बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने 24 अप्रैल को आशा वर्कर की पिटाई के मामले पर ट्वीट किया. उन्होंने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर का लिंक शेयर करते हुए लिखा,
फ़रीदाबाद में जान मोहम्मद और उनके लोगों ने ASHA workers जो corona की data एकत्र कर रहे थे. उन्हें बेरहमी से मारा पूरे मोहल्ले में ये बात फैलाई गयी की सरकार NRC के लिए डेटा इकट्ठा कर रही है. पुलिस 'जान मोहम्मद' और उनके साथियों को गिरफ़्तार करने (के लिए) ढूंढ रही है.
लेकिन संबित पात्रा ने घटना और इसकी जगह में हेरफेर कर दी. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, यह घटना हरियाणा के नूंह जिले की है. जिले के पुनहाणा थाने में मामले को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है. लेकिन संबित पात्रा ने इस घटना को फरीदाबाद जिले की बता दिया.
इसके बाद फरीदाबाद पुलिस की ओर से संबित पात्रा को जवाब भी दिया गया. पुलिस ने रात साढ़े नौ बजे के करीब ट्वीट किया-
सर नमस्कार, श्रीमान आप आशा वर्कर की जिस घटना का जिक्र कर रहे हैं, वह फरीदाबाद की नहीं है.

संबित पात्रा की ओर से किए गए ट्वीट पर फरीदाबाद पुलिस का जवाब.
लोगों ने पात्रा को घेरा
फरीदाबाद पुलिस की ओर से जवाब आने पर टि्वटर यूजर्स ने संबित पात्रा को घेर लिया. उन पर फेक न्यूज फैलाने के आरोप लगाए गए.
ट्वीट डिलीट किया पर पुलिस ने
लेकिन संबित पात्रा ने अपना ट्वीट डिलीट नहीं किया. हालांकि फरीदाबाद पुलिस ने जरूर अपना ट्वीट डिलीट कर दिया. इस ट्वीट को 200 से ज्यादा रीट्वीट और 400 से ज्यादा लाइक मिले थे.
ट्वीट क्यों हटाया गया? इस बारे में फरीदाबाद पुलिस के पीआरओ सूबे सिंह ने बताया,
संबित पात्राजी को घटना के बारे में गलत जानकारी मिली थी. उन्होंने नूंह की घटना को फरीदाबाद का बता दिया था. इस पर फरीदाबाद पुलिस ने जवाब में ट्वीट किया. लेकिन पुलिस का ट्वीट सही से हो नहीं पाया. उसमें जवाब अधूरा रहा गया. पुलिस की ओर से नूंह के बारे में नहीं लिखा गया. इसलिए ट्वीट हटा लिया गया.फिर संबित पात्रा ने सुधारी बात
वहीं पूर्व पत्रकार और फिल्मकार विनोद कापड़ी ने ट्वीट कर संबित पात्रा पर निशाना साधा. तो पात्रा ने जवाब दिया. इसमें उन्होंने पहले के ट्वीट में की गई गलती को सुधारा. लिखा,
घर-घर जाकर कोरोना वायरस से जुड़ा सर्वे कर रहीं आशा वर्कर पर फरीदाबाद में हमले के बाद नूंह से भी ऐसी ही घटना सामने आई. फ़रीदाबाद में ऐसी घटना पहले हो चुकी थी. ये 'जान मोहम्मद' वाली घटना नूंह की है और FIR पुनहाना थाने में दर्ज है. मत बचाइए 'जान मोहम्मद' को.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, 22 अप्रैल को सजीदा नाम की आशा वर्कर और उसके पति को कुछ लोगों ने पीटा. ये लोग कोरोना वायरस से जुड़े सर्वे के लिए लुहिंगा कलां गांव गए थे. सजीदा ने जान मोहम्मद नाम के शख्स और उसके तीन बेटों पर मारपीट का आरोप लगाया. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि आरोपियों ने एनआरसी के लिए डेटा इकट्ठा करने का आरोप लगाया. और डंडों से पीटा.
इससे पहले 21 अप्रैल को फरीदाबाद में भी कुछ लोगों ने आशा वर्कर्स से मारपीट की थी. रेखा शर्मा नाम की आशा वर्कर ने इस बारे में शिकायत की थी. उन्होंने पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर लिखाई थी. रेखा ने अपनी शिकायत में कहा था कि वह सेक्टर 62 के आशियाना अपार्टमेंट में कोरोना के सर्वे के लिए गई थी. तबलीगी जमात से जुड़े सवाल पूछने पर आरोपियों ने जवाब नहीं दिया. इस पर पुलिस की मदद ली गई. लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उन पर हमला कर दिया. पुलिस इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था.
भारत में कोरोना वायरस के मामलों का स्टेटस










