जंग. एक भयानक और विध्वंसक शब्द. दुनियाभर में सैकड़ों परिभाषाएं हैं इसकी, मगर मकसद सिर्फ एक. बर्बादी. इंसान और कुदरत की बर्बादी. इसके खिलाड़ियों को इतिहास विजेता और हारने वाले के तौर पर याद रखता है पर ये सिर्फ इतिहास का सच है. नारोस्की कहते हैं, 'एक भी सैनिक युद्ध से बिना जख्मी हुए नहीं लौटता.'
चौथा विश्व युद्ध लकड़ियों और पत्थरों से लड़ा जाएगा!
जानते हैं क्यों?
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फोटो - thelallantop
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नारोस्की अकेले नहीं हैं. हर समय अमनपसंद लेखकों-विचारकों ने युद्ध की सही मायने बताए हैं. दिक्कत बस यही है कि हम कभी सुनने को तैयार नहीं हुए. आज के हालात ही देख लीजिए. बस चले तो भारत-पाकिस्तान कुछ मिनटों के अंदर एक-दूसरे को विकलांग बना दें. अभी जरा धीरज धरिये. इसे पढ़िए.
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