फिल्म रिव्यू: कश्मीर के आधी बेवाओं और आधे यतीम बच्चों की कहानी कहती है 'नो फादर्स इन कश्मीर'
बेहद संवेदनशील तरीके से कश्मीरियों की जिंदगी दिखाती है ये फिल्म.
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कश्मीर में आपका स्वागत है. दुनिया का वो हिस्सा जो क्या चुने इस कन्फ्यूजन से दशकों से जूझ रहा है. और इससे उपजे कंफ्लिक्ट की मार से लहूलुहान है. कश्मीर संघर्ष के हमेशा-हमेशा दो वर्जन रहे हैं. शेष भारत के लिए जो आतंकी हैं, वो वहां मिलिटेंट हैं. कश्मीरियों की नज़र में जो संघर्षरत जनता है, वो यहां स्टोन पेल्टर्स हैं. सिक्के के इन दो परस्पर विरोधी पहलूओं ने जन्नत जैसी वादी को जहन्नुम बनाके छोड़ा है. ‘नो फादर्स इन कश्मीर’ इसी जन्नत कम जहन्नुम के एक बेहद डिस्टर्बिंग पहलू पर बात करती है.
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