तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं ब्राज़ील के प्रेज़िडेंट जेर बोल्सनारो. (फाइल फोटो- Business Today)
कोरोना वायरस से निपटने के लिए दुनिया के तमाम देश एक कॉमन तरीका अपना रहे हैं- लॉकडाउन. इसमें भारत भी शामिल है. लेकिन कुछ देश नए-नए तरीके लेकर आ रहे हैं, इनमें से ज़्यादातर कुछ ख़ास असर नहीं दिखा रहे. इन्हीं में से एक तरीका है ब्राज़ील का. ब्राज़ील के प्रेज़िडेंट जेर बोल्सनारो ने कोरोना के ख़िलाफ कोई भी ऐहतियात बरतने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा था, We will take it on the chest यानी हम इसका खुलकर सामना करेंगे. वहां कोई लॉकडाउन नहीं चल रहा है. प्रेज़िडेंट ख़ुद एंटी-लॉकडाउन रैली में शामिल हो रहे हैं. अमेरिका के वायरॉलजिस्ट डॉक्टर इयान लिपकिन ने जब 21 अप्रैल को इंडिया टुडे टीवी से बात की तो उनसे इस बारे में सवाल किया गया. उन्होंने बताया कि भारत और ब्राज़ील के तरीकों में से कौन सा सही है. डॉक्टर लिपकिन बोले –
“लॉकडाउन ऐसा तरीका है, जो साइंस बैक्ड है. यानी वैज्ञानिक इस तरीके को मंज़ूरी देते हैं. भारत समेत कई देशों में हम देख रहे हैं कि अगर आप पब्लिक डिस्टेंसिंग करते हैं, लॉकडाउन करते हैं तो इस वायरस से होने वाले नुकसान को कम से कम किया जा सकता है. लेकिन दूसरा तरीका है, जो कहता है कि लोग इसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहे हैं. मुझे परवाह नहीं. ये तरीका ख़तरनाक साबित हो सकता है. कई ज़िंदगियां ले सकता है. मेरी तो यही सलाह है कि सभी देशों के लीडर्स इस समय डॉक्टरों की, वैज्ञानिकों की बात करें.”
डॉक्टर लिपकिन ने कहा कि कुछ लोग इस समय कोरोना को लेकर वैसा ही सोच रहे हैं, जैसा कुछ साल पहले तक क्लाइमेट चेंज को लेकर सोच रहे थे. उन्हें लग रहा था कि ये सब हाइप है. चीजें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जा रही हैं. अब असर देख लीजिए. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का काम है लोगों तक, सरकारों तक बेहतर से बेहतर जानकारी पहुंचाना, उपाय बताना. उन पर अमल करवाना तो लीडर्स के हाथ में ही है.
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