खटारा साइकिल में पैडल मारे लोग इस कुत्ते को अच्छे से पहचानते होंगे. अमा घबराओ मत. हम किसी को गरिया नहीं रहे. कुत्ता साइकिल का बहुत खास पार्ट होता है. बहुत जरूरी टूल. जो अगर काम करना बंद कर दे तो साइकिल चलाने वाले के पसीने छूट जाते हैं. ये पिछले पहिए की फ्री व्हील के अंदर घुसा बैठा रहता है. फ्री व्हील को फिरी कहो ज्यादा मजा आएगा. इस चीज को कुत्ता कहते हैं. ये कुत्ता मर जाए तो फिरी फेल हो जाती है. फिर हर फर हर फर पैडल मारो साइकिलिया आगे बढ़ती ही नहीं. जो इस कुत्ते को नहीं पहचानते वो नीचे लगा फोटू देखें.
अब मुद्दे पर आओ. समाजवादी पार्टी की साइकिल का कुत्ता मर गया है. आगे बढ़ने में घनी आनाकानी कर रही है. खुद पार्टी के लोग इसको भंगार बना दिए हैं. टीपू भैया ने चचा सिउपाल को जो टिंचर दिया है लास्ट मोमेंट पर ना, दुनिया याद करेगी. अब तक अखिलेश को पापा और ढेर चाचा के हाथ की कठपुतली कहा जाता था. लेकिन इधर खेला बदल गया है. बाजी पलट गई है गुरू. लेकिन पार्टी और साइकिल पूरे परिवार की अमानत है. साइकिल भले कबाड़ हो गई हो लेकिन हमाई फैमिलीज में जो ट्रेंड चलता आया है वो तो चलेगा ही. हर चीज बरब्बर बटेगी. धान धरने वाली बखारी भी कट के बटती है. भैंसिया कट के नहीं बंट सकती तो उसका आधा पइसा अगले को देना रहिता है. इसमें कोई किच किच नहीं. मगर इस पार्टी के साथ दिक्कत ये है कि कुनबा बड़ा है. साइकिल कित्ते हिस्सों में बंटेगी ये सोचकर ही उसका टायर फटा जा रहा है. सवाल ये है कि किसके हाथ कौन सा हिस्सा आएगा. अपनी क्यूरियॉसिटी को गुलगुला तकिया लगाओ और पढ़ जाओ.
टीपू को बेस पसंद है
हमारे गांव में एक पट्टे परधान थे. उनको साइकिल पसंद थी चलाने के मामले में. बहुत सफर किए उससे. टायर ट्यूब का नाम लेने में उनको काफी दिक्कत होती थी. शॉर्ट में दोनों को मिलाकर टैटू कहते थे. पहिए के बिना साइकिल न चल सकती है न खड़ी हो सकती है. इसको टीपू भैया अपने अंडर में रखेंगे. टायर ट्यूब के साथ अच्छा ये रहता है कि इसको दूसरी साइकिल में डाल दो तो सनसना के चलने लगती है. टायर ट्यूब हमेशा युवा रहता है. जैसे ही घिस जाए लोग उसको निकालकर झूले डाल देते हैं. इसलिए टायर ट्यूब अखिलेश के पास रहेगा. क्योंकि वो निकालने में माहिर हैं. अभी सिउपाल चचा को निकाल दिया न.नेताजी फेल हैं तो वही लेंगे
फिरी फेल होती है न भैया जी. साइकिल में जो हाल फेल फिरी का होता है वही हाल पार्टी में नेताजी का हुआ. वो फेल हो गए. भाइयों को समझा नहीं पाए कि अपना सीएम दूध पीता बच्चा नहीं है. अपना फायदा कुछ देर के लिए झोले में बांधकर टांग दो. उसे चीफ मिनिस्टरी कर लेने दो. न बेटे को समझा पाए कि भैया सबसे बनाके चलना पड़ता है. अइसे खुट खुट करके पार्टी थोड़ी न चलती है. तो सिर्फ फिरी लेंगे मुलायम जो फेल होती रहेगी.चचा आजम के हाथ आएगी घंटी
हाथ नहीं आएगी वो हाथ बढ़ाकर घंटी ही उठाएंगे. उनको पार्टी में सिर्फ बजते रहने के लिए रखा गया है. कोई न कोई ऊल जलूल बयान देकर खबरों में रहते हैं. इसलिए वो घंटी बजाने के लिए परफेक्ट रहेंगे. उनको अपनी प्रतिभा का ज्ञान है. इसलिए वो कुछ और नहीं उठाएंगे.
चचा सिउपाल अब चैन से रहेंगे
सूत्र बताते हैं कि चचा मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. इसलिए बार बार साइकिल चलने में मुसीबत खड़ी करते रहते थे. साइकिल का चेन फेंकना ऐसी बीमारी है जिसको कोई सीरियसली नहीं लेता जब तक एक किलोमीटर में 15 बार साइकिल चेन न फेंके. उतरती है, साइकिल सवार चढ़ाकर फिर चला लेता है. लेकिन चेन साइकिल को चैन से चलने नहीं देती. चचा सिउपाल फिर वही चेन ले लेंगे ताकि साइकिल को चलते में धोखा दे सकें.रामगोपाल चचा गद्दी संभालेंगे
कनफ्यूजन में न रहो. राजगद्दी नहीं गद्दी की बात किए हैं. माने सीट. जो निकाल दो तो उस जगह बैठना काफी खतरनाक होता है. रामगोपाल चचा वही सीट लेंगे. जैसे भाई भतीजा लोग कुछ गड़बड़ करते दिखेंगे, ये सीट निकाल लेंगे. और पूरी पार्टी उछल जाएगी.डिंपल यादव के हाथ रहेगी बागडोर
नेताजी के साथ ये है कि वो तमाम यूपी के बापों की तरह ये नहीं कहते कि "बेटे की कोई गलती नहीं, बहू ने बिगाड़ रखा है." इसका मतलब समझे दया? अखिलेश जिस बेस अर्थात टायर ट्यूब को जोड़कर साइकिल बनाएंगे उसका हैंडल थामेंगी डिंपल. उनकी एकाग्रता आपने इस फोटो में देखी होगी. साइकिल चलाने में भी इसी एकाग्रता की दरकार होती है.
छुच्छी ले लेंगे मुख्तार अंसारी
अब वो कौमी एकता दल समेत समाजवादी हो गए हैं. हालांकि बहुत छोटा हिस्सा हैं. वॉल बॉडी जितने. लेकिन साइकिल बिना छुच्छी के तो चलती नहीं. इसलिए वो पहियों में हवा भरने वाली छुच्छी लेंगे. हवा ज्यादा भरने से टायर दग जाएगा. संभाल के रखें नेताजी.
अमर सिंह तो बाहरी हैं
वो पंचर वाला कांटा लेंगे. ये भी बाहरी चीज है. लेकिन साइकिल से इसका कनेक्शन बहुत तगड़ा है. साइकिल की जिंदगी बरबाद करने में पंचर वाले कांटे का खास हाथ होता है. पार्टी की साइकिल की हवा निकालने वाला कांटा लेने से बड़ा सौभाग्य क्या होगा अमर सिंह के लिए. जमाना इतना आगे बढ़ गया है कि लिस्टिकल वाली वेबसाइट भी हेडलाइन लगाती हैं "यादव परिवार टूटा, जानिए अमर सिंह के बारे में 10 बातें." तो पंचर वाला कांटे से कम कुछ न लेंगे अमर सिंह. ये भी पढ़ें: नेताजी आपकी पार्टी है, पर मेरा भी तो करियर है: रोते हुए बोले अखिलेश यादव










