2024 में Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) प्रमुख Mohan Bhagwat ने OTT कॉन्टेन्ट पर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि ये डिजिटल कॉन्टेन्ट देश के युवाओं को नैतिक रूप से भ्रष्ट कर रहे हैं. RSS ने इसे ‘कल्चरल पॉल्युशन’ बताया है. इस पर लगाम कसने के लिए उन्होंने एक ऐसी टीम बनाई है, जो अब OTT पर आने वाली मूवीज़ और सीरीज़ को मॉनिटर करेगी. इस टीम में कई सदस्य शामिल हैं, जिनमें वाइस-चांसलर्स और प्रोफेसर्स के अलावा RSS प्रचारक भी हैं.
OTT कॉन्टेंट की सेंसरशिप के लिए RSS ने बनाई टीम!
RSS हटाएगा OTT का 'कल्चरल पॉल्यूशन'?

इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि ये पैनल कई महीने पहले बन चुका था. उनकी पहली मीटिंग पिछले महीने यानी अगस्त 2026 में हुई है. RSS से जुड़े सूत्र के मुताबिक,
"ये एक अनऑफिशियल ग्रुप है. हम एक प्रपोज़ल तैयार करेंगे, जिसे बाद में मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर समेत केंद्र सरकार के अन्य विभागों को भेजा जाएगा. इसका मकसद OTT प्लेटफॉर्म्स पर दिखाए जा रहे आपत्तिजनक कॉन्टेन्ट पर रोक लगाना है. हमारा मानना है कि इस तरह के कॉन्टेन्ट को मॉनिटर करने के लिए सेंसर बोर्ड जैसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए. वो इसलिए क्योंकि ये कल्चरल पॉल्युशन माहौल को खराब कर रहा है. परिवारों और युवा पीढ़ी पर इसका बुरा असर पड़ रहा है. वैसे तो इस ग्रुप के लिए कोई तय समयसीमा नहीं रखी गई है. लेकिन प्रपोज़ल तैयार करने से पहले कानून के जानकारों से भी सलाह-मशविरा किया जाएगा."
2024 की विजयादशमी पर मोहन भागवत ने नागपुर में एक भाषण दिया था. इस दौरान उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म्स पर दिखाए जाने वाले कॉन्टेन्ट की आलोचना की. उन्होंने कहा कि OTT पर कुछ चीजें इतनी आपत्तिजनक होती हैं कि उनके बारे में बात करना भी ठीक नहीं लगता. इसलिए उन पर कानून के ज़रिए नजर रखने की जरूरत है. रिपोर्ट के मुताबिक, RSS के इस सेंसर पैनल को बनाने का फैसला कुटुंब प्रबोधन से मिले सजेशन्स के बाद लिया गया है. कुटुंब प्रबोधन संघ की एक इंटर्नल एक्टिविटी है. इसका मकसद ट्रेडिशनल फैमिली वैल्यूज़ को बढ़ावा देना, अलग-अलग पीढ़ियों के बीच रिश्ते बेहतर करना और आपसी मेल-जोल बढ़ाना है. RSS के पदाधिकारियों का मानना है कि OTT प्लेटफॉर्म्स पर दिखाया जाने वाला कॉन्टेन्ट समाज को खोखला कर रहा है. इसलिए उसे सेंसर करना जरूरी है.
इत्तेफाक से, कल ही यानी 16 सितंबर को सेंसर बोर्ड ने अपनी नई कमिटी का गठन किया है. इसमें 18 सदस्यों को जगह मिली है, जिनमें प्रीति ज़िंटा, सुनील शेट्टी, प्रियदर्शन, पंकज त्रिपाठी, रूपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और हंसराज हंस जैसे चर्चित नाम शामिल हैं. इन सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा. इस दौरान वो फिल्में देखकर ये तय करेंगे कि उन्हें बिना किसी बदलाव के रिलीज़ किया जा सकता है या नहीं. किसी मूवी में कितने कट लगेंगे और उसे कौनसा सेंसर सर्टिफिकेट मिलेगा, ये तय करने का काम भी इसी कमिटी का होगा.
वीडियो: संजय दत्त स्टारर 'आखिरी सवाल' को सेंसर बोर्ड ने क्यों नहीं किया पास?










