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टूटी हुई कुर्सियों की ये तस्वीर हालिया बिहार विधानसभा चुनाव की नहीं है, सच जान लें

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल है. तस्वीर एनडीए के एक जनसभा की है जहां जमीन पर कई सारी टूटी कुर्सियां पड़ी हुई हैं. मंच पर लगे पोस्टर में बीजेपी और जदयू नेताओं की तस्वीर दिखाई दे रही है. तस्वीर को हालिया चल रहे बिहार विधानसभा चुनाव का बताया जा रहा है.

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chairs broken in nda rally bihar elections 2025 viral image edited

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल है. तस्वीर एनडीए के एक जनसभा की है जहां जमीन पर कई सारी टूटी कुर्सियां पड़ी हुई हैं. मंच पर लगे पोस्टर में बीजेपी और जदयू नेताओं की तस्वीर दिखाई दे रही है. तस्वीर को हालिया चल रहे बिहार विधानसभा चुनाव का बताया जा रहा है. इसे शेयर करके कहने की कोशिश हो रही कि चुनाव में एनडीए की हालत खराब है. और जनता इनके नेताओं से नाराज़ हैं.

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सुनिल कांग्रेस समर्थक नाम के एक यूज़र ने वायरल पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “बिहार चुनाव के रुझान तो आ गए हैं मगर चुनाव आयोग के आशीर्वाद से नतीजा कुछ और ही आयेगा शायद.”

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सुनिल कांग्रेस समर्थक की वायरल पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इसी तरह के दावे कई अन्य यूजर्स ने भी किए हैं जिनके पोस्ट आप यहां देख सकते हैं.

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पड़ताल

क्या है तस्वीर की सच्चाई? ये पता लगाने के लिए हमने तस्वीर को रिवर्स सर्च किया. RunniSaidpur नाम के फेसबुक पेज पर हमें ये तस्वीर मिली. तस्वीर 26 अक्टूबर, 2020 में अपलोड की गई थी. कैप्शन में लिखा है, “नीतीश कुमार का प्रचार करने आए निरहुआ का बिहार मे इस प्रकार हुआ स्वागत. बांका जिला के बेलहर मे जदयू प्रत्याशी मनोज यादव के चुनाव प्रचार करने आए निरहुआ के जनसभा की तस्वीर!”

पांच साल पुरानी पोस्ट का स्क्रीनशॉट
पांच साल पुरानी पोस्ट का स्क्रीनशॉट

वायरल तस्वीर में मंच पर लगे पोस्टर में निरहुआ और एनडीए कैंडिडेट मनोज यादव भी नज़र भी आ रहे हैं.

हमें कीवर्ड सर्च करने पर ईटीवी भारत की वेबसाइट पर अक्टूबर, 2020 में छपी रिपोर्ट मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, दिनेश लाल निरहुआ ने बेलहर विधानसभा के एनडीए कैंडिडेट मनोज यादव के समर्थन में चुनाव प्रचार किया था.  हालांकि, रिपोर्ट में ये कहीं नहीं लिखा है कि किसने और क्यों कुर्सियां तोड़ी. लेकिन इतना तय है कि ये हालिया विधानसभा चुनाव का नहीं है.

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ईटीवी न्यूज का स्क्रीनशॉट
ईटीवी न्यूज का स्क्रीनशॉट
नतीजा

कुल मिलाकर, हमारी पड़ताल में साफ है कि 5 साल पुरानी तस्वीर को शेयर करके भ्रम फैलाया जा रहा है. 
 

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