The Lallantop

बांग्लादेश चुनावः पूर्वोत्तर को भारत से काटने की धमकी देने वाले हसनत अब्दुल्ला जीते या हारे?

भारत से ‘सेवन सिस्टर्स’ को अलग-थलग कर देने की धमकी देने वाले बांग्लादेश के नेता हसनत अब्दुल्ला चुनाव जीत गए हैं. शेख हसीना सरकार के कट्टर आलोचक माने जाने वाले अब्दुल्ला ने कोमिला-4 संसदीय इलाके से जीत हासिल की है.

Advertisement
post-main-image
हसनत अब्दुल्ला चुनाव जीत गए हैं. (Photo: X)

बांग्लादेश में आम चुनाव के नतीजे आ गए हैं. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार बननी तय मानी जा रही है. इस बीच खबर है कि शेख हसीना विरोधी छात्र आंदोलन के नेता हसनत अब्दुल्ला भी चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने भारत से ‘सेवन सिस्टर्स’ राज्यों को काटने की धमकी दी थी. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

भारत के पूर्वोत्तर इलाके के 7 राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा को ‘सेवन सिस्टर्स’ कहा जाता है. अब्दुल्ला ने दिसंबर 2024 में धमकी दी थी कि अगर बांग्लादेश को अस्थिर किया गया तो वह ऐसे अलगाववादी तत्वों को अपने यहां शरण देगा जो भारत के इन 7 राज्यों को उसकी जमीन से काट देंगे. 

वही हसनत अब्दुल्ला कोमिला-4 सीट से चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने जिस उम्मीदवार को हराया है, उसने उन पर चुनाव में धांधली के आरोप लगाए हैं. 

Advertisement

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल्ला ने नेशनल सिटिजन पार्टी से चुनाव जीता है, जो बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलीय गठबंधन का हिस्सा है. उन्हें 1 लाख 60 हजार से ज्यादा वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी समर्थित उम्मीदवार जसीमुद्दीन को 49 हजार वोट मिले. अब्दुल्ला की जीत का अंतर 1 लाख 10 हजार वोटों का रहा. हारे हुए प्रत्याशी जशीमुद्दीन ने दावा किया कि चुनाव में धांधली हुई है. उन्होंने नतीजों का विरोध करते हुए चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है. 

जशीमुद्दीन ने मतदान खत्म होने के बाद गुरुवार, 12 फरवरी की शाम करीब 5 बजे फेसबुक लाइव के जरिए ये घोषणा की. अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मतदान एजेंटों को कई बूथों में प्रवेश करने से रोका गया. उन्हें बाहर कर दिया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि वोटर्स को अपना वोट डालने से रोका गया और उन पर एक खास चुनाव चिह्न पर मुहर लगाने का दबाव डाला गया. जशीमुद्दीन ने इसे एक ‘हास्यास्पद चुनाव’ बताया और कहा कि वह ऐसे चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं.

कौन है हसनत अब्दुल्ला?

हसनत अब्दुल्ला बांग्लादेश की ‘नवजात’ नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता हैं, जिसे शेख हसीना के खिलाफ प्रोटेस्ट करने वाले मोर्चे ने बनाया था. अब्दुल्ला दक्षिणी इलाके में पार्टी की कमान संभालते हैं. इससे पहले वह ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ नाम के संगठन के पूर्व संयोजक रहे हैं जिसने जुलाई 2024 में शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया था. इस आंदोलन के बाद शेख हसीना की सत्ता चली गई और उन्हें अपने देश से भागकर भारत में शरण लेनी पड़ी थी.

Advertisement

इसके बाद 28 फरवरी 2025 को बांग्लादेश में एक नई पार्टी बनी, जिसका नाम नेशनल सिटिजन पार्टी रखा गया. इस पार्टी को बनाने वाले ही लोग थे, जिन्होंने सरकार विरोधी प्रदर्शन किए थे. हसनत अब्दुल्ला इसी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और फिलहाल, पार्टी के सदर्न चीफ ऑर्गेनाइजर भी हैं. 

हसनत अब्दुल्ला शेख हसीना के तो कट्टर आलोचक हैं ही, भारत को लेकर भी उनका रुख हमेशा तीखा रहे है. कई मौकों पर उन्होंने भारत की नीतियों और उसकी क्षेत्रीय अखंडता पर जुबानी हमला किया है. वह पहली बार 2024 में भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान देकर चर्चा में आए थे.

ढाका में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने धमकी दी थी कि बांग्लादेश को अस्थिर किया गया तो वह ऐसे लोगों को अपने यहां शरण देगा जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को अलग-थलग कर देंगे. उनके इस भाषण के वीडियो भारत में भी खूब वायरल हुए थे. 

इतना ही नहीं, दिसंबर 2024 में बांग्लादेश के मुक्ति दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बधाई संदेश की भी अब्दुल्ला ने आलोचना की थी. इसे लेकर उन्होंने कहा था कि ये बांग्लादेश का मुक्ति युद्ध था, जिसे पाकिस्तान से बांग्लादेश की आजादी के लिए लड़ा गया था. उन्होंने आगे कहा था कि पीएम मोदी का दावा है कि यह पूरी तरह से भारत का युद्ध और उसी की उपलब्धि थी. ऐसा करके उन्होंने बांग्लादेश के अस्तित्व को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है. 

ये बातें अब्दुल्ला ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए कही थीं. 

हसनत अब्दुल्ला बांग्लादेश में इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वालों में भी शामिल रहे हैं. उन्होंने जेल में बंद हिंदू भिक्षु चिन्मोय कृष्ण दास प्रभु को फांसी देने की मांग की थी.

वीडियो: बांग्लादेश में चुनाव जीतने वाले तारिक रहमान से पीएम मोदी, शाहबाज़ शरीफ ने क्या कहा?

Advertisement