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दुनिया खत्म हो, उससे पहले इन भारतीयों को नोबेल प्राइज जरूर मिले

इस हफ्ते नोबेल प्राइज का ऐलान हो रहा है. अपनी तरफ से हमने ये नाम सुझाए हैं.

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फोटो - thelallantop
इस हफ्ते को नोबेल वीक कहो तो ठीक रहेगा. क्योंकि इंटरनेशनल लेवल के सबसे बड़े अवॉर्ड्स माने नोबेल बंट रहे हैं. 6 कैटेगरी में दिए जा रहे हैं. फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, इकॉनोमिक्स, पीस माने शांति और लिटरेचर माने साहित्य. इतना ही देखने से लग रहा है जैसे क्लास टीचर सारे सब्जेक्ट्स में तेज बच्चे को मॉनीटर बनाने की कवायद कर रहा है. लेकिन फिकर नाट. यहां सबको अलग-अलग कैटेगरी का इनाम दिया जाएगा. सवाल ये है कि इंडिया की तरफ से कौन-कौन से नाम सुझाए गए हैं. राहुल गांधी के ताजा आलू के फैक्ट्री वाले बयान से उत्साहित लोग उनका नाम भेज रहे हैं, तकनीकी के क्षेत्र में काम करने के लिए. टिंबर के पेड़ उगाने वाले मोदी जी का नाम भी भेज दें कहो. मार्केट गुरू रामदेव का नाम भेज दो. उन्होंने ऐसे प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं जिनकी मैनुफेक्चरिंग डेट अगले साल की है. लेकिन वो बड़े लोग हैं. हमको अपने बीच से लोग वहां भेजने चाहिए. कुछ सुझाव हम दे रहे हैं. बाकी आप जो ठेल दें, वो भी भेज देंगे.

1. शांति का नोबेल

सबसे पहले मरघट वाली शांति का ही सोचना तुम. मणिकर्णिका घाट के पास घर है क्या तुम्हारा. अगर तुम ये सोच रहे हो कि इसके लिए हम तुम्हारा नाम भेजेंगे. काहे कि मम्मी सुबह लात मारकर जगाती हैं और तुम एकदम शांत पड़ जाते हो. तो गलत सोच रहे हो. हम सजेस्ट कर रहे हैं उन मकान मालिक का नाम, जिनसे मेंटीनेन्स कराने को कह दो तो एकदम मुर्दा मार्का शांत हो जाते हैं. एक नल की टोंटी लगाने को कह दो. फिर देखो. सांप सूंघ जाएगा. मुंह खुला का खुला. काटो तो खून नहीं. ऊपर की सांस ऊपर नीचे की सांस नीचे.

2. मेडिसिन का नोबेल

ऐसे एकाध डॉक्टर हर घर में होते हैं. हमारे यहां कानपुर वाले फूफा जी हैं. हाईस्कूल पास हैं. लेकिन समूचा राष्ट्र अर्थात रिपब्लिक ऑफ इंडिया उनसे मेडिकल सलाह लेता मालूम पड़ता है. उनका कान्फिडेंस ऐसा है. तुम हैड्रोसील, डायबिटीज, खुरपका, बाई, वात, बवासीर से लेकर कैंसर या एड्स तक के सिम्पटम बता दो. वो कहेंगे एक पैरासीटामाल ले लेओ.

3. केमिस्ट्री का नोबेल

बहुत टेक्निकल चीज है. यूपी बोर्ड में हम आर्ट साइड ले लिए थे. इसलिए हमको कुछ पता नहीं. इसके लिए हमने मतगणना कराई है. तो असीस साइंस पढ़के आया है. उसने अपने कोचिंग वाले गुरू जी का नाम भेजा है. जो क्लास में लड़के और लड़कियों का अनुपात हमेशा बराबर रखते थे.

4. साहित्य का नोबेल

मैं खड़ा हूं इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर तक रहा हूं अमलतास के फूलों की तरह उतरते प्लेन रनवे की पट्टी पर कलेजा रगड़ते हुए प्लेन कब तक भरी दुपहरी में पसीना चुचुआये खड़ा रहूंगा क्या है कोई जो ले जाए मुझे और दिलाए मुझे एक साहित्य का ऑस्कर सॉरी नोबेल
कुछ समझे? अमा खोपड़ी लड़ाओ ठांय से दीवार में. यहां भेज रहे हैं नाम फेसबुक पर एंटरमार कविता लिखने वालों के. या जिनकी रात दस बजते ही सस्ती वाली शायरी जाग उठती है. जिसको आज-कल की जनरेशन न्यू इयर के ग्रीटिंग कार्ड पर भी न लिखे. आपकी पहचान का हो कोई तो उसका नाम भेजें.

5. फिजिक्स का नोबेल

मैं अपने एक बहुत करीबी रिश्तेदार का नाम भेज रहा हूं. वो मेरे इतना करीब है कि मुझे सपने में उसकी मिसकॉल आती है. उसने विश्व में सबसे बारीक, सबसे महीन मिसकॉल मारने वाला नियम खोज निकाला है. धरती के किस कोने से, किस स्पीड से, कितना फोर्स लगाकर मिसकॉल मारें, कि दूसरी तरफ सिर्फ स्क्रीन की लाइट जल जाए, रिंगटोन की आवाज निकलने से ठीक आधा नैनो सेकेंड में स्पीकर के अंदर ही घुट जाए. इस महान नियम का नाम उन्होंने अभी तक सोचा नहीं है. लेकिन ये पक्का कर लो कि अगर ये बात ऊपर तक पहुंच गई तो उनको जरूर नोबेल मिल जाएगा.

6. इकॉनमिक्स का नोबल

अपना कोई रैंडम व्हाट्सऐप उठाओ. उसमें किसी सर्वज्ञ कॉन्टैक्ट को चुनो. वो जो हर त्योहार से पहले कुछ काम की बातें बताते हैं. तो दीवाली पर अपने चाइनीज फोन से वो व्हाट्सऐप पर मैसेज करते हैं. कि चाइनीज झालर मत खरीदो. आपका इतना सा योगदान भारतीय इकॉनमी में बूम ले आएगा. उधर चीन की बधिया बैठ जाएगी. यही बताते हैं कि इस दीवाली सड़क किनारे मिट्टी के दिए खरीदो. और प्लीज उनसे पैसे मत कम कराओ. बार्गेनिंग न करना भूलकर. फिर देखो पूरे भारत की GDP कितनी तेज आगे बढ़ती है.
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