The Lallantop

कोरोना कम था क्या, जो अब राज्य आपस में ही रपटे पड़े हैं!

कोरोना के डर से राज्यों के बीच एक अलग ही किस्म का 'सीमा विवाद' दिख रहा है.

Advertisement
post-main-image
दूसरा लॉकडाउन शुरू होने के बाद से कई राज्यों के बीच मतभेद सामने आए हैं. इनमें दिल्ली, यूपी और बिहार के नाम भी शामिल हैं.
कोरोना वायरस को लेकर जो क्राइसिस मैनेजमेंट है, उसके दो अहम पिलर हैं. केंद्र-राज्य कोऑर्डिनेशन और राज्य-राज्य कोऑर्डिनेशन.
दिक्कत ये है कि अब इन दोनों तरह के कोऑर्डिनेशन में ही टकराव हो रहा है. कैसे? जानते हैं..

उत्तर प्रदेश – बिहार

दूसरे राज्यों से छात्रों को लाने पर मतभेद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 27 अप्रैल को तमाम राज्यों के सीएम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेसिंग थी. मीटिंग में उन छात्रों का मुद्दा भी उठा, जो किसी एक राज्य के हैं और लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्य में फंसे हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने कोटा में फंसे अपने छात्रों को येन-केन-प्रकारेण बुला लिया. मध्य प्रदेश सरकार भी इसी कोशिश में है. इन सबमें बिहार कहां है?
जवाब सीएम नीतीश कुमार ने दिया. नाम लिए बिना यूपी के फैसले पर सवाल उठाए और कहा–
“कोटा में जो बच्चे पढ़ रहे हैं, वे संपन्न परिवारों के हैं. तभी वहां पढ़ रहे हैं. क्या चंद लोग सड़क पर उतरकर मांग करने लगेंगे, तो सरकार झुक जाएगी? जो राज्य वहां से बच्चों को ले-लेकर आ रहे हैं, मैं उनसे पूछता हूं कि क्या इससे संक्रमण का ख़तरा नहीं है? साथ ही क्या ये राजस्थान के साथ भी ग़लत नहीं है? बात सिर्फ छात्रों की नहीं है. मज़दूर भी फंसे हैं. उनके बारे में नहीं सोचना क्या? सवाल ये है कि जब एक राज्‍य से दूसरे राज्‍य की यात्रा पर प्रतिबंध ही लगा है, तो आप किसी को भी लाने की इजाज़त कैसे दे सकते हैं? हम तो केंद्र के निर्देश मानकर बैठे हैं, लेकिन दूसरे राज्य अपने हिसाब से काम कर रहे. सभी राज्यों के लिए एक जैसी नीति होनी चाहिए.”
इससे पहले जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोटा से बच्चों को वापस लाने का फैसला किया था, तब भी नीतीश ने इसे ‘लॉकडाउन के साथ अन्याय’ करार दिया था.
हाईकोर्ट पहुंच चुका है मामला
दूसरे राज्यों में फंसे छात्रों को वापस लाने को लेकर पटना हाईकोर्ट में एक याचिका भी लग चुकी है. हालांकि नीतीश सरकार वहां भी कह चुकी है कि अगर अब छात्रों को वापस लाया जाता है, तो लॉकडाउन सफल कहां से होगा? 27 अप्रैल को इस पर सुनवाई होनी थी, लेकिन वकील साब के टाइम पर न आ पाने के कारण नहीं हो सकी.
झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन भी इन सब बातों पर कुछ बोले –
“हमारे पास अभी इतने संसाधन नहीं हैं कि हम छात्रों को वापस लाने, यहां क्वारंटीन करने और बाकी सारी व्यवस्थाएं कर सकें. केंद्र से अभी इस बारे में कोई मदद या निर्देश नहीं मिले हैं. एक ही देश में दो राज्यों के लिए अलग-अलग नियम कैसे हो सकते हैं?”

दिल्ली – हरियाणा

हरियाणा ने दिल्ली से सटी अपनी सीमाओं को सख़्ती से सील कर दिया है. आम लोगों के लिए सीमा सील होने तक मामला ठीक था. लेकिन हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने 27 अप्रैल को साफ कह दिया कि हरियाणा के जो लोग दिल्ली में काम करने जा रहे हैं, वे अब वापस हरियाणा नहीं आने दिया जाएगा, क्योंकि वे 'कोरोना कैरियर' का काम कर रहे हैं. सब्जियों के आने-जाने पर भी रोक लगा दी गई है. हरियाणा के इन कदमों से दिल्ली सरकार ख़ुश नहीं है.
अनिल विज के बयान पर सत्येंद्र जैन ने कहा है –
"कई लोग ऐसे हैं, जो हरियाणा बॉर्डर पर रहते हैं और उनका लगातार इधऱ-उधर आना-जाना रहता है. कई लोग दिल्ली में रहते हैं, गुरुग्राम काम करने जाते हैं. हम फिलहाल इन सब बहस में नहीं पड़ना चाहते. ऐसे बयानों से इस वक्त सभी को बचना चाहिए."

कर्नाटक – केरल

मार्च अंत और अप्रैल शुरुआत में कर्नाटक ने केरल से जुड़ने वाली कई रोडें बंद कर दीं. केरल में यूं भी काफी मरीज़ आ रहे थे. फिर रोड बंद होने से मेडिकल आवाजाही में भी दिक्कत आने लगी. इसी बात पर केरल और कर्नाटक में तन गई. केरल हाईकोर्ट ने भी कह दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कासरगोड (केरल) से मेंगलुरु (कर्नाटक) को कनेक्ट करने वाला हाइवे खुलवाएं. कर्नाटक नाक-मुंह सिकोड़ रहा था, क्योंकि कासरगोड से लगातार काफी मरीज़ निकल रहे थे. जबकि केरल का कहना था कि मेंगलुरु, कासरगोड से पास है. कोई इमरजेंसी होने पर वहां से मूवमेंट आसान होता है. बाद में मेडिकल इमरजेंसी के लिए नेशनल हाइवे खुला.
Kasargod तस्वीर केरल के कासरगोड की है, जो लगातार कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बना हुआ था. हालांकि अब यहां इंफेक्शन रेट पर कुछ काबू पा लिया गया है. (फोटो- PTI)

केरल – तमिलनाडु

कर्नाटक से किच-किच निपटी ही थी कि अब तमिलनाडु ने केरल से जुड़ने वाले कई रुट ब्लॉक करने शुरू कर दिए हैं. 'न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की ख़बर के मुताबिक, केरल-तमिनलाडु को जोड़ने वाली करीब नौ बायरोड्स को तमिलनाडु पुलिस ने रेत डाल-डालकर ब्लॉक कर दिया है. हालांकि इस केस में ये ग़नीमत है कि फिलहाल नेशनल हाइवे खुले हैं.
हालांकि तमिलनाडु का कहना है कि ये सिर्फ इसलिए किया गया है, ताकि लोग लॉकडाउन तोड़कर यहां से वहां न आ-जा सकें. लेकिन एक ‘सीमा विवाद’ झेल चुका केरल गर्दन उचकाकर अलर्ट मोड में आ गया है.

तमिलनाडु – आंध्र प्रदेश

तमिलनाडु में है वेल्लोर ज़िला और आंध्र प्रदेश में है चित्तूर ज़िला. दोनों के बॉर्डर आपस में लगते हैं. अब वेल्लोर ने क्या किया कि बिना चित्तूर को खोज-ख़बर किए बीच में दो दीवारें खड़ी कर दीं. ताकि आना-जाना बंद हो. चित्तूर ज़िला प्रशासन ने कहा कि दोनों ज़िलों के बीच में बाकायदा चेक पोस्ट है, फिर ये कौन सा तरीका होता है. अच्छी बात ये रही कि ये मामला बातचीत से बन गया और वेल्लोर ने दीवार गिराने की बात मान ली.



पूरी दुनिया कोरोना वायरस से परेशान है, वहीं ओडिशा के इन इलाकों में कुछ अच्छा हुआ!

Advertisement
Advertisement