहीं होता है. यानी जब आप एक्सीलेटर पर पैर रखेंगे, तो इंजन को चालू होने में कुछ सेकंड का समय लगा सकता है. यानी कई बार आपको तुरंत स्पीड नहीं मिल सकती है. गाड़ी का इंजन जब स्टार्ट होता है, तो एक ‘इंजन पिन’ करके प्रोडक्ट होता है, वो भी खराब होता है.

AC बंद और बुरा हाल

ये फीचर जब इंजन बंद करता है, तो AC भी अपने आप बंद हो जाता है. क्योंकि AC चलने के लिए इंजन से पावर लेता है. ऐसे में जब इंजन बंद होता है, तो AC भी आराम करने लगता है. अगर आप रेड लाइट पर हैं और सिर्फ कुछ सेकंड ही रुकना है, तो कोई बात नहीं. पर अगर आप ट्रैफिक में फंस गए और बाहर आग के गोले बरस रहे हैं, तो आपका गर्मी में हाल-बेहाल होने वाला है.

दुख दर्द पीड़ा यहीं खत्म नहीं होती है. यह फीचर ज्यादातर कारों में चालू ही रहता है. हर बार कार चलाने से पहले इसको मैनुअली ऑफ करना पड़ता है. उम्मीद है कि मिस्टर प्रेसीडेंट के इस फैसले के बाद ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.  

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