बारात आने और शादी होने से पहले जरूरी है शादी तय होना. सबसे मुश्किल टास्क तो यही है. नासा के लिए एलियन खोजना आसान है, लेकिन शादी लायक 'मटीरियल' लड़की लड़का खोजना महा जटिल. अक्सर लड़की वाले लड़का देखने जाते हैं तो इसलिए घोड़े जैसा मुंह लटकाए लौट आते हैं कि वहां उन्हें दो रंग के कप में चाय मिल गई थी. अर्थात कप का सेट नहीं था. या लड़के की मां ने पीले रंग की चप्पल पहन रखी थीं जिसकी डिजाइन लड़की की मां को पसंद नहीं आई. इससे उनके घर का घटिया कल्चर पता चलता था तो शादी के लिए मना कर दिया. #2 बकरियों की गंध
कई बार घर के बाहर बंधी बकरियां भी शादी तोड़ने के काम आती हैं. लड़की वाले लड़का देखकर आते हैं और अपने पड़ोसियों को बताते हैं "बकरियन का मूत इतना गंधा रहा था, हमारी बिटिया तो पागल हुइ जाती वहां." #3 सास का बक्सा
अब आओ शादी पर. तिलक होता है न. उसमें सब कुछ चढ़ा देते हैं लड़की वाले. सारा फल, कैश वगैरह और पैशन प्रो भी. लेकिन वो पीतल वाला बड़ा 'थारा' नहीं आया. शर्मनाक है ये. चलो ये भी मिल गया तो सास का बक्सा नहीं मिला. फिर तो शादी न हो पाएगी. #4 रूह अफजा वाला शर्बत न मिलना
बारात शादी की सबसे सत्यानासी चीज होती है. इसमें आया डेढ़ सौ साल का बुड्ढा भी खुद को 16 साल का छौना समझता है. इनके स्वागत में कमी नहीं रहनी चाहिए नहीं तो ये शादी भंड कर देते हैं. इनको तीन तरह की मिठाई और दो तरह की नमकीन डिश परोस दो. लेकिन ये सादे शर्बत पर भड़क सकते हैं. एक ड्रम शर्बत में दो ढक्कन रूह अफजा इनके गुस्से को फना करने के लिए काफी होता है. #5 कम आवाज वाले गोले आतिशबाजी कम हो तो दिक्कत. जरूरत से ज्यादा गोले दग जाएं तो झाम. कई बार बारात को बैरंग वापस इसलिए भी आना पड़ जाता है कि गोलों में सही डेसिमल की आवाज नहीं थी. अगर उनकी गूंज आस पास दस किलोमीटर में नहीं सुनाई देती तो लड़की वाले इस पर भी रिश्ता तोड़ सकते हैं. #6 मान्य का सम्मान
लड़के वाले लड़की वालों के मान्य होते हैं. और लड़के वालों के मान्य, लड़की वालों के मान्य के मान्य होते हैं. ये गणित समझनी थोड़ी मुश्किल है. बस ये समझो कि ये लड़के के फूफा-जीजा वगैरह होते हैं. अगर ये बारात के दौरान लड़की वालों से सरग की तरोई का हलवा या चिरैया के दूध की काजू कतली मांगते हैं तो लड़की वालों का फर्ज होता है कि वह उसे लाकर दे. नहीं तो अंजाम में अक्सर शादी टूट जाया करती है. #7 खाने में कुर्सी मेज वाला सिस्टम
खाने का हिसाब बारात का नहीं, बारात में शामिल हर आदमी का अलग होता है. किसी को पूड़ियों के साथ तीन तरह की सब्जी चाहिए. किसी का एक से काम चल जाता है. कोई बिना रायते के खाना गले से नीचे नहीं उतारता. कोई टाट पट्टी पर पालथी मारकर खाता है तब तृप्ति मिलती है. किसी को बफ़र सिस्टम पसंद होता है. शादी रहेगी कि टूटेगी, ये बारात में शामिल ज्ञानियों के कान भरने पर निर्भर होता है. अगर वो ज्ञानी लड़के वालों को ये समझाने में कामयाब हो जाएं कि जिस सिस्टम में खाना खिलाया गया वो निहायत वाहियात था, तो शादी टूट जाएगी. #8 दूल्हे के नोटों की माला
ये बहुत ज्यादा जरूरी है. दूल्हे से ज्यादा जरूरी उसके गले में नोटों की माला. और आजकल तो ये खतरा भी पैदा हो गया है कि दूल्हा 100-100 की नोटों की जगह 10-20 के नोटों की माला पहनकर आए तो शादी टूट न जाए. #9 जूता चुराई में करप्शन
ये धर्मसंकट वाली प्रथा है. दुल्हन की बहने और सहेलियां केंद्र सरकार के वार्षिक बजट से ज्यादा रुपए मांग बैठती हैं और दूल्हे राजा की बधिया बैठ जाती है. वो दिन दूर नहीं है जब जूता वापस करने की रकम में मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाएगी और शादी टूट जाएगी. #10 विदाई में कंजूसी ये शादी का आखिरी लेकिन जरूरी कांड होता है. इसमें हर बाराती सूखा प्रभावित किसान की तरह लड़की वालों की तरफ देख रहा होता है. कि अब ये बादल बरसेगा और हमारा घर खुशियों से भर जाएगा. अगर उस रस्म में लड़की वालों ने एक भी खास बाराती को छोड़ दिया तो हो चुकी शादी भी टूट सकती है. ये भी पढ़ें:
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