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तोंद की चर्बी सॉफ्ट या टाइट होने का क्या मतलब है? कौन ज्यादा नुकसानदेह है?

डॉक्टर से जानेंगे कि पेट की सख्त और नरम चर्बी में क्या फर्क होता है. सख्त बेली होना ज़्यादा नुकसानदेह है या सॉफ्ट बेली. साथ ही पता करेंगे, पेट से चर्बी कम करने के तरीके.

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अपने पेट की चर्बी दबाकर देखिए

अगर आपकी तोंद है, तो ज़रा एक काम करिए. अपनी तोंद को थोड़ा दबाकर देखिए या चुटकी काटकर देखिए. क्या चर्बी दब रही है? स्किन हाथ में आ रही है? अगर हां, तो इसे कहते हैं सॉफ्ट बेली. वहीं, अगर तोंद दबाने में बहुत सख्त महसूस हो रही है, तो इसे हार्ड बेली कहते हैं. किसी की तोंद सख्त, तो किसी की नरम क्यों महसूस होती है, इसके पीछे एक वजह है. ये वजह आपकी सेहत के कई राज़ खोलती है.

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डॉक्टर से जानेंगे कि पेट की सख्त और नरम चर्बी में क्या फर्क होता है. सख्त बेली होना ज़्यादा नुकसानदेह है या सॉफ्ट बेली. साथ ही पता करेंगे, पेट से चर्बी कम करने के तरीके.

पेट की सख्त और नरम चर्बी में क्या फर्क होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर भूषण भोले ने. 

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डॉ. भूषण भोले, सीनियर कंसल्टेंट, जीआई सर्जरी एंड लिवर ट्रांसप्लांट, पीएसआरआई हॉस्पिटल

पेट पर अगर सख्त चर्बी है, तो इसे हार्ड बेली कहते हैं. अगर नरम चर्बी है, तो इसे सॉफ्ट बेली कहते हैं. जब चर्बी स्किन के नीचे जमा हो जाती है, तो उसे सबक्यूटेनियस फैट कहते हैं. ऐसा सॉफ्ट बेली में होता है. यानी पेट की चर्बी छूने पर नरम महसूस होती है. चुटकी काटने पर स्किन हाथ में आती है. 

हार्ड बेली यानी सख्त चर्बी. सख्त चर्बी पेट के अंदर जमा होती है. आमतौर पर लिवर, पैंक्रियास और किडनी जैसे अंगों के ऊपर चर्बी की एक परत होती है. जो गर्मी से इन अंगों को बचाती है. शरीर का तापमान बनाए रखने में भी काम आती है. लेकिन जब ये चर्बी यानी विसरल फैट बढ़ जाता है, तो बेली सख्त हो जाती है. 

सख्त बेली के नुकसान

विसरल फैट बढ़ने से शरीर में हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ जाता है. इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है. जिसके कारण डायबिटीज़, फैटी लिवर, दिल की बीमारियां और मोटापा हो सकता है.

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विसरल फैट घटाना है तो रोज़ एक्सरसाइज़ ज़रूर करें (फोटो: Freepik)

विसरल फैट बढ़ने से कैसे रोकें?

सबसे ज़रूरी है वज़न घटाना. वज़न घटाने के लिए कार्डियो करना चाहिए. दिनभर में 30 मिनट से एक घंटा तेज़ कदमों से चलें या जॉगिंग करें. इसके अलावा, लाइफस्टाइल में बदलाव करना ज़रूरी है. फ्राइड खाना, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए. विसरल फैट के घटने से दिल की बीमारियों, डायबिटीज़, ओबेसिटी और फैटी लिवर से आराम मिल सकता है.

पेट की नरम चर्बी इतनी हानिकारक नहीं होती. लेकिन सख्त चर्बी यानी विसरल फैट बढ़ गया, तो उसके कारण मोटापा बढ़ता है. कई सारी बीमारियां बढ़ती हैं. इन बीमारियों से बचना है तो लाइफस्टाइल बदलना पड़ेगा. इसके लिए बैलेंस्ड डाइट लें. एक्सरसाइज़ करें. इससे वज़न कंट्रोल में रहेगा.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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