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कहानी प्रदीप रावत की, जिन पर देश की पहली 100 करोड़ी फिल्म का नामकरण हुआ!

प्रदीप रावत का 74 साल की उम्र में कैंसर से निधन हो गया. उन्होंने 'गजनी', महाभारत' और 'लगान' में काम किया है.

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आमिर खान को 'गजनी' बनाने का आइडिया प्रदीप रावत ने ही दिया था.

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  • 2008 में फिल्म 'गजनी' रिलीज़ हुई, जो भारत की पहली 100 करोड़ रुपए कमाने वाली फिल्म बनी और इसके विलन गजनी धर्मात्मा का रोल प्रदीप रावत ने निभाया।
  • प्रदिप रावत ने हिंदी फिल्मों में छोटे और सपोर्टिंग रोल निभाकर अपने करियर की शुरुआत की, और साउथ इंडियन फिल्मों में एसएस राजामौली की फिल्म से अभिनय को बढ़ावा मिला।
  • प्रदिप रावत का कैंसर से निधन 4 अगस्त 2026 को हुआ, जिसके बाद सलमान खान समेत उद्योग के कई लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके हैं।

‘गजनी’ वो पहली इंडियन फिल्म थी, जिसने देशभर से 100 करोड़ रुपए का कारोबार किया था. अमूमन हिंदी फिल्मों के नाम हीरो के किरदार के नाम पर रखे जाते हैं. मगर इस फिल्म का नाम इसके विलन गजनी धर्मात्मा के ऊपर रखा गया. इंट्रस्टिंग बात ये है कि इस फिल्म के बनने में भी सबसे बड़ा रोल उसी आदमी का था. उस आदमी का नाम है प्रदीप रावत. प्रदीप अब इस दुनिया में नहीं हैं. 04 अगस्त 2026 को उनका कैंसर से निधन हो गया. मगर उनके निभाए किरदार लोगों के मन में हमेशा छाप छोड़ते रहेंगे. 

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प्रदीप हमें गाहे-बगाहे हिंदी फिल्मों में दिख जाते हैं. साथ ही दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी उनकी मजबूत पैठ है. इनफैक्ट, उन्होंने अपने साउथ इंडियन फिल्म करियर की शुरुआत देश के सबसे बड़े डायरेक्टर एसएस राजामौली की फिल्म से की थी. वो आदमी, जिसके कहने पर आमिर खान फिल्म बना देते हैं और वो देश की सबसे कमाऊ फिल्म बनती है. साउथ का सबसे बड़ा डायरेक्टर उन्हें ढूंढ निकालता है. मगर इन सबकी शुरुआत हुई थी प्रेम से.

# वो आदमी, जो प्यार के चक्कर में मॉडल बन गया

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प्रदीप रावत का जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ. साधारण परिवार था. दूर-दूर तक किसी का फिल्म और एक्टिंग से कोई वास्ता नहीं था. मगर प्रदीप को प्रेम हो गया. वो लड़की पुणे में रहती थी. इसलिए पुणे आना-जाना शुरू हुआ. लड़की कुछ मॉडलिंग की फील्ड से जुड़े लोगों को जानती थी. उसने प्रदीप की फोटो मॉडलिंग एजेंसियों को भेज दी. काम मिलने लगा. प्रेम में लोग क्या-क्या बनते हैं, प्रदीप मॉडल बन गए. मगर उन्हें लग रहा था कि काम नहीं जम रहा है. इसलिए सब छोड़कर वापस घर लौट आए. कुछ समय के बाद वो एक्टिंग करने मुंबई चले गए. स्ट्रगल करना पड़ा मगर काम मिलने लगा. उनका पहला रोल था बीआर चोपड़ा की 'महाभारत' में. इसमें प्रदीप ने अश्वत्थामा का रोल किया था. इसके बाद उन्हें कुछ छोटे बजट की फिल्मों में लीड रोल मिलने लगे.

दो-तीन फिल्मों के पिटने के बाद प्रदीप को लगा कि उनसे गलती हो गई है. अपने एक इंटरव्यू में वो बताते हैं कि उन्हें महसूस हो रहा था कि वो फिल्मों में लीड रोल करने के लिए तैयार नहीं हैं. ऐसे में उन्होंने सपोर्टिंग रोल करने शुरू कर दिए. 1985 में अल्फ्रेड हिचकॉक की फिल्म Dial M for Murder के हिंदी रीमेक ‘ऐतबार’ में प्रदीप ने काम किया. फिल्म में उन्होंने एक पुलिस वाले का रोल किया था. उन्हें ऐसे ही छोटे-बड़े रोल मिल रहे थे. मगर ऐसा नहीं हो पा रहा था कि किसी फिल्म में उन्हें काम की वजह से याद रखा जाए. बावजूद इसके, वो 'अग्निपथ', ‘बागी’, ‘कोयला’ और ‘मेजर साब’ और ‘सरफ़रोश’ जैसी फिल्मों में नजर आए.

# छह महीनों तक सलमान ने प्रदीप को घर से जाने नहीं दिया

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प्रदीप रावत, सलमान खान के बहुत अच्छे दोस्त रहे हैं. 1990 में 'बागी' फिल्म की शूटिंग के दौरान उनमें खूब पटने लगी थी. दोनों को जिम और वर्कआउट का शौक था. इसलिए वो ज्यादातर समय साथ बिताने लगे. प्रदीप के मुताबिक, करीब चार से छह महीने तक सलमान ने उन्हें अपने घर से जाने ही नहीं दिया. दोनों वहीं रहते, खाना खाते, सोते, वर्कआउट करते और नहाकर सीधे अपने काम पर निकल जाते थे. सलमान उन्हें अपने परिवार की तरह रखते थे. जब सलमान किसी बड़ी पार्टी में जाते, तो प्रदीप के पास महंगे कपड़े नहीं होते थे. ऐसे में उनके लिए किराए पर सूट मंगवाया जाता था ताकि वो भी उनके साथ पार्टी में शामिल हो सकें.

हालांकि, कुछ समय बाद प्रदीप ने खुद ही सलमान से दूरी बनाने का फैसला किया. उन्हें एहसास हुआ कि अगर वो हमेशा सलमान के साथ रहेंगे, तो अपने करियर पर ध्यान नहीं दे पाएंगे. इससे उनकी पहचान सिर्फ सलमान के साथ रहने वाले शख्स तक ही सीमित रह जाएगी. प्रदीप ने एक इंटरव्यू में बताया कि स्ट्रगल के दिनों में सलमान की वजह से उन्हें रहने की जगह, अच्छा खाना और बेहतरीन लोगों का साथ मिला. लेकिन वो आरामदायक जिंदगी उनके सपनों को पूरा नहीं कर सकती थी. इसलिए उन्होंने खुद को अलग किया और अपने एक्टिंग करियर पर फोकस करने लगे.

# प्रदीप क्लर्क की नौकरी करते, सलमान बगल में पसरे रहते

कई सालों तक कॉन्टैक्ट में न रहने के बाद प्रदीप और सलमान की एक दिन अचानक मुलाकात हुई. प्रदीप किसी काम से अपनी मारुति वैन में जा रहे थे. सामने से सलमान अपनी बड़ी-सी कार में आ रहे थे. दोनों ने एक-दूसरे को देखा और सलमान ने बीच सड़क पर ही अपनी गाड़ी रोक दी. ऐसे में प्रदीप को भी गाड़ी रोकनी पड़ी, जिससे ट्रैफिक थम गया. कुछ देर में लोगों ने सलमान को पहचान लिया और वहां भारी भीड़ जुट गई. मगर सलमान कार से उतरकर सीधे प्रदीप के पास आए. उन्हें गले लगाया और नाराजगी जताते हुए पूछा- "कहां गायब हो गए थे?" भीड़ बढ़ने और पुलिस पहुंचने के बीच सलमान ने उनसे पूछा कि वो इन दिनों क्या कर रहे हैं. प्रदीप ने बताया कि वो अलग-अलग फिल्मों की शूटिंग कर रहे हैं. इस पर सलमान ने उनसे फ्री होकर मिलने को कहा.

प्रदीप बताते हैं कि स्ट्रगल के दिनों में सलमान उनके बेहद करीब थे. उस समय प्रदीप एक बैंक में क्लर्क की नौकरी करते थे. इसलिए सलमान अक्सर उनसे मिलने बैंक तक पहुंच जाते थे. वो सीधे बैंक के अंदर आकर उनके बगल वाली कुर्सी पर बैठ जाते, जबकि प्रदीप अपना काम करते रहते थे. सलमान उन दिनों प्रदीप के साथ इतना समय बिताते थे कि उन्हें अपने से दूर ही नहीं होने देना चाहते थे. पिछले दिनों प्रदीप के निधन के बाद सलमान ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने दोनों की एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “तुम्हारे साथ कई खूबसूरत पल बिताए, भाई... ऊपरवाला तुम्हारी आत्मा को शांति दे.”

# मुकेश ऋषि ने ‘लगान’ करने से मना किया तो प्रदीप को मिल गई फिल्म 

प्रदीप के करियर को पुश देने में ‘लगान’ का बड़ा हाथ है. इस फिल्म में देवा सिंह सोढी का रोल पहले मुकेश ऋषि को दिया जा चुका था. मगर फिल्म के काम में कुछ देरी होने लगी. शूटिंग शेड्यूल बदला गया. नए शेड्यूल के मुताबिक, जिस वक्त ‘लगान’ की शूटिंग होनी थी, वो डेट मुकेश ने किसी और प्रोड्यूसर को दे रखी थी. इसलिए उन्हें 'लगान' छोड़नी पड़ी. अब मुकेश ऋषि के अलग होने के बाद इस रोल में प्रदीप रावत को कास्ट किया गया, क्योंकि देवा सिंह के किरदार के लिए अलग कद-काठी वाले एक्टर की जरूरत थी.

'लगान' के 20 साल पूरे होने पर प्रदीप रावत ने बताया कि उनके लिए फिल्म में क्रिकेट खेलना मुश्किल नहीं था. उन्हें पहले से क्रिकेट खेलना आता था. वो टीम के बाकी सदस्यों को भी सिखाते थे. मगर मसला ये था कि प्रदीप को फिल्म में सिख सिर्फ दिखना भर था, बल्कि वो किरदार की गहराई तक उतरना चाहते थे. इसलिए जैसे ही उन्हें ये रोल मिला, वो फौरन गुरुद्वारे जाकर मत्था टेक आए. जितने दिन फिल्म की शूटिंग चली, उस पूरे पीरियड में प्रदीप ने शराब और सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया.

दूसरी दिक्कत ये थी कि प्रदीप ने पंजाब में काफी समय गुजारा था. मगर उनकी पंजाबी बहुत दुरुस्त नहीं थी क्योंकि बोलचाल में इस्तेमाल नहीं होती थी. डायलॉग का सही होना जरूरी था, क्योंकि इस फिल्म की डबिंग नहीं होनी थी. इसे सिंक साउंड में शूट किया जाना था. सिंक साउंड यानी शूटिंग के दौरान जो रिकॉर्डिंग हुई, उसी का इस्तेमाल फिल्म में होना था. पोस्ट प्रोडक्शन में उसे बदला नहीं जाना था. ऐसे में आशुतोष गोवारिकर ने अपनी यूनिट की मदद ली. यूनिट में एक कैमरामैन पंजाबी बोलता था. उसने प्रदीप को बताया कि इस शब्द को कैसे बोलना है और उस शब्द को कैसे बोलना है. इस चीज ने प्रदीप की बहुत मदद की.

# राजामौली ने प्रदीप को ढूंढकर निकाला 

हिंदी फिल्मों में एक जैसे रोल्स करके प्रदीप थकने लगे थे. मगर घर भी तो चलाना था. काम छोड़ देने का ऑप्शन नहीं था. ऐसे में उन्होंने साउथ जाने का फैसला किया. हुआ ये कि एसएस राजामौली 'सई' नाम की एक फिल्म बनाने जा रहे थे. उसमें नेगेटिव रोल के लिए उन्हें कोई तगड़ा एक्टर चाहिए था. कुछ लोगों ने ऑडिशन दिया, मगर कोई उनके पैमाने पर खरा नहीं उतर पाया. उन्होंने अपने असिस्टेंट्स से कहा कि मुंबई से फिल्म के लिए कोई एक्टर ढूंढकर लाओ.

राजामौली के असिस्टेंट महादेवन मुंबई आए. थोड़ी बहुत खोजबीन करने के बाद महादेवन एक बीच पर बैठे थे. वहां उन्होंने एक सरदारजी को देखा. उन्हें देखते ही महादेवन को 'लगान' के सरदारजी की याद आ गई. 'लगान' में प्रदीप ने देवा सिंह नाम के ऑलराउंडर का रोल किया था. महादेवन न प्रदीप का नाम जानते थे, न उनका पता. इसलिए उन्होंने मुंबई की एक कास्टिंग एजेंसी को फोन करके ‘लगान’ वाले उस एक्टर के बारे में पूछा. एजेंसी ने जल्द ही प्रदीप को फोन किया और मीटिंग फिक्स हुई.

महादेवन से मिलने के बाद प्रदीप का पहला सवाल था कि क्या वो लोग वाकई उन्हें अपनी फिल्म में लेने को सीरियस हैं. फिर पता चला कि फिल्म हैदराबाद में शूट होगी. प्रदीप ने कहा कि उनकी एक ही डिमांड है. वो ये कि मेकर्स उनका हैदराबाद से वापसी का टिकट करवा दें. महादेवन ने बताया कि उन्हें इन चीजों की चिंता करने की जरूरत नहीं है. वो राजामौली की फिल्म है, सब हो जाएगा. प्रदीप ने ये नाम पहली बार महादेवन के मुंह से सुना था.

इधर सब तय हुआ और प्रदीप हैदराबाद पहुंचे. वो अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं कि उन्होंने करीब 30 साल के एक आदमी को अपनी ओर आते देखा. लोगों ने बताया कि ये एसएस राजामौली हैं. तेलुगु सिनेमा के धुरंधर फिल्ममेकर. हल्की-फुल्की बातचीत के बाद राजामौली ने प्रदीप का टेस्ट लेना शुरू किया. उन्होंने प्रदीप को एक सीन दिया और उसे अपने हिसाब से करने को कहा.

इस फिल्म में गुस्से में लाल प्रदीप को खटिया पर बैठना था. प्रदीप ने परफॉर्म करना शुरू किया. वो अपनी एक्टिंग में इतने इन्वॉल्व हो गए कि गुस्से में खटिया उठा ली. ये फिल्म में राजामौली के कैरेक्टर से अलग था. मगर वो प्रदीप की परफॉर्मेंस से इतने इंप्रेस हुए कि अपनी स्क्रिप्ट में बदलाव करने शुरू कर दिए. उन्होंने अपने विलन को प्रदीप रावत के हिसाब से ढाल दिया.

इस फिल्म में नितिन और जेनेलिया डिसूजा ने लीड रोल किए थे. प्रदीप ने फिल्म में माफिया लीडर भिक्षु यादव का रोल किया था. हिंदी बेल्ट में उन्हें भले ही 'गजनी' की वजह से याद किया जाता है, मगर साउथ में वो अब भी 'सई' वाले विलन के तौर पर ही जाने जाते हैं. ये बात खुद प्रदीप रावत स्वीकार करते हैं.

'द लल्लनटॉप' के साथ हुए एक इंटरव्यू में आशीष विद्यार्थी ने बड़ी सुंदर बात कही थी. उन्होंने कहा कि आर्टिस्ट को सिर्फ एक ही डर रहता है और वो है गुमनामी का. प्रदीप साउथ में ये लड़ाई जीत चुके थे. उन्हें लगातार काम मिलने लगा था. इस दौरान वो 'स्टालिन' और 'गजनी' जैसी सुपरहिट तेलुगु और तमिल फिल्मों में नजर आए.

# आमिर को ‘गजनी’ बनाने का आइडिया खुद गजनी ने दिया 

तमिल फिल्म 'गजनी' में प्रदीप ने डबल रोल किया था. आमिर खान दीपावली पर अपने घर पार्टी रखते हैं. वहां वो अपने करीबी दोस्तों को बुलाते हैं. ‘लगान’ की तकरीबन पूरी स्टारकास्ट हर साल वहां होती है. ऐसी ही एक पार्टी में प्रदीप आमिर खान से मिले. उन्होंने आमिर से कहा कि हाल ही में उन्होंने 'गजनी' नाम की फिल्म की है. उन्हें वो फिल्म देखनी चाहिए. करीब छह महीने टालने के बाद आमिर ने आखिरकार वो फिल्म देखी. ऐसे में प्रदीप ने उनसे उस मूवी का रीमेक बनाने पर चर्चा की. आमिर तब रीमेक में काम नहीं करने के लिए जाने जाते थे. इसलिए उन्होंने प्रदीप की बात को सीरियसली नहीं लिया.

पता नहीं कहां से ये खबर पब्लिक में आ गई कि आमिर 'गजनी' का रीमेक करने जा रहे हैं. तब तमिल फिल्म के लीड एक्टर सूर्या ने भी आमिर से इस फिल्म को हिंदी में बनाने की बात कही. सूर्या ने कहा कि आमिर से बेहतर इस रोल को कोई दूसरा एक्टर नहीं कर सकता.

फाइनली फिल्म पर काम शुरू हो गया. अल्लू अर्जुन के पिता अल्लू अरविंद फिल्म को प्रोड्यूस करने को तैयार हो गए. ओरिजिनल डायरेक्टर एआर मुरुगदोस को भी हिंदी वर्जन से जोड़ा गया. आमिर 'गजनी' को अपने हिसाब से बनाना चाहते थे. कई रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि वो फिल्म का क्लाइमैक्स बदलना चाहते थे. बाद में उन्होंने इसका क्लाइमैक्स खुद लिखा. फिल्म के विलन गजनी धर्मात्मा का रोल प्रदीप रावत को दिया गया.

2008 में 'गजनी' रिलीज़ हुई. ये भारतीय सिनेमा इतिहास की पहली फिल्म थी, जिसने देश भर से 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस किया. सूर्या ने ऑन रिकॉर्ड ये कहा कि उन्हें हिंदी 'गजनी' का क्लाइमैक्स तमिल वर्जन से बेहतर लगा था. इस फिल्म के बाद प्रदीप रावत को हिंदी बेल्ट में मजबूत पहचान मिली, जो ताउम्र उनके साथ रहेगी. वो भारत की पहली 100 करोड़ी फिल्म के विलन हैं. इस फिल्म का नाम उनके किरदार पर रखा गया था.

# कैन्सर से एक जंग जीत चुके थे मगर…

अगले डेढ़ दशक तक प्रदीप ने हिंदी, तेलुगु, तमिल' कन्नड़ा जैसी इंडस्ट्री में खूब काम किया. वो 50 से ज्यादा तेलुगु और 15 से अधिक तमिल फिल्मों का हिस्सा रह चुके हैं. हर इंडस्ट्री में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. उनकी सबसे बेहतरीन फिल्मों में ‘माही’, ‘द हीरो: लवस्टोरी ऑफ अ स्पाय’ और ‘नायक’ को गिना जाता है. 2015 के बाद वो हिंदी फिल्मों में कम नज़र आने लगे. फिल्मों से दूर रहने की वजह पूछी, तो उन्होंने कुछ नया नहीं मिलने की शिकायत की. पर साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें पैसों की तंगी नहीं है. 

प्रदीप की आखिरी हिंदी फिल्म विकी कौशल स्टारर ‘छावा’ थी. उसके बाद उन्होंने न बराबर फिल्में की. इसकी एक वजह उनकी बीमारी भी रही. चार साल पहले उन्हें पेट का कैंसर हो गया था. मगर प्रदीप ने उसका डटकर सामना किया. लेकिन 2026 में उन्हें ब्लड कैंसर हो गया. इस साल जुलाई में उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था, जहां उनका प्लेटलेट बुरी तरह गिरने लगा. प्रदीप उससे उबर नहीं पाए और 04 अगस्त को 74 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.

वीडियो: 'गजनी धर्मात्मा' का रोल करने वाले प्रदीप रावत आज कल कहां हैं?

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