The Lallantop

अनुराग कश्यप ने शाहरुख के साथ पांच फिल्में बनाई हैं, जो आपने नहीं देखीं!

शाहरुख के साथ फिल्म बनाने का अनुराग का सपना पूरा हो गया है.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
मु्क्काबाज की बड़ी तारीफ हो रही है. अनुराग कश्यप फिर मजेदार फिल्म लेकर आए हैं. अपने साथ ढेर सारी बातें भी, जो हमने आपको दिखाई हैं. वो शाहरुख खान का नाम सुनते ही इमोशनल हो पड़ते हैं. ऐसा मीडिया रिपोर्ट्स में आया है. हम तब तक नहीं मानेंगे जब तक उनको अपने मुंह से कहते सुन न लें. ये भी कहा जा रहा है कि उनको कभी न कभी शाहरुख खान के साथ काम करना है. वो दिन जब आएगा तो हम हाथ में अक्षत फूल लेकर, कुश पवित्री पहन के फिल्म देखेंगे. लेकिन शाहरुख की अच्छी फिल्मों का डायरेक्शन अगर अनुराग ने किया होता तो ये बनकर आता.

शव देस

अमेरिका से आए फोरेंसिक एक्सपर्ट से अनजाने में हो जाता है कत्ल
अमेरिका से आए फोरेंसिक एक्सपर्ट से अनजाने में हो जाता है कत्ल

मुख्य कलाकार- शाहरुख खान, गायत्री जोशी, किशोरी बल्ला निर्देशक- अनुराग कश्यप
कहानी- फिल्म की कहानी एक एनआरआई मोहन(शाहरुख) के इर्द गिर्द घूमती है. वो अमेरिका में बहुत बड़ा फोरेंसिक एक्सपर्ट रहता है. वो भारत आता है अपनी बची हुई प्रॉपर्टी ठिकाने लगाने. यहां उससे कावेरी अम्मा का मर्डर हो जाता है. वो फोरेंसिक एक्सपर्ट होने की वजह से सारे सुबूत मिटा देता है. लाश को रसोई में चूल्हे के नीचे गाड़ देता है. यहां उसका प्रॉपर्टी बेचने का प्लान फंस जाता है. वो जानता है कि अगर किसी को बेचा तो वो पूरा घर गिरवाकर फिर से बनवाएगा. इसके लिए मोहन को ऐसा कस्टमर चाहिए जिसके पास जमीन खरीदने के बाद घर बनवाने का पैसा न बचे. इसी जुगाड़ में वो कोड़ी गांव जाता है. वहां हरिदास मिलता है. हरिदास की औकात इस समय तमाखू मांगकर खाने की रह गई है. मोहन उसकी कनपटी पर कट्टा लगाकर अपनी प्रॉपर्टी उसके नाम कर देता है. इस शर्त पर कि उसके पास जैसे जैसे पैसा आता जाएगा, वो मोहन के पेटीएम में ट्रांसफर करता जाएगा. इस तरह वो सारी उम्र सिर्फ घर के दाम चुकाएगा, कभी बनवा नहीं पाएगा. (होने को ये कहानी और लंबी हो सकती थी लेकिन अभी चार फिल्में और हैं.)
फेमस सीन- जब मोहन हरिदास के घर में बैठ के रोटियां तोड़ रहा होता है तभी हरिदास बताता है कि पहले वो कॉन्ट्रैक्ट किलर का काम करता था. लेकिन एक मर्डर के बाद उसे पेमेंट में 1000 के नोट मिले. अगले ही दिन नोटबंदी हो गया और उसका पैसा कचरा हो गया. फिर वो घर में बैठ के टाइम किल करने लगा. और कुछ करने को था नहीं तो घर के बर्तन बेचकर दारू पी गया. इसी वजह से आज उसके पास खाने को पैसे नहीं हैं. उस वक्त शाहरुख का गुस्से से लाल हुआ चेहरा देखने लायक है.

कतल हो न हो

अमन कॉन्ट्रैक्ट किलर है और अपनी उम्र से ज्यादा मर्डर किए हैं
अमन कॉन्ट्रैक्ट किलर है और अपनी उम्र से ज्यादा मर्डर किए हैं

मुख्य कलाकार- शाहरुख खान, प्रीति जिंटा, सिर्फ अली खान निर्देशक- अनुराग कश्यप
कहानी- अमन माथुर(शाहरुख) एक कॉन्ट्रैक्ट किलर है. उसने अपनी उम्र से ज्यादा मर्डर किए हुए हैं. इतने मर्डर करने के बाद उसे मर्डर करने की बीमारी हो जाती है. उसके तरीके बड़े खतरनाक हैं. वो पहले अपने शिकार के करीब आता है. उसके लिए मार्केट से सब्जी लाता है. शिकार के फ्लैट में जाकर चाय पिलाता है. फिर एक दिन चाय में साइनाइड मिला देता है. शिकार झाग छोड़ते हुए हाथ पैर पटक पटक कर जान दे देता है. कई बार जो झोला वो बाजार से सब्जी लाने के लिए इस्तेमाल करता है, उसी में किंग कोबरा भर के शिकार का मुंह झोले में बंद कर देता है. लेकिन उसका फेवरेट तरीका तो सब्जी लाने के बाद वाला होता है. सब्जी काटने के बाद उसी चाकू से खच खच करके शिकार को काट देता है. फिल्म में अमन एक बुढ़िया(जया) के बगल में फ्लैट लेकर रहने आता है. उसका शिकार बुढ़िया की बेटी नैना(प्रीति जिंटा) है. लेकिन उसका कत्ल करने के लिए अमन को कई लोगों को ठिकाने लगाना पड़ता है. सबसे पहले वो बूढ़ी जेनिफर के रेस्टोरेंट जाता है. वहां गल्ले पर बैठे आदमी से झगड़ा करता है. फिर वहीं रखे फोर्क(त्रिशूल वाला चम्मच) उठाकर उसकी आंख में पेल देता है. आंख लप्प से बाहर आ जाती है. सारे कस्टमर सिर पर पैर रखकर भाग जाते हैं. इस तरह जेनिफर बरबाद हो जाती है लेकिन अमन का टारगेट को उसे बरबाद करना नहीं, उसकी बेटी को खतम करना है. पूरी फिल्म इसी कॉनफ्लिक्ट पर है कि उसका 'कतल हो कि न हो.'
फेमस सीन- वो जब नैना फूल लेकर अमन के घर आती है. लाल गुलाब देखकर अमन का मूड मर्डर करने का बन ही रहा होता है कि बाहर बारिश होने लगती है. नैना छत पर कपड़े फैले होने का बहाना करके भाग जाती है. लेकिन अमन का मूड तो बन चुका होता है. इसलिए वो अपने ही घर

किसने बना दी हथोड़ी

इस लव स्टोरी में लड़का-लड़की सीरियल किलर हैं
इस लव स्टोरी में लड़का-लड़की सीरियल किलर हैं

मुख्य कलाकार- शाहरुख खान, अनुष्का शर्मा निर्देशक- अनुराग कश्यप
कहानी- लव स्टोरी है साफ सुथरी. इसमें लड़का-लड़की दोनों सीरियल किलर हैं. दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन तानी(अनुष्का) को सुरिंदर(शाहरुख) के मर्डर करने का स्टाइल पसंद नहीं है. तानी का तरीका बहुत साफ सुथरा है. लैपटॉप की केबल से गला घोंटना उसका फेवरेट है. क्योंकि इसमें कोई खून खच्चर नहीं होता. लेकिन सुरिंदर को हथोड़ी से सिर पर मार मारकर जान लेने की आदत है. जिसकी वजह से कई लीटर खून फर्श पर फैल जाता है. कई बार जहां सुबूत मिटाने की रिक्वायरमेंट होती है वहां ब्लड साफ करने में तीन से चार घंटे लग जाते हैं. तानी का सवाल यही है- किसने बना दी हथोड़ी. सुरिंदर को ये बात पता लगती है तो वो एक प्रोफेशनल किलर बॉबी(विनय पाठक) से ट्रेनिंग लेने जाता है. वहां रुमाल से गला घोंटने, जहर का इंजेक्शन देने जैसे साफ सुथरे तरीके सीखता है. फिर एक दिन वो तानी के सामने अपने शिकार का गला चमड़े की बेल्ट से दबा रहा होता है, शिकार की आंखें और जीभ बाहर होती हैं लेकिन तानी को अच्छा नहीं लगता. उसे लगता है कि सुरिंदर का ओरिजनल तरीका ही हॉट था. उसे सॉफिस्टिकेटेड सुरिंदर पसंद नहीं आता. वो उसकी हथोड़ी वापस लाकर देती है और वादा लेती है कि अब वो हथोड़ी से ही मर्डर करेगा.
फेमस सीन- जब सुरिंदर बॉबी के पास जाकर अपनी राम कहानी सुनाता है. दोनों दारू के नशे में टुन्न हो जाते हैं. बॉबी उसे एकदम सफाई से मर्डर करने वाला दांव सिखाता है. कि शिकार के बैठने से पहले सोफे पर एक इंजेक्शन इंस्टॉल करना है. जिसके अंदर ब्लैक माम्बा का जहर रहेगा. सुरिंदर वहीं बॉबी की खोली पर ये ट्राई करता है. लेकिन शराब के नशे में सोफे पर बॉबी को ही धक्का दे देता है. इस तरह सबको मारने वाला बॉबी खुद मारा जाता है.

ठोंक दे

देशभक्त हॉकी कोच कबीर खान विरोधी टीम के खिलाड़ियों का गेम बजाता है
देशभक्त हॉकी कोच कबीर खान विरोधी टीम के खिलाड़ियों का गेम बजाता है

मुख्य कलाकार- शाहरुख खान और 16 लोग. हां पता है फील्ड पर 11 खिलाड़ी ही होते हैं. निर्देशक- अनुराग कश्यप
कहानी- कबीर खान(शाहरुख) एक देशभक्त हॉकी कोच है. लेकिन उसके खेल का तरीका एकदम अलग है. वो हॉकी के लिए ऐसी तैयारी कराता है जिसकी जानकारी दुनिया में किसी को नहीं है. वो दरअसल प्लेयर्स को गोल करना नहीं, विरोधी टीम के खिलाड़ी को गोली मारना सिखाता है. अपने देश को जिताने का उसका यही प्लान है. उसके प्लेयर्स की हर हॉकी स्टिक में गन होती है. उस गन से जो गोली निकलती है वो सबसे कामयाब खिलाड़ी को निशाना बनाती है. उधर माथे के बीच में टक्क से गोली लगती है. बाकी प्लेयर्स शोर मचाते हुए भगदड़ कर देते हैं. जिसकी वजह से कभी पता नहीं लगता कि गोली कहां से लगी, कैसे लगी. कबीर खान खुद बहुत बड़ा निसांची है. वो हॉकी के खेल में एक बार हार गया था तो उसने हॉकी स्टिक का खेल ही बदल दिया. वो तमाम नेशनल टीम्स के बेहतरीन प्लेयर्स को टपका डालता है. इस तरह फिल्म के क्लाइमेक्स में वो अपनी टीम को जीत दिलाने में कामयाब होता है. लेकिन लास्ट में वो पकड़ जाता है. फिर पता चलता है कि वो तो पाकिस्तानी एजेंट था. सिर्फ भारत को बदनाम करने के लिए कोच बना था. इन मर्डर्स के बाद इंडिया की टीम ब्लैक लिस्ट हो जानी थी. लेकिन इस किलर के पकड़े जाने की वजह से पाकिस्तान का सपना टूट जाता है. फेमस सीन- जब इंडियन वीमेन हॉकी टीम के कोच के तौर पर कबीर खान ज्वाइन करता है. वहां होता है सारे प्लेयर्स का इंट्रोडक्शन. वहां कबीर खान सारे प्लेयर्स से पूछता है कि विरोधी टीम को कैसे हराना है? कोई बताती है कि गोल करके, कोई बताती है कि ब्लॉक करके, कोई बताती है दौड़ाकर. कोच सबको निकाल बाहर करता है. इस चोंचले से इरीटेट एक विद्या नाम की प्लेयर अपनी हॉकी स्टिक से वहीं मैदान में झाड़ू मार रहे आदमी का पीट पीटकर मर्डर कर देती है. कबीर खान चट से उसे टीम में ले लेता है.

मिल वाले दुकनिया ले जाएंगे

झारखंड के एक मोटर मेकेनिक की कहानी
झारखंड के एक मोटर मेकेनिक की कहानी

मुख्य कलाकार- शाहरुख खान, काजोल, अमरीश पुरी निर्देशक- अनुराग कश्यप
कहानी- इस फिल्म की कहानी झारखंड की पृष्ठभूमि पर है. ई त नमवै से लउक रहा है. राज मल्होत्रा(शाहरुख) और सिमरन(काजोल) धनबाद में रहते हैं. सिमरन के पापा बलदेव(अमरीश पुरी) कोयला खदान में बाबू हैं. राज मल्होत्रा की धनबाद में ही मोटर साइकिल स्पेयर पार्ट्स की दुकान है. एक दिन एक बाइक रिपेयर करके राज उसकी टेस्टिंग करने फर्राटे से रोड पर निकलता है. कस्टमर का पेट्रोल ज्यादा फूंकने की नीयत से कोयला खदानों तक निकल जाता है. जिस कोयला खदान में सिमरन के पापा बाबू हैं, वहां एक मजदूर से उसकी लड़ाई हो जाती है. राज उस मजदूर को मार रिंच-मार पाना जान ले लेता है. बलदेव सिंह राज को फावड़ा लेकर दौड़ा लेता है, लेकिन पकड़ नहीं पाता. सिमरन को राज की ये अदा अंदर तक काट देती है. वो फैसला करती है कि शादी करेगी तो इसी मोटर मिस्त्री से, वरना नहीं करेगी. लेकिन बलदेव की आंख में वो रिंच पाने वाला खिलाड़ी चुभ गया है. उसे धनबाद से हटाने के लिए बलदेव रांची के नामी बिजनेसमैन को अपने घर बुलाता है. उसे धनबाद का वो एरिया दिखाता है जहां राज की स्पेयर पार्ट्स की दुकान है. और उसे वहां बड़ी सी सरिया मिल लगाने का ऑफर देता है. लोहा पिघलाने के लिए जितने कोयले की जरूरत होगी, वो बलदेव की खान से आएगा. सस्ते में. बिजनेसमैन मान जाता है और बड़ी सी जेसीबी मशीन लाकर वहां की सारी दुकानें साफ कर देता है. वो स्पेयर पार्ट्स वाली भी. राज का बाप(अनुपम खेर) जेसीबी के आगे लेट जाता है तो मशीन वाला उसे काटकर दो टुकड़े कर देता है. ये सब देखते हुए बलदेव सिंह राज को चिढ़ाता है "मिल वाले दुकनिया ले जाएंगे." फेमस सीन- इस फिल्म का क्लाइमेक्स सबसे खास है. जिसमें बलदेव सिंह सिमरन का हाथ पकड़कर जेसीबी की तरफ धकेलता है और कहता है "जा सिमरन जा, सीख ले फिरी में मशीन चलाना."


ये भी पढ़ें:

क्या अनुराग कश्यप खुद श्रवण सिंह उर्फ़ मुक्काबाज़ हैं?

Advertisement

जिस 'मुक्काबाज़' को अनुराग की वापसी वाली फिल्म बताया गया, उसने कितना कमाया

मुक्काबाज़ के ऐक्टर विनीत सिंह ने इस इंटरव्यू में अपनी पूरी ज़िन्दगी उघाड़ कर रख दी

Advertisement
Advertisement